{"_id":"5f667cb38ebc3eb72b347cda","slug":"shiv-sena-also-opposes-agriculture-bill-said-opposition-parties-will-have-to-unite-against-this-bill","type":"story","status":"publish","title_hn":"कृषि विधेयक पर शिवसेना भी हुई मुखर, कहा- केंद्र सरकार जागी तो ठीक नहीं तो विपक्षी दलों को एकजुट होना पड़ेगा","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
कृषि विधेयक पर शिवसेना भी हुई मुखर, कहा- केंद्र सरकार जागी तो ठीक नहीं तो विपक्षी दलों को एकजुट होना पड़ेगा
Sun, 20 Sep 2020 03:18 AM IST
Rajeev Rai
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
Published by: Rajeev Rai
Updated Sun, 20 Sep 2020 03:18 AM IST
विज्ञापन
Shivsena
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कृषि विधेयक को लेकर पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में विरोध प्रदर्शन शुरू है। लोकसभा में इस विधेयक का समर्थन करने वाली शिवसेना भी अब इसको लेकर मुखर हो गई है। शिवसेना ने ‘सामना’ में लिखा है कि यह विधेयक कृषि प्रधान देश के लिए दुखद है। यदि हरसिमरत कौर के इस्तीफे से केंद्र सरकार जाग गई तो ठीक है। वरना, इसके विरोध में सभी विपक्षी दलों को एकजुट होना पड़ेगा।
विज्ञापन
सामना में ‘अकाली दल का झटका’ शीर्षक के तहत प्रकाशित संपादकीय में लिखा गया कि संसद के मानसून सत्र के दौरान केंद्र में अकाली दल की मंत्री हरसिमरत कौर के इस्तीफे से थोड़ी बहुत खलबली मची है। क्योंकि वह न सिर्फ अकाली दल की केंद्र में प्रतिनिधि हैं बल्कि अकाली दल के सर्वेसर्वा प्रकाश सिंह बादल की बहू भी हैं। शिवसेना पहले ही राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन से अलग हो चुकी थी और अब अकाली दल ने चिंगारी फेंकी है। कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और द्रमुक ने भी इस विधेयक का विरोध किया है। उनको लगता है कि इस नीति से किसान बर्बाद हो जाएंगे।
विज्ञापन
मोदी सरकार की आर्थिक-व्यापार व कृषि नीति संदेहास्पद
शिवसेना ने लिखा है कि सरकार एक तरफ एयर इंडिया, हवाई अड्डे, बंदरगाह, रेलवे और बीमा कंपनियों को निजीकरण के कुएं में ढकेल रही है। वहीं, दूसरी तरफ किसानों को व्यापारियों और आढ़तियों के हाथ सौंप रही है। इसलिए मोदी सरकार की आर्थिक, व्यापार व कृषि संबंधी नीतियां शंका पैदा कर रही हैं।
विज्ञापन