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सपने सच होते हैं: बचपन से ही आसमान में उड़ने के ख्वाब देखती थीं शिरिषा बांदला

Mon, 12 Jul 2021 05:47 PM IST
गौरव पाण्डेय पीटीआई, गुंटूर
पीटीआई, गुंटूर Published by: गौरव पाण्डेय Updated Mon, 12 Jul 2021 05:47 PM IST
सार

'सितारों से आगे जहां और भी है…' भारतीय अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री शिरिषा बांदला के लिए अल्लामा इकबाल की ये पंक्तियां बिल्कुल सटीक लगती हैं क्योंकि उनके सपनों में हमेशा आकाशगंगाएं ही रहती थीं।

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Shirisha Bandla third Indian woman to go to space success story in Hindi
एयरोनॉटिकल इंजीनियर शिरिषा बांदला - फोटो : Website : https://www.virgingalactic.com

विस्तार

न्यू मैक्सिको से 34 वर्षीय एरोनॉटिकल इंजीनियर शिरिषा बांदला वर्जिन गैलेक्टिक के अंतरिक्ष यान टू यूनिटी में ब्रिटिश अरबपति रिचर्ड ब्रैनसन और चार अन्य लोगों के साथ अंतरिक्ष के छोर पर पहुंचीं। शिरिषा के दादा बांदला रागैया ने कहा, 'बचपन में उसकी नजर हमेशा आसमान में रहती थी और वह तारों, हवाईजहाज और अंतरिक्ष की तरफ बेहद उत्सुकता से देखती रहती थी। उसका जुनून ऐसा था कि अंतत: वह अंतरिक्ष में गई और यह उसके लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है।'

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समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार जब शिरिषा छोटी थीं तो रागैया हैदराबाद में (अविभाजित आंध्र प्रदेश) उसकी देखभाल करते थे क्योंकि उसके माता-पिता अमेरिका में बस गए थे। कुछ समय के लिए वह आंध्र प्रदेश के चिराला में अपने नाना-नानी के घर उनके साथ भी रही थी। रागैया ने अपनी पोती की इस उपलब्धि पर गर्व जताते हुए कहा, 'हम बहुत खुश हैं कि उसका सपना और काफी समय की इच्छा पूरी हुई। यह एक महान उपलब्धि है और हमें उस पर गर्व है।'
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अंतरिक्ष में जाने वाली तेलुगू मूल की पहली महिला शिरिषा जब चार साल की थीं तब अपनी बड़ी बहन प्रत्यूषा के साथ माता-पिता के साथ रहने अमेरिका चली गई थीं। शिरिषा के पिता मुरलीधर अपने पिता की तरह एक कृषि वैज्ञानिक हैं और अब वह नई दिल्ली में अमेरिकी दूतावास में पदस्थ हैं। उन्होंने अपनी बेटी की इस सफलता को लेकर टिप्पणी की, 'हम बहुत खुश हैं कि अंतरिक्ष के लिए वर्जिन गैलेक्टिक की उड़ान सफल रही। मैं इससे ज्यादा क्या कह सकता हूं।'
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इस बीच, आंध्र प्रदेश के राज्यपाल विश्वभूषण हरिचंदन और मुख्यमंत्री वाईएस जगनमोहन रेड्डी ने बांदला को उनकी उपलब्धि पर बधाई दी है। राज्यपाल ने एक संदेश में कहा, 'यह पहली तेलुगू लड़की शिरिषा द्वारा एक एतिहासिक सफर था और वह अंतरिक्ष में जाने वाली भारतीय मूल की तीसरी महिला हैं (कल्पना चावला और सुनीता विलियम्स के बाद)।' मुख्यमंत्री ने एक बयान में कहा कि यह राज्य के लिए गर्व की बात है कि गुंटूर में पैदा हुई शिरिषा ने अंतरिक्ष की उड़ान भरी।

वहीं, बांदला ने अपने इस अनुभव को 'अतुल्य' और 'जिंदगी बदलने वाला' करार दिया है। उन्होंने एनबीसी न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में कहा, 'मैं अब भी खुद को वहीं महसूस कर रही हैं लेकिन यहां आना काफी अच्छा है। मैं एक बेहतर दुनिया के बारे में सोच रही थी और तब मेरे दिमाग में एक ही शब्द आ सकता था... अतुलनीय। वहां से धरती का नजारा देखना जिंदगी बदलने वाला पल होता है…। अंतरिक्ष में जाना और वहां से लौटने तक की पूरी यात्रा शानदार थी।'


बांदला ने इस पल को बेहद भावनात्मक करार देते हुए कहा, 'मैं जब छोटी थी तब से अंतरिक्ष में जाने के सपने देख रही थी और वास्तव में यह सपने के सच होने जैसा है।'

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