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कोरोना का असर: कामाख्या मंदिर में 500 सालों में पहली बार नहीं होगा अंबुवाची मेले का आयोजन
Sat, 13 Jun 2020 01:00 PM IST
आसिम खान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी
Published by: आसिम खान
Updated Sat, 13 Jun 2020 01:00 PM IST
सार
- इस साल नहीं लगेगा शक्तिपीठ कामाख्या मंदिर में अंबुवाची मेला
- 500 सालों में पहली बार रोका गया अंबुवाची मेले का आयोजन
- मंदिर के सबसे बड़े पर्व में कोई बाहरी साधक नहीं होगा शामिल
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कामाख्या मंदिर में 500 सालों में पहली बार नहीं होगा अंबुवाची मेले का आयोजन
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विस्तार
लॉकडाउन के कारण असम के शक्तिपीठ कामाख्या मंदिर का प्रसिद्ध अंबुवाची मेला 500 सालों में पहली बार इस साल नहीं लगेगा। पहली बार मंदिर के सबसे बड़े पर्व में कोई बाहरी साधक शामिल नहीं होगा। 22 से 26 जून के बीच लगने वाले इस मेले में दुनियाभर से तंत्र साधक, नागा साधु, अघोरी, तांत्रिक और शक्ति साधक जमा होते हैं।
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कोरोना वायरस के चलते इस बार इस पर्व की परंपराओं को मंदिर परिसर में चंद लोगों की उपस्थिति में पूरा किया जाएगा। गुवाहाटी प्रशासन ने मंदिर के आसपास मौजूद होटलों, धर्मशालाओं और गेस्ट हाउस को भी हिदायत दी है कि फिलहाल वे कोई बुकिंग न लें।
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अंबुवाची मेला कामाख्या मंदिर का सबसे बड़ा उत्सव माना जाता है। माना जाता है अंबुवाची उत्सव के दौरान माता रजस्वला होती हैं। हर साल 22 से 25 जून तक इसके लिए मंदिर बंद रखा जाता है। 26 जून को शुद्धिकरण के बाद दर्शन के लिए खोला जाता है।
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अंबुवाची मेले के दौरान हर साल यहां 10 लाख से ज्यादा लोग आते हैं। मंदिर बंद रहता है, लेकिन बाहर तंत्र और अघोर क्रिया करने वाले साधकों के लिए ये समय काफी महत्वपूर्ण होता है। इस समय में वे अपनी साधनाएं करते हैं। मंदिर के मुख्य पुजारी मोहित सरमा के मुताबिक परंपराएं वैसी ही होंगी जैसी हर बार होती हैं, बस मेला नहीं लगेगा और बाहरी लोगों का प्रवेश नहीं हो सकेगा।
अंबुवाची उत्सव दुनियाभर के तंत्र और अघोरपंथ के साधकों के लिए काफी महत्वपूर्ण है। मान्यता है कि यहां इस दौरान पराशक्तियां जागृत रहती हैं और दुर्लभ तंत्र सिद्धियों की प्राप्ति आसानी से होती है। 26 जून को जब मंदिर खुलता है तो प्रसाद के रुप में सिंदूर से भीगा हुआ वही कपड़ा यहां दिया जाता है जो देवी के रजस्वला होने के दौरान उपयोग किया गया था।
कपड़े में लगा सिंदूर बहुत ही सिद्ध और चमत्कारी माना जाता है। कामाख्या मंदिर को देश के 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। वर्तमान मंदिर का निर्माण 15वीं शताब्दी का माना जाता है।