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राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हैं छह लाख अवैध ड्रोन, 2020 तक सात अरब रुपए का होगा घरेलू बाजार

Wed, 23 Oct 2019 07:52 AM IST
योगेश साहू न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: योगेश साहू Updated Wed, 23 Oct 2019 07:52 AM IST
सार

  • देश में उड़ रहे 6 लाख से ज्यादा अवैध ड्रोन, सुरक्षा को खतरा
  • भारत में साल 2020 तक 700 करोड़ रुपए का होगा घरेलू बजार
  • राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी एजेंसियां और फिक्की की रिपोर्ट में खुलासा

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Six lakh illegal drones threat for national security domestic market to be 7 billion rupees by 2020
ड्रोन। - फोटो : अमर उजाला

पिछले दिनों पंजाब से खबर थी कि वहां आतंकवादियों ने ड्रोन से हथियार गिराए हैं। उधर, सऊदी अरब में भी तेल कंपनी पर ड्रोन से हमले की खबर थी। इन दो घटनाओं ने सुरक्षा एजेसियों को सतर्क कर दिया है। क्योंकि ये ड्रोन आतंकी हमले को अंजाम देने में इस्तेमाल हो सकते हैं।



एक रिपोर्ट के अनुसार देश में वर्तमान समय में करीब छह लाख से अधिक अवैध ड्रोन उड़ रहे हैं, जो सुरक्षा एजेंसियों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं हैं। दरअसल, यह सर्वेक्षण रिपोर्ट केंद्रीय सुरक्षा और जांच एजेंसियों के साथ उद्योग संगठन फिक्की ने दी है। राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी इस रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में करीब छह लाख अपंजीकृत या यूं कहें कि बिना नियमन वाले मानवरहित एयर व्हीकल (यूएवी) उड़ान भर रहे हैं।

हालांकि यह ड्रोन वो हैं जो केंद्र सरकार के नियम बनाने से पहले बाजार में आ चुके थे। अब रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इनका नियमन करना जरूरी है। केंद्रीय एजेंसियां एंटी ड्रोन तकनीक, स्काइ फेंस, ड्रोन गन, कैचर और स्काइवॉल-100 जैसी सुविधाओं पर काम कर रही हैं। 

केंद्र सरकार ने भी ड्रोन नियंत्रण के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। वहीं दूसरी तरफ देश में ड्रोन की मांग साल दर साल बढ़ती जा रही है। फिक्की की रिपोर्ट यह भी कहती है कि साल 2020 तक घरेलू बाजार में ड्रोन का कारोबार करीब सात अरब रुपए (700 करोड़ रुपए) से ज्यादा का होने की संभावना है।

भारतीय हवाई अड्डों के लिए बड़ा खतरा हैं ड्रोन

Six lakh illegal drones threat for national security domestic market to be 7 billion rupees by 2020
drone

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यह अपंजीकृत ड्रोन देश के हवाई अड्डों के लिए खतरा हो सकते हैं। मुंबई एयरपोर्ट के पास कई बार संदिग्ध ड्रोन देखे भी गए हैं। हालांकि इन मामलों की जांच कराई गई है। पाकिस्तान से आ रहे ड्रोन और आतंकी हमले के अलर्ट को देखते हुए 100 एयरपोर्ट को रेड जोन में शामिल किया गया है। 

इनमें से 61 एयरपोर्ट्स पर सीआईएसएफ और बाकी के 39 एयरपोर्ट की सुरक्षा संबंधित राज्यों की पुलिस तैनात है। इसके अलावा परमाणु और अंतरिक्ष कार्यक्रम से जुड़े संस्थान, ऊर्जा संयंत्र (गैस, थर्मल और हाइड्रो), संवेदनशील सरकारी भवन और रक्षा उत्पाद इकाई भी रेड जोन में आ गई हैं। यहां ड्रोन मार गिराने के लिए चार स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू है। 

