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Maharashtra: अपराजिता बिल की तर्ज पर महाराष्ट्र में भी विधेयक लाने की पैरवी; शरद पवार ने फडणवीस को भी घेरा
Wed, 04 Sep 2024 01:30 PM IST
काव्या मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: काव्या मिश्रा
Updated Wed, 04 Sep 2024 01:30 PM IST
सार
पश्चिम बंगाल विधानसभा ने मंगलवार को सर्वसम्मति से दुष्कर्म रोधी विधेयक पारित किया। इस पर शरद पवार ने कहा कि महाराष्ट्र को भी पश्चिम बंगाल विधानसभा द्वारा पारित विधेयक को लाने पर विचार करना चाहिए।
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शरद पवार।
- फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से लाए गए दुष्कर्म रोधी विधेयक 'अपराजिता' आजकल काफी चर्चाओं में है। राष्ट्रीय जनता पार्टी (एसपी) के अध्यक्ष शरद पवार ने अपराजिता विधेयक की तर्ज पर महाराष्ट्र में भी विधेयक लाने की पैरवी की है। साथ ही पवार ने उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के एक बयान को लेकर उन पर हमला बोला। कहा कि किसी को भी लोगों के सामने गलत इतिहास पेश नहीं करना चाहिए। दरअसल, फडणवीस ने कहा था कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने सूरत को कभी नहीं लूटा।
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क्या है अपराजिता विधेयक?
पश्चिम बंगाल विधानसभा ने मंगलवार को सर्वसम्मति से दुष्कर्म रोधी विधेयक पारित किया। विधेयक हाल में पारित भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 कानूनों और पॉक्सो (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण) अधिनियम 2012 के पश्चिम बंगाल में क्रियान्वन में संशोधन करने का प्रस्ताव करता है। इसका मकसद महिलाओं और बच्चों के खिलाफ हिंसा के जघन्य कृत्य की त्वरित जांच करना है। ऐसे मामलों की सुनवाई जल्द से जल्द कराना और सख्त से सख्त सजा दिलवाना है। कोलकाता के सरकारी आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में नौ अगस्त को एक महिला चिकित्सक के साथ कथित दुष्कर्म और हत्या की घटना के बाद सरकार विधेयक लेकर आई है।
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क्या बोले शरद पवार?
पवार ने कहा, 'महाराष्ट्र को पश्चिम बंगाल विधानसभा द्वारा पारित विधेयक की तर्ज पर बिल लाने पर विचार करना चाहिए। मेरी पार्टी ऐसे विधेयक का समर्थन करती है। महाराष्ट्र में अभी विधानसभा का कोई सत्र नहीं होगा क्योंकि जल्द ही विधानसभा चुनाव होने हैं। हम अपने चुनाव प्रचार में इस मुद्दे को उठाएंगे और चुनाव घोषणापत्र में भी इसका उल्लेख करेंगे।'
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देशमुख की यह मांग
पूर्व राज्य गृह मंत्री और एनसीपी (एसपी) नेता अनिल देशमुख महा विकास अघाड़ी (एमवीए) शासन के दौरान विधायिका में पारित शक्ति आपराधिक कानून (महाराष्ट्र संशोधन) विधेयक, 2020 को लागू करने की मांग कर रहे हैं, जो राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए लंबित है। बता दें, शक्ति विधेयक में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध के लिए कड़ी सजा का प्रावधान है।
शिवाजी महाराज पर दिए बयान को लेकर फडणवीस पर हमला
फडणवीस के शिवाजी महाराज पर दिए बयान पर शरद पवार ने कहा कि विवाद का मुद्दा यह है कि मराठा राजा ने सूरत को लूटा या नहीं। उन्होंने आगे कहा, 'इस तथ्य के बावजूद, फडणवीस ने अलग बयान दिया, जिसमें उन्होंने संकेत दिया कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने लूटपाट (सूरत) नहीं की। उपमुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस ने शिवाजी महाराज के बारे में गलत इतिहास फैलाया।'
तथ्यों को सामने रखना इतिहासकारों का अधिकार
एनसीपी (एसपी) नेता ने कहा कि वर्षों के शोध के बाद तथ्यों को सामने लाना इतिहासकारों का अधिकार है। जयसिंह राव पवार (प्रख्यात इतिहासकार) ने कल कहा था कि सिर्फ एक बार नहीं, बल्कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने सूरत में दो बार मिशन को अंजाम दिया था। सूरत जाने का इरादा अलग था और इसे जयसिंह राव पवार ने समझाया था। एक अन्य इतिहासकार इंद्रजीत सावंत ने भी अपनी राय रखी है। इसका मतलब है कि किसी को भी लोगों और युवा पीढ़ी के सामने गलत इतिहास पेश नहीं करना चाहिए।
प्रतिमा ढहने पर कही ये बात
सिंधुदुर्ग जिले में हाल ही में शिवाजी महाराज की प्रतिमा ढहने के बारे में पवार ने कहा कि जिस मूर्तिकार को ढांचा तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है उसे क्षेत्र के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी। उन्होंने घटना के पीछे बताए कारण पर सवाल खड़ा किया।
शरद पवार ने कहा कि मूर्तिकार ने इससे पहले कभी इतना बड़ा काम नहीं किया था और फिर भी उन्हें यह दिया गया। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने इस घटना के लिए तेज हवाओं को जिम्मेदार ठहराया है। मगर मुंबई के गेटवे ऑफ इंडिया पर राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री यशवंतराव चव्हाण ने साठ साल पहले शिवाजी महाराज की प्रतिमा लगाई थी और वह प्रतिमा अब भी मजबूती से खड़ी है।
उन्होंने कहा कि महा विकास आघाड़ी (एमवीए) को मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित करने की कोई जरूरत नहीं है। चुनाव परिणामों के बाद संख्या के आधार पर फैसला किया जा सकता है।