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Gaza Peace: 'रणनीतिक संयम बरता या चूक गए अवसर?' गाजा शांति सम्मेलन में भारत की मौजूदगी पर थरूर ने उठाए सवाल

Mon, 13 Oct 2025 09:56 PM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शुभम कुमार Updated Mon, 13 Oct 2025 09:56 PM IST
सार

मिस्र के शर्म अल-शेख में चल रहे गाजा शांति सम्मेलन में भारत सरकार की उपस्थिति पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जहां दुनिया के कई बड़े नेता मौजूद थे, वहां भारत की ओर से सिर्फ विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह की भागीदारी भारत की रणनीतिक दूरी का संकेत देती है। 

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Shashi Tharoor questions Indian government presence Gaza conference Strategic restraint or missed opportunity
कांग्रेस सांसद शशि थरूर - फोटो : ANI

विस्तार

इस्राइल और हमास के बीच दो साल से जारी संघर्ष के बाद हुए शांति समझौते को लेकर दुनियाभर में खुशी का माहौल है। इसी बीच कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने शर्म अल-शेख में हो रहे गाजा शांति सम्मेलन में भारत सरकार के प्रतिनिधित्व को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सम्मेलन में दुनिया के कई बड़े देशों के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री शामिल थे, लेकिन भारत की ओर से केवल एक राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ही मौजूद थे। थरूर ने कहा कि यह स्थिति सम्मेलन में मौजूद प्रमुख नेताओं की तुलना में भारत की उपस्थिति को बहुत कम दिखाती है।

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सम्मेलन में भारत सरकार की रणनीति पर पूछे सवाल
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए पोस्ट में थरूर ने यह भी स्पष्ट किया कि यह कोई आलोचना नहीं है कीर्ति वर्धन सिंह की व्यक्तिगत क्षमता को लेकर, क्योंकि उनकी योग्यता पर कोई सवाल नहीं है। लेकिन इतने बड़े और महत्वपूर्ण नेताओं के बीच भारत का ऐसा प्रतिनिधित्व इस बात का संकेत हो सकता है कि भारत रणनीतिक दूरी बनाए रखना चाहता है।
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हालांकि, थरूर ने कहा कि हमारे दिये गए बयान इस रणनीतिक दूरी की भावना को पूरी तरह नहीं दर्शाते। थरूर ने अपने पोस्ट में जोर दिया कि सम्मेलन में प्रोटोकॉल के कारण भारत की आवाज पुनर्निर्माण और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे अहम मुद्दों पर अपेक्षित प्रभाव नहीं डाल सकी, जितना होना चाहिए था। 





थरूर ने भारत की भूमिका मजबूत बनाने की बात कही
इसके साथ ही शशि थरूर ने अंत में कहा कि इस स्थिति को देखते हुए यह सोचना जरूरी है कि क्या भारत ने इस महत्वपूर्ण मौके को खो दिया है या फिर यह रणनीतिक संयम का ही हिस्सा है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इस विषय पर आगे गंभीर चर्चा और सोच-विचार की जरूरत है ताकि भारत की भूमिका मजबूत और प्रभावी बने।

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पीएम मोदी ने बंधकों की रिहाई पर जताई खुशी
इससे पहले पीएम नरेंद्र मोदी ने इस्राइली बंधकों की रिहाई पर खुशी जताते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की प्रशंसा की है। उन्होंने कहा कि हम दो साल से ज्यादा समय तक बंधक बनाए गए सभी बंधकों की रिहाई का स्वागत करते हैं। उनकी आजादी उनके परिवारों के साहस, राष्ट्रपति ट्रंप के अटूट शांति प्रयासों और प्रधानमंत्री नेतन्याहू के दृढ़ संकल्प का प्रतीक है। हम क्षेत्र में शांति लाने के राष्ट्रपति ट्रंप के ईमानदार प्रयासों का समर्थन करते हैं।

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