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Shashi Tharoor: 'नेहरू को केवल चीन युद्ध, आडवाणी को रथ यात्रा से न आंकें'; शशि थरूर का चौंकाने वाला बयान
Sun, 09 Nov 2025 12:48 PM IST
शिवम गर्ग
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिवम गर्ग
Updated Sun, 09 Nov 2025 12:48 PM IST
सार
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने बीजेपी के संस्थापक एल.के. आडवाणी की विरासत का बचाव किया। उन्होंने कहा कि जैसे नेहरू को चीन युद्ध या इंदिरा गांधी को आपातकाल से नहीं आंका जा सकता, वैसे ही आडवाणी को सिर्फ एक घटना से आंकना गलत है।
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कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भाजपा संस्थापक एल.के. आडवाणी का बचाव किया।
- फोटो : Amar Ujala Graphics
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विस्तार
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने पूर्व उपप्रधानमंत्री और भाजपा के संस्थापक सदस्यों में से एक लाल कृष्ण आडवाणी की विरासत का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि जैसे भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को सिर्फ चीन युद्ध की हार से नहीं आंका जा सकता या इंदिरा गांधी को केवल आपातकाल से नहीं, वैसे ही आडवाणी के लंबे राजनीतिक जीवन को भी एक घटना तक सीमित कर देना अनुचित है।
आडवाणी के 98वें जन्मदिन पर दी शुभकामनाएं
शशि थरूर ने ‘एक्स’ (पूर्व ट्विटर) पर यह बयान आडवाणी के 98वें जन्मदिन (8 नवंबर) पर शुभकामनाएं देते हुए दिया। थरूर ने आडवाणी को 'एक सच्चे राजनेता' बताते हुए कहा कि उनका लोकसेवा के प्रति समर्पण, विनम्रता और ईमानदारी देश के लिए प्रेरणा है। हालांकि, थरूर के इस ट्वीट पर विवाद भी खड़ा हो गया।
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सुप्रीम कोर्ट के वकील संजय हेगड़े ने थरूर की आलोचना करते हुए लिखा माफ कीजिए थरूर साहब, लेकिन इस देश में नफरत के बीज बोना लोकसेवा नहीं कहा जा सकता। इसके जवाब ने थरूर ने लिखा नेहरूजी के पूरे करियर को चीन की हार से नहीं आंका जा सकता, न ही इंदिरा गांधी को सिर्फ आपातकाल से। इसी तरह, हमें यही दृष्टिकोण आडवाणी जी के साथ भी अपनाना चाहिए। उनके लंबे सार्वजनिक जीवन को सिर्फ एक घटना से आंकना गलत है।
ये भी पढ़ें:- संदिग्ध मौत: क्या महिला ने चीटिंयों के खौफ में दी जान? शव के पास बरामद नोट में चौंकाने वाली बातें, जानिए मामला
रथ यात्रा का हवाला देते हुए दिया बयान
यह बयान उन्होंने 1990 की राम रथ यात्रा का हवाला देते हुए दिया, जिसमें आडवाणी ने राम मंदिर आंदोलन को नई दिशा दी थी। हेगड़े ने लिखा कि यह यात्रा भारतीय गणराज्य के मूल सिद्धांतों को बदलने की कोशिश थी, जिसके दूरगामी राजनीतिक प्रभाव आज भी दिखते हैं। थरूर ने इस पर जवाब देते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति के जीवन को एक घटना से परिभाषित करना इतिहास के साथ अन्याय होगा।
इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी 8 नवंबर को दिल्ली में आडवाणी से मुलाकात कर उन्हें जन्मदिन की बधाई दी और उन्हें “भारत के लोकतांत्रिक और सांस्कृतिक परिदृश्य में अमिट छाप छोड़ने वाला नेता” बताया। मोदी ने कहा आडवाणी जी की दूरदर्शिता और सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्धता ने भारत की प्रगति को मजबूती दी है। मैं उनकी लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करता हूं।”
ये भी पढ़ें:- ISRO: जल-बर्फ से लेकर सतह के रहस्य तक... इसरो ने खोले चांद के कई राज, चंद्रयान-2 के डाटा से बढ़ेगा भारत का कद
