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बयान: 'गोडसे ने महात्मा गांधी की जगह जिन्ना को मारा होता तो शायद न होता बंटवारा', सामना में संजय राउत का लेख
Sun, 22 Aug 2021 04:21 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्रा
Updated Sun, 22 Aug 2021 04:21 PM IST
सार
मराठी अखबार सामना के कार्यकारी संपादक संजय राउत ने कहा, “अफगानिस्तान में जो स्थिति है वह मुझे देश के अस्तित्व और संप्रभुता की तबाही की याद दिलाती है।”
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संजय राउत
- फोटो : facebook.com/sanjayraut.official
विस्तार
शिवसेना सांसद संजय राउत ने भारत के विभाजन की तुलना अफगानिस्तान की मौजूदा स्थिति से कर दी है। पार्टी के मुखपत्र सामना में प्रकाशित अपने साप्ताहिक स्तंभ ‘रोकटोक’ में राउत ने रविवार को कहा कि यह घटना देश की संप्रभुता तथा अस्तित्व की तबाही के दर्द की याद दिलाती है।
संजय राउत ने यह भी कहा कि अगर नाथूराम गोडसे ने महात्मा गांधी के बजाय पाकिस्तान के निर्माता जिन्ना को मारा होता तो विभाजन को शायद रोका जा सकता था और 14 अगस्त को ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के तौर पर मनाने की जरूरत नहीं होती। मराठी दैनिक के कार्यकारी संपादक राउत ने कहा, “अफगानिस्तान में जो स्थिति है वह मुझे देश के अस्तित्व और संप्रभुता की तबाही की याद दिलाती है।”
राउत ने भारत के विभाजन की तुलना अफगानिस्तान की वर्तमान स्थिति से की और कहा कि अफगानिस्तान के सैनिक वहां से भाग गए। उन्होंने कहा कि विभाजन के दर्द को तब तक नहीं भुलाया जा सकता जब तक अलग किया गया हिस्सा वापस नहीं लिया जाता। गौरतलब है कि 1947 में आजादी से पहले भारत के उत्तर और पूर्व में अलग देश पाकिस्तान बना था।
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राउत ने कहा, “अखंड भारत होना चाहिए ऐसा हम मानते हैं लेकिन यह संभव होगा यह नहीं लगता। लेकिन उम्मीद पर दुनिया कायम है। अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अखंड हिंदुस्तान चाहते हैं तो उनका स्वागत है। उन्हें बताना होगा कि पाकिस्तान के 11 करोड़ मुसलमानों को लेकर उनकी क्या योजना है।”
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संजय राउत ने यह भी कहा कि अगर नाथूराम गोडसे ने महात्मा गांधी के बजाय पाकिस्तान के निर्माता जिन्ना को मारा होता तो विभाजन को शायद रोका जा सकता था और 14 अगस्त को ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के तौर पर मनाने की जरूरत नहीं होती। मराठी दैनिक के कार्यकारी संपादक राउत ने कहा, “अफगानिस्तान में जो स्थिति है वह मुझे देश के अस्तित्व और संप्रभुता की तबाही की याद दिलाती है।”
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राउत ने भारत के विभाजन की तुलना अफगानिस्तान की वर्तमान स्थिति से की और कहा कि अफगानिस्तान के सैनिक वहां से भाग गए। उन्होंने कहा कि विभाजन के दर्द को तब तक नहीं भुलाया जा सकता जब तक अलग किया गया हिस्सा वापस नहीं लिया जाता। गौरतलब है कि 1947 में आजादी से पहले भारत के उत्तर और पूर्व में अलग देश पाकिस्तान बना था।
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राउत ने कहा, “अखंड भारत होना चाहिए ऐसा हम मानते हैं लेकिन यह संभव होगा यह नहीं लगता। लेकिन उम्मीद पर दुनिया कायम है। अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अखंड हिंदुस्तान चाहते हैं तो उनका स्वागत है। उन्हें बताना होगा कि पाकिस्तान के 11 करोड़ मुसलमानों को लेकर उनकी क्या योजना है।”