एयरपोर्ट और संवेदनशील भवनों के आसपास ड्रोन निष्क्रिय करने के लिए जैमर तकनीक इस्तेमाल होगी। अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट्स पर एंटी ड्रोन पॉलिसी के तहत ड्रोन सूचक तंत्र स्थापित किया जा रहा है। ओटावा इंटरनेशनल ने इसे अप्लाई किया है।

ड्रोन का आतंकवादी कर रहे उपयोग

Six lakh illegal drones threat for national security domestic market to be 7 billion rupees by 2020
drone - फोटो : pexels.com

पिछले दिनों सऊदी अरब में ड्रोन से तेल कंपनी पर हुआ हमला कोई पहली बार नहीं था। इसी साल मई में यमन के ईरान समर्थित हाउथी विद्रोहियों ने सऊदी अरब के हवाई अड्डे स्थित सैन्य अड्डे को ड्रोन से ही निशाना बनाया था। इससे पहले हाउदी विद्रोहियों ने रियाद में सऊदी अरब के तेल पंपिंग स्टेशन पर विस्फोटक लदे ड्रोन से हमला किया था।

इससे भी कुछ दिन पहले आतंकवादियों ने संयुक्त अरब अमीरात के जलक्षेत्र में सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों को निशाना बनाया था। आतंकवादी वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो पर भी ड्रोन से हमले की साजिश रच चुके हैं। हालांकि मादुरो बाल-बाल बच गए थे।

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ड्रोन रोधी तकनीक पर हो रही बात

Six lakh illegal drones threat for national security domestic market to be 7 billion rupees by 2020
Anti-drone laser weapon

भारत सरकार अलग-अलग ड्रोन रोधी तकनीक का जमीनी परीक्षण करने को लेकर एजेंसियों और अर्धसैनिक बलों को मंजूरी दे चुकी है। भारत में बनाए कुछ ड्रोन रोधी मॉडल का परीक्षण करने के साथ नई तकनीक विकसित करने के लिए भी कहा गया है। बाहरी देशों से भी ड्रोन रोधी तकनीक साझा करने पर बात हो रही है। 

ऑस्ट्रेलिया में निर्मित ड्रोन गन रेडियो और जीपीएस की कार्यप्रणाली को जाम कर सकती है। यह मोबाइल सिग्नल भी रोकने में सक्षम है। इससे ड्रोन को लक्ष्य से भटकाया और जमीन पर उतरने पर मजबूर किया जा सकता है। 

ऑस्ट्रेलिया में डिजाइन किए गए इस उपकरण की सीमा दो किलोमीटर तक है। रशिया की रशेलोट्रॉनिक्स नामक रक्षा ठेका लेने वाली कंपनी ने एक नई टाइनी एंटी ड्रोन तकनीक विकसित की है। यह साढ़े सात किमी की दूरी से भी मिनी ड्रोन को खोजकर नष्ट कर सकती है या फिर अलर्ट जारी कर सकती है।

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ड्रोन पकड़ना आसान भी और मुश्किल भी

Six lakh illegal drones threat for national security domestic market to be 7 billion rupees by 2020
ड्रोन

भारतीय सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ऊंचे उड़ने वाले ड्रोन का परंपरागत राडार जैसे तंत्र से आसानी से पता लगा सकते हैं। परंतु बहुत कम ऊंचाई या तेजी से उड़ने वाले छोटे ड्रोन पकड़ने मुश्किल हैं। इनके लिए अत्याधुनिक राडार तंत्र या जैमर की जरूरत होगी। 

आम ड्रोन 2.4 गीगाहर्ट्ज बैंड से नियंत्रित होते हैं, पर जैमर 'अवरोध' पैदा कर इन्हें निष्क्रिय कर सकते हैं। वहीं स्वायत्त ड्रोन (ऑटोनोमस) के मामले में जैमर फेल हैं, क्योंकि यह पहले से योजना अनुसार निर्देशित (प्रोग्राम्ड) होते हैं और जीपीएस आधारित होते हैं। ऐसे में जीपीएस स्पूफिंग से ड्रोन के जीपीएस को हैक किया जाता है, परंतु यह तकनीकें ड्रोन बनाने से कई गुना महंगी हैं।

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