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फैशन डिजाइनर से लेकर आदिवासी तक: शुभेंदु के मंत्रिमंडल में सामाजिक संतुलन, OBC-SC चेहरों को मिला प्रतिनिधित्व

Sun, 10 May 2026 04:53 AM IST
राकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला। Published by: राकेश कुमार Updated Sun, 10 May 2026 04:53 AM IST
सार

पश्चिम बंगाल में नई सरकार के गठन के साथ ही भाजपा ने अपने मंत्रिमंडल में क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन का एक अनूठा उदाहरण पेश किया है। शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाले इस मंत्रिमंडल में समाज के हर वर्ग को प्रतिनिधित्व दिया गया है।

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शुभेंदु अधिकारी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

सबका साथ, सबका विकास के अपने राजनीतिक नारे को जमीन पर उतारते हुए भाजपा ने मंत्रिमंडल में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने पर खास जोर दिया है। शुभेंदु अधिकारी ने मंत्रिमंडल में ऐसे चेहरों को जगह दी है, जिनकी पृष्ठभूमि और राजनीतिक यात्रा एक-दूसरे से बिल्कुल अलग रही है। इसमें फैशन डिजाइनर से राजनीति में आई महिला नेता हैं, आरएसएस के प्रचारक रहे संगठनकर्ता हैं। राजवंशी और अनुसूचित जाति समुदाय के चेहरे हैं, तो आदिवासी इलाकों का प्रतिनिधित्व करने वाले नेता भी शामिल हैं। मुख्यमंत्री के साथ शपथ लेने वालों में दिलीप घोष, अग्निमित्रा पाल, अशोक कीर्तनिया, निशीथ प्रमाणिक और क्षुदिराम टुडू बतौर मंत्री शामिल हैं। हालांकि विभागों का बंटवारा बाद में किया जाएगा, लेकिन शुरुआती तस्वीर से साफ है कि भाजपा ने राजनीतिक अनुभव और सामाजिक प्रतिनिधित्व दोनों को प्राथमिकता दी है।
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अग्निमित्रा पॉल: फैशन डिजाइनर से भाजपा की आक्रामक महिला चेहरा
अग्निमित्रा पॉल उन नेताओं में शामिल हैं, जिन्होंने राजनीति में आने से पहले अलग क्षेत्र में पहचान बनाई। अग्निमित्रा ने भाजपा में तेजी से अपनी जगह बनाई और प्रदेश उपाध्यक्ष तक पहुंचीं। बॉटनी ऑनर्स में बीएससी, फैशन टेक्नोलॉजी में डिप्लोमा और एमबीए करने वाली अग्निमित्रा भाजपा के मुखर महिला चेहरों में हैं। कायस्थ समुदाय से आने वाली अग्निमित्रा ने आसनसोल दक्षिण सीट से तृणमूल कांग्रेस के तापस बनर्जी को 40 हजार से अधिक वोटों से हराया।
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दिलीप घोष: आरएसएस प्रचारक से भाजपा के संगठन निर्माता
दिलीप घोष का राजनीतिक सफर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रचारक के रूप में शुरू हुआ। संगठन में लंबे समय तक काम करने के बाद बंगाल भाजपा की कमान सौंपी गई। 2015 से 2021 तक प्रदेश अध्यक्ष रहते भाजपा को बूथ स्तर तक मजबूत किया और ग्रामीण व आदिवासी इलाकों में पार्टी का विस्तार किया। 2016 में खड़गपुर सदर से विधायक बने। 2019 में मेदिनीपुर से सांसद चुने गए। बंगाल में भाजपा को मुख्य विपक्षी ताकत बनाने का श्रेय काफी हद तक दिलीप घोष को दिया जाता है। 2024 लोकसभा चुनाव में हार के बाद 2026 विधानसभा चुनाव में खड़गपुर सदर से वापसी की।
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निशीथ प्रमाणिक: सबसे युवा केंद्रीय मंत्रियों में रहे
निशीथ प्रमाणिक बंगाल में भाजपा का बड़ा चेहरा हैं। सबसे युवा केंद्रीय मंत्रियों में रहे निशीथ राजवंशी समुदाय से आते हैं। पहले तृणमूल कांग्रेस में रहे निशीथ 2019 में भाजपा में शामिल हुए और उसी साल कूचबिहार से सांसद चुने गए। 35 की उम्र में केंद्र के सबसे युवा मंत्रियों में शामिल हुए और गृह राज्य मंत्री तथा युवा मामले एवं खेल राज्य मंत्री की जिम्मेदारी संभाली। 2026 में माथाभांगा सीट से जीत दर्ज की। उत्तर बंगाल में भाजपा के विस्तार में अहम भूमिका रही।


अशोक कीर्तनिया: सीमावर्ती राजनीति का मजबूत चेहरा
उत्तर 24 परगना जिले के बनगांव उत्तर क्षेत्र से आने वाले अशोक कीर्तनिया लंबे समय से स्थानीय राजनीति में सक्रिय रहे हैं। अनुसूचित जाति बहुल और सीमावर्ती इलाके में भाजपा का संगठन मजबूत करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है। उन्होंने लगातार दूसरी बार विधानसभा चुनाव जीतकर अपनी पकड़ साबित की है। व्यवसाय और राजनीति से जुड़े अशोक को भाजपा के मजबूत एससी चेहरे के रूप में देखा जाता है।

क्षुदिराम टुडू: आदिवासी चेहरा
उत्तर रानीबांध सीट से जीत दर्ज करने वाले क्षुदिराम टुडू को मंत्रिमंडल में शामिल कर भाजपा ने जंगलमहल और आदिवासी इलाकों को स्पष्ट राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है। लंबे समय से आदिवासी क्षेत्रों में संगठन मजबूत करने में सक्रिय रहे टुडू को भाजपा ग्रामीण और जनजातीय इलाकों में महत्वपूर्ण चेहरा मानती है। शुभेंदु के पहले मंत्रिमंडल में दक्षिण बंगाल, उत्तर बंगाल, जंगलमहल, औद्योगिक क्षेत्र और सीमावर्ती इलाकों सभी को प्रतिनिधित्व दिया गया।

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