फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Singhbhum of Jharkhand: Harvard tells the worst Lok Sabha constituency in terms of children lives

सिंहभूम... जिसे हार्वर्ड ने बच्चों के जीवन के लिहाज से सबसे खराब लोकसभा क्षेत्र बताया

Thu, 09 May 2019 02:59 AM IST
गौरव द्विवेदी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची Published by: गौरव द्विवेदी Updated Thu, 09 May 2019 02:59 AM IST
सार

  • 83.9  प्रतिशत बच्चों में खून की कमी, सभी सीटों में सबसे ज्यादा
  • 66.9 प्रतिशत बच्चों का वजन सामान्य से कम, यह भी देश में सर्वाधिक

विज्ञापन
Singhbhum of Jharkhand: Harvard tells the worst Lok Sabha constituency in terms of children lives
सांकेतिक तस्वीर

विस्तार

झारखंड की सिंहभूम लोकसभा सीट पर 12 मई को मतदान होने जा रहा है। इस सीट के राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक समीकरणों के बजाय स्वास्थ्य और पिछड़ेपन के हालात को लेकर ज्यादा चर्चा हो रही है। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी और टाटा ट्रस्ट द्वारा देश की विभिन्न लोकसभा सीटों के बच्चों में बौनेपन, कम वजन, कमजोरी और एनीमिया के हालात पर किए अध्ययन में सिंहभूम सबसे निचले पायदान पर रखा गया। यह दर्शाता है कि इस जनजातीय सीट पर चुने गए नेताओं ने वे वादे पूरे नहीं किए, जो यहां के नागरिकों और विशेष तौर पर बच्चों को एक सामान्य जीवन भी दे सकें।

विज्ञापन


बच्चों में बौनेपन के मायने हैं कि पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की शारीरिक वृद्धि उतनी नहीं होती, जितनी सामान्य तौर पर होनी चाहिए। देश में 35.74 प्रतिशत बच्चे इस श्रेणी में है। लेकिन सिंहभूम में यह आंकड़ा 60 प्रतिशत पहुंच जाता है। कम वजन से 33.47 प्रतिशत बच्चे प्रभावित हैं, लेकिन सिंहभूम में यह आंकड़ा भी दोगुना होकर 66.9 प्रतिशत हो जाता है। एनीमिया देश के 59.39 प्रतिशत बच्चों में है और सिंहभूम में यह औसत 83.9 प्रतिशत है। 
विज्ञापन


इसका नुकसान यह है कि इन बच्चों के पांच वर्ष की उम्र पूरी करने की संभावना किसी सामान्य पोषित बच्चे से नौ गुना कम हो जाती है। रिपोर्ट बताती है कि इन बच्चों की मौत सामान्य बीमारियों में ही हो जाती है, जो किसी अन्य बच्चे को होने पर विशेष नुकसान नहीं करती। अगर ये बच्चे बच भी जाएं तो भविष्य में उनमें किसी शारीरिक विकलांगता और शारीरिक रूप से कमजोर रहने की आशंका बनी रहती है। साथ ही ये इंडीकेटर बताते हैं किस प्रकार क्षेत्र को नेतृत्व देने वाले अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रहे हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन


लोकतंत्र का जश्न चुनाव के रूप में हम मना तो रहे हैं, लेकिन क्या सिंहभूम के इन बच्चों के प्रति हमारी विफलता को राजनीतिक मुद्दा बनाया जा सका है? शायद नहीं... क्योंकि इसके लिए नेताओं को राजनीतिक दलों की विचारधारा और प्रचार से ऊपर उठकर बात करनी होगी, जो आज के दौर में संभव नहीं दिखता। 

इसी सीट ने सीएम दिया, जो भ्रष्टाचार में जेल गए

खास बात है कि 2006 से 2008 में झारखंड के मुख्यमंत्री रहे मधु कोड़ा सिंहभूम सीट से ही जीत कर विधानसभा पहुंचे थे और 2009 में यहीं से निर्दलीय सांसद भी बने। दिसंबर 2017 में उन्हें भ्रष्टाचार के आरोपों में तीन साल की जेल और 25 लाख जुर्माने की सजा दी गई।

बीते दो दशक में तीन बार भाजपा, दो बार कांग्रेस

यह सीट 1996 से अब तक तीन बार भाजपा और दो बार कांग्रेस के पास रही। लेकिन उनके नेताओं की विफलता के कारण क्षेत्र के हालात में कोई परिवर्तन नहीं आया। 2014 में इस सीट पर भाजपा के गिलुवा जीते थे। उन्होंने लोकसभा में इन हालात को उठाया और फंड की कमी पर भी सवाल खड़े किए, लेकिन बहुत असर होता नहीं दिखा।

सर्वश्रेष्ठ लोकसभा क्षेत्र में शुमार पत्तनमथिट्टा से समझें फर्क

बच्चों के स्वास्थ्य से लेकर मानव विकास सूचकांक (एचडीआई) और नेशनल फैमिली हैल्थ सर्वे में केरल की पत्तनमथिट्टा सीट देश में सबसे अच्छी सीट मानी गई है। सबरीमाला विवाद के चलते नजरों में आई यह सीट विकास से जुड़े इन इंडीकेटर्स पर शानदार प्रदर्शन करती रही है। इससे तुलना करते हुए समझ जा सकता है कि सिंहभूम में कितने सुधारों की जरूरत है।


इस बार फिर वही नेता मैदान में

सिंहभूम में मधु कोड़ा की पत्नी गीता कोड़ा इस बार कांग्रेस के टिकट पर मैदान में हैं। उन्होंने पिछला चुनाव अपने पति की बनाई झारखंड भारत समानता पार्टी से लड़ा था, लेकिन 27 प्रतिशत ही वोट मिले। भाजपा के लक्ष्मण गिलुआ 38 प्रतिशत वोट लेकर जीत गए। कांग्रेस के चित्रसेन को 14 प्रतिशत वोट मिले थे। इस बार गीता का मुकाबला फिर गिलुआ से है। गीता को गठबंधन के चलते कांग्रेस के वोटों की आस है, इसलिए मुकाबला कड़ा माना जा रहा है। झारखंड मुक्ति मोर्चा भी इस गठबंधन का हिस्सा है, जिसके क्षेत्र में पांच विधायक हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed