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Rajasthan: सीएम गहलोत के संकटमोचक रहे ये विधायक अब बन रहे टेंशन, चुनाव नजदीक आते ही याद दिला रहे वादे

Wed, 20 Jul 2022 04:13 PM IST
Rahul Sampal राहुल संपाल
Updated Wed, 20 Jul 2022 04:13 PM IST
सार

अमर उजाला को मिली जानकारी के अनुसार, इन सभी विधायकों को कांग्रेस और सरकार में शामिल हुए करीब चार साल पूरे होने जा रहे हैं। लेकिन आज तक वादे पूरे नहीं होने से ये सभी नाराज हैं। हाल ही में हुए राज्यसभा चुनावों के दौरान भी इन विधायकों को सीएम गहलोत ने हर मांग पूरी करने का आश्वासन दिया था। इसके बाद माना जा रहा था कि गहलोत ने जादूगरी से इन विधायकों को साध लिया है...

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six MLAs who left the BSP and joined the Congress reminding the CM of his old promises amid speculation of cab
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

राजस्थान में बसपा का दामन छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए छह विधायकों की बयानबाजी से प्रदेश की सियासत गरमाई हुई है। चार साल पहले सीएम अशोक गहलोत के संकटमोचक रहे ये विधायक अब उन्हीं के लिए टेंशन बनते जा रहे हैं। कैबिनेट फेरबदल की अटकलों के बीच ये विधायक सीएम को उनके पुराने वादे याद दिला रहे हैं। सरकार बचाने और राज्यसभा चुनाव जिताने के बदले अपना गिफ्ट मांग रहे हैं। हालांकि इस पर सीएम का कहना है, इन विधायकों के क्षेत्रों में कामों को लेकर कई वादे हुए थे। इनमें से कुछ काम अभी नहीं हुए हैं। अब ये लोग मुझे अपने काम याद दिला रहे हैं तो क्या गलत है। फिलहाल ये लोग कहीं नहीं जा रहे हैं, वे हमारे साथ हैं और हमने मैजिक नंबर हासिल कर लिया है।

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चार साल में वादे पूरे नहीं होने से नाराज हैं विधायक

राजस्थान की कांग्रेस सरकार में एक बार फिर कैबिनेट फेरबदल की सुगबुगाहट तेज हो चली है। विधानसभा चुनावों से पहले होने वाले इस अंतिम कैबिनेट फेरबदल में बसपा से कांग्रेस में शामिल हुए विधायक भी अपने लिए जगह की मांग करते हुए नजर आ रहे हैं। ऐसे में यह विधायक लगातार सरकार के खिलाफ बयानबाजी कर रहे हैं। हाल ही में मंत्री राजेंद्र गुढ़ा के बाद विधायक वाजिब अली ने भी सीएम अशोक गहलोत को निशाने पर लिया है। भरतपुर नगर विधायक अली ने दो टूक कहा कि काम करना तो दूर, मंत्री हमसे मिलते तक नहीं हैं। कई ऐसे मंत्री हैं जिनके विभागों में काम ही नहीं होता है। इस सरकार के मंत्रियों का रवैया ऐसा है जैसे जिंदगीभर के लिए ये मंत्री बन गए हैं। वाजिब अली से पहले सैनिक कल्याण मंत्री राजेंद्र गुढ़ा ने मंत्री शांति धारीवाल को निशाने पर लिया था।

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अमर उजाला को मिली जानकारी के अनुसार, इन सभी विधायकों को कांग्रेस और सरकार में शामिल हुए करीब चार साल पूरे होने जा रहे हैं। लेकिन आज तक वादे पूरे नहीं होने से ये सभी नाराज हैं। हाल ही में हुए राज्यसभा चुनावों के दौरान भी इन विधायकों को सीएम गहलोत ने हर मांग पूरी करने का आश्वासन दिया था। इसके बाद माना जा रहा था कि गहलोत ने जादूगरी से इन विधायकों को साध लिया है। लेकिन बसपा से कांग्रेस में शामिल हुए मंत्री राजेंद्र गुढ़ा, संदीप यादव, लाखन मीणा, कांग्रेस विधायक खिलाड़ी लाल बैरवा और गिर्राज सिंह मलिंगा ने गहलोत सरकार को अपनी मांगों को लेकर एक बार फिर अल्टीमेटम भिजवा दिया है। सभी विधायकों की मांग है कि कैबिनेट का जल्द पुनर्गठन किया जाए।
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नाराज विधायकों का यह कहना है कि सभी को सियासी बगावत के दौरान सरकार बचाने का गिफ्ट दिया जाए और वादे के अनुसार पद मिले। मंत्री राजेंद्र गुढ़ा का कहना है कि गहलोत के वादे के मुताबिक उन्हें वरिष्ठता के अनुसार पद दिया जाना चाहिए। वहीं वरिष्ठ विधायक खिलाड़ी लाल बैरवा और गिर्राज सिंह मलिंगा को भी सरकार में जगह मिले। इसके अलावा सभी विधायकों के क्षेत्र से जुड़े लंबित कामों पर त्वरित कार्रवाई की जाए।

संगठन और आयोग में पद देने से नाराज हैं कांग्रेसी नेता

अमर उजाला से चर्चा में राजस्थान कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि 2018 के बाद से गहलोत सरकार पर आए हर संकट में इन विधायकों ने सीएम गहलोत का साथ दिया है। लेकिन अब ये लोग सरकार के साथ संगठन में भी पद देने की मांग कर रहे हैं। इन विधायकों को संगठन के कामों में तरजीह देना गलत है। इससे इन विधायकों के क्षेत्रों से आने वाले कांग्रेसी नेताओं का राजनीतिक भविष्य खतरे में पड़ जाएगा। सीएम गहलोत ने विधायकों को साथ रखने के लिए मंत्रालयों और आयोगों में पद तो दिया लेकिन संगठन में तो मूल रूप से कांग्रेसी कार्यकर्ताओं को ही जगह मिलनी चाहिए।

पायलट की बगावत के समय बने थे संकटमोचक

दरअसल, राजस्थान में पायलट और गहलोत विवाद के समय बहुजन समाज पार्टी के इन्हीं छह विधायकों ने सीएम अशोक गहलोत के लिए संकटमोचक की भूमिका निभाई थी। इस दौरान सीएम ने भी उन्हें अपने मुसीबत का साथी कहा था। उस वक्त सीएम ने कहा था कि जब कांग्रेस की 99 सीटें आई थीं, तब बसपा विधायकों ने कांग्रेस क्यों ज्वाइन की थी। वजह यह थी कि वे राज्य में स्थायी सरकार और मजबूत सरकार चाहते हैं। अब सीएम गहलोत ने कहा कि सरकार के संकट के समय या बसपा के कांग्रेस में विलय के वक्त विधायकों के साथ उनके इलाकों में काम को लेकर कई वादे हुए थे। इनमें से कुछ काम अभी नहीं हुए हैं। अब इस वक्त जब वे अपने काम मुझे याद दिला रहे हैं तो क्या गलत है। फिलहाल ये लोग कहीं नहीं जा रहे हैं, वो हमारे साथ हैं और हमने मैजिक नंबर हासिल कर लिया।

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