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पेगासस मामला: शशि थरूर ने कहा- गवाहों के पेश न होने से सुप्रीम कोर्ट को नहीं रोका जा सकता

Thu, 28 Oct 2021 02:53 AM IST
Jeet Kumar पीटीआई, दिल्ली
पीटीआई, दिल्ली Published by: Jeet Kumar Updated Thu, 28 Oct 2021 02:53 AM IST
सार

थरूर ने नागरिक डेटा सुरक्षा और गोपनीयता विषय पर इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, गृह मंत्रालय और संचार मंत्रालय (दूरसंचार विभाग) के अधिकारियों को भी तलब किया था।

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Shashi Tharoor sais after Pegasus order Supreme court can not be stymied by failure of witnesses to appear
शशि थरूर (फाइल फोटो) - फोटो : Facebook

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को पेगासस जासूसी मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। इस फैसले के बाद शशि थरूर की भी प्रतिक्रिया भी आई है। उन्होंने ट्वीट करके कहा कि उच्चतम न्यायालय को गवाहों के पेश न होने या उपस्थिति रजिस्टर पर हस्ताक्षर करने से इनकार करने वाले सदस्यों द्वारा बाधित नहीं किया जा सकता है। 

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थरूर के नेतृत्व वाले आईटी पैनल को 28 जुलाई को एक बैठक करनी थी, जिसमें पेगासस जासूसी के आरोपों सहित कई मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद थी। हालाँकि, बैठक नहीं हो सकी क्योंकि पैनल के भाजपा सदस्यों ने उपस्थिति रजिस्टर पर हस्ताक्षर नहीं किए, भले ही वे बैठक कक्ष में मौजूद थे, जिससे कोरम की कमी हुई। 
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थरूर ने नागरिक डेटा सुरक्षा और गोपनीयता विषय पर इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, गृह मंत्रालय और संचार मंत्रालय (दूरसंचार विभाग) के अधिकारियों को भी तलब किया था।
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नागरिकों के निजता के अधिकार की रक्षा के मुद्दे पर एक महत्वपूर्ण फैसले में, मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना की अध्यक्षता वाली पीठ ने जोर देकर कहा कि कानून के शासन द्वारा शासित एक लोकतांत्रिक देश में, व्यक्तियों पर अंधाधुंध जासूसी की अनुमति नहीं दी जा सकती।


समिति में शामिल ये विशेषज्ञ
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस आरवी रवींद्रन विशेषज्ञ समिति की निगरानी करेंगे। शीर्ष अदालत द्वारा डॉ. नवीन कुमार चौधरी (प्रोफेसर, साइबर सुरक्षा और डिजिटल फोरेंसिक और डीन, राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय, गांधीनगर), डॉ. प्रभारन पी(प्रोफेसर (इंजीनियरिंग स्कूल, अमृता विश्व विद्यापीठम, अमृतापुरी, केरल) और डॉ. अश्विन अनिल गुमस्ते( एसोसिएट प्रोफेसर कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग, आएआईटी बॉम्बे को समिति का सदस्य नामित किया गया है। पूर्व न्यायाधीश रवींद्रन, तकनीकी समिति के काम की निगरानी करेंगे। इस काम में रवींद्रन की मदद पूर्व भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी आलोक जोशी और डॉ संदीप ओबेरॉय करेंगे।

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