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Morbi Bridge Case: हादसे के पीछे जंग लगे तार और वेल्डेड सस्पेंडर्स, SIT की जांच रिपोर्ट में हुआ खुलासा
Sun, 19 Feb 2023 11:16 PM IST
शिव शरण शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Sun, 19 Feb 2023 11:16 PM IST
सार
एसआईटी की रिपोर्ट को हाल ही में राज्य शहरी विकास विभाग द्वारा मोरबी नगर पालिका के साथ साझा किया गया था। इसमें बताया गया है कि जांच के दौरान एसआईटी ने पाया कि मच्छू नदी पर 1887 में बनाए गए झूला पुल के दो मुख्य केबलों में से एक केबल में जंग लगी थी।
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मोरबी पुल हादसा
- फोटो : Social Media
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विस्तार
मोरबी ब्रिज हादसे का सबसे बड़ा कारण जंग लगे तार थे। इसके अलावा पुराने सस्पेंडर्स को नए से जोड़ना भी इस हादसे की वजह बने। यह खुलासा घटना की जांच के लिए गुजरात सरकार द्वारा नियुक्त विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अपनी प्रारंभिक जांच में किया है। एसआईटी की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के मुताबिक, एक केबल पर लगभग आधे तारों पर जंग लगना और पुराने सस्पेंडर्स को नए से जोड़ना प्रमुख कारण थे, जिसके कारण बीते साल मोरबी में झूला पुल गिर गया था। इस हादसे में 135 लोग मारे गए थे।
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एसआईटी ने अपनी जांच में बताए हादसे के कारण
एसआईटी की इस रिपोर्ट को हाल ही में राज्य शहरी विकास विभाग द्वारा मोरबी नगर पालिका के साथ साझा किया गया था। इसमें बताया गया है कि जांच के दौरान एसआईटी ने पाया कि मच्छू नदी पर 1887 में बनाए गए झूला पुल के दो मुख्य केबलों में से एक केबल में जंग लगी थी। प्रत्येक केबल सात स्टील के तारों से बनी थी। इस केबल को बनाने के लिए कुल 49 तारों को सात तारों में एक साथ जोड़ा गया था। यह देखा गया है कि केबल के 49 तारों में से 22 में जंग लगी हुई थी। जिससे पता चलता है कि वे तार घटना से पहले ही टूट गए होंगे। शेष 27 तार घटना के वक्त टूट गए।
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इसके अलावा जांच में यह भी पता चला कि पुल के नवीनीकरण के दौरान पुराने सस्पेंडर्स (स्टील की छड़ें जो केबल को प्लेटफॉर्म डेक से जोड़ती हैं) को नए सस्पेंडर्स के साथ जोड़ दिया गया था। इस प्रकार के पुलों में सिंगल रॉड सस्पेंडर्स होने चाहिए।
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पुल की क्षमता की पुष्टि होगी प्रयोगशाला से
एसआईटी के अनुसार, हादसे के वक्त पुल पर लगभग 300 व्यक्ति थे, जो पुल की भार वहन क्षमता से कहीं अधिक था। हालांकि, पुल की वास्तविक क्षमता की पुष्टि प्रयोगशाला रिपोर्ट से होगी। जांच रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अलग-अलग लकड़ी के तख्तों को एल्यूमीनियम डेक के साथ बदलना भी हादसे की वजह में शामिल है।
ओरेवा ग्रुप के एमडी जयसुख पटेल सहित दस आरोपी हो चुके हैं गिरफ्तार
मोरबी पुलिस पहले ही ओरेवा ग्रुप के एमडी जयसुख पटेल सहित दस आरोपियों को आईपीसी की धारा 304 (गैर इरादतन हत्या), 308 (गैर इरादतन हत्या का प्रयास), 336 (मानव जीवन को खतरे में डालने वाला कृत्य), 337 (चोट पहुंचाना) और और 338 के तहत गिरफ्तार कर चुकी है।
एसआईटी टीम में ये लोग
गुजरात सरकार द्वारा गठित की गई एसआईटी टीम में आईएएस राजकुमार बेनीवाल, आईपीएस सुभाष त्रिवेदी, राज्य सड़क और भवन विभाग के एक सचिव और एक मुख्य अभियंता और स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग के एक प्रोफेसर शामिल थे।
गौरतलब है कि मोरबी नगर पालिका ने सामान्य बोर्ड की मंजूरी के बिना ओरेवा ग्रुप (अजंता मैन्युफैक्चरिंग लिमिटेड) को पुल के रखरखाव और संचालन का ठेका दिया था। कंपनी ने मार्च 2022 में पुल को नवीनीकरण के लिए बंद कर दिया था और 26 अक्टूबर को बिना अनुमति और जांच के इसे खोल दिया था। जांच में एसआईटी ने पुल की मरम्मत, रखरखाव और संचालन में कई खामियां पाई थीं।