गौरतलब है कि राम रथ यात्रा 25 सितंबर 1990 को गुजरात के सोमनाथ से शुरू होकर अयोध्या तक पहुंचनी थी, लेकिन इसे बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने रोक दिया था और आडवाणी को गिरफ्तार कर लिया था। इसके दो साल बाद, 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद विध्वंस की घटना हुई।
कांग्रेस ने थरूर के बयान से पल्ला झाड़ा
कांग्रेस के मीडिया-प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने कहा, "हमेशा की तरह, डॉ. शशि थरूर अपनी बात कह रहे हैं और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस उनके हालिया बयान से पूरी तरह अलग है।" खेड़ा ने कहा, "कांग्रेस सांसद और कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य के रूप में उनका ऐसा करना कांग्रेस की विशिष्ट लोकतांत्रिक और उदारवादी भावना को दर्शाता है।"
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आडवाणी के 98वें जन्मदिन पर दी शुभकामनाएं
शशि थरूर ने ‘एक्स’ (पूर्व ट्विटर) पर यह बयान आडवाणी के 98वें जन्मदिन (8 नवंबर) पर शुभकामनाएं देते हुए दिया। थरूर ने आडवाणी को 'एक सच्चे राजनेता' बताते हुए कहा कि उनका लोकसेवा के प्रति समर्पण, विनम्रता और ईमानदारी देश के लिए प्रेरणा है। हालांकि, थरूर के इस ट्वीट पर विवाद भी खड़ा हो गया।
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सुप्रीम कोर्ट के वकील संजय हेगड़े ने थरूर की आलोचना करते हुए लिखा माफ कीजिए थरूर साहब, लेकिन इस देश में नफरत के बीज बोना लोकसेवा नहीं कहा जा सकता। इसके जवाब ने थरूर ने लिखा नेहरूजी के पूरे करियर को चीन की हार से नहीं आंका जा सकता, न ही इंदिरा गांधी को सिर्फ आपातकाल से। इसी तरह, हमें यही दृष्टिकोण आडवाणी जी के साथ भी अपनाना चाहिए। उनके लंबे सार्वजनिक जीवन को सिर्फ एक घटना से आंकना गलत है।
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रथ यात्रा का हवाला देते हुए दिया बयान
यह बयान उन्होंने 1990 की राम रथ यात्रा का हवाला देते हुए दिया, जिसमें आडवाणी ने राम मंदिर आंदोलन को नई दिशा दी थी। हेगड़े ने लिखा कि यह यात्रा भारतीय गणराज्य के मूल सिद्धांतों को बदलने की कोशिश थी, जिसके दूरगामी राजनीतिक प्रभाव आज भी दिखते हैं। थरूर ने इस पर जवाब देते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति के जीवन को एक घटना से परिभाषित करना इतिहास के साथ अन्याय होगा।
इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी 8 नवंबर को दिल्ली में आडवाणी से मुलाकात कर उन्हें जन्मदिन की बधाई दी और उन्हें “भारत के लोकतांत्रिक और सांस्कृतिक परिदृश्य में अमिट छाप छोड़ने वाला नेता” बताया। मोदी ने कहा आडवाणी जी की दूरदर्शिता और सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्धता ने भारत की प्रगति को मजबूती दी है। मैं उनकी लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करता हूं।”
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गौरतलब है कि राम रथ यात्रा 25 सितंबर 1990 को गुजरात के सोमनाथ से शुरू होकर अयोध्या तक पहुंचनी थी, लेकिन इसे बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने रोक दिया था और आडवाणी को गिरफ्तार कर लिया था। इसके दो साल बाद, 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद विध्वंस की घटना हुई।
कांग्रेस ने थरूर के बयान से पल्ला झाड़ा
कांग्रेस के मीडिया-प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने कहा, "हमेशा की तरह, डॉ. शशि थरूर अपनी बात कह रहे हैं और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस उनके हालिया बयान से पूरी तरह अलग है।" खेड़ा ने कहा, "कांग्रेस सांसद और कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य के रूप में उनका ऐसा करना कांग्रेस की विशिष्ट लोकतांत्रिक और उदारवादी भावना को दर्शाता है।"