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क्या होगा भारत के विकास का रोडमैप?: जीडीपी पर शक्तिकांत दास ने कहा- वैश्विक झटकों के बीच अर्थव्यवस्था मजबूत

Sun, 04 Oct 2026 06:09 PM IST
देवेश त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: देवेश त्रिपाठी Updated Sun, 04 Oct 2026 06:09 PM IST
सार

प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव शक्तिकांत दास ने कहा कि भारत की आर्थिक मजबूती पिछले एक दशक में किए गए व्यापक सुधारों का परिणाम है। उन्होंने मजबूत संस्थानों, व्यापक आर्थिक स्थिरता और उत्पादक क्षमता में निवेश को अर्थव्यवस्था के प्रमुख सुरक्षा कवच बताया।

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प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव शक्तिकांत दास - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स/ANI

विस्तार

प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव शक्तिकांत दास ने कहा है कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है। उन्होंने कहा कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही, जो मजबूत घरेलू मांग और निवेश की बेहतर स्थिति को दर्शाती है। 
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कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव 2026 में बोलते हुए उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक अनिश्चितता, व्यापार में बिखराव, तकनीकी प्रतिबंध, ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और विकसित अर्थव्यवस्थाओं पर ऊंचे सार्वजनिक कर्ज के बीच भारत का आर्थिक प्रदर्शन मजबूत रहा है। दास ने कहा कि पहली तिमाही की 7.8 प्रतिशत वृद्धि, कोविड के बाद के पांच वर्षों यानी 2021-22 से 2025-26 के दौरान दर्ज की गई औसत 7.9 प्रतिशत सालाना जीडीपी वृद्धि के ऊपर आई है।
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वैश्विक चुनौतियों के बीच कितना दमदार है भारत का प्रदर्शन?
पूर्व आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि भारत की आर्थिक वृद्धि की रफ्तार लगातार मजबूत बनी हुई है। दास ने अपने भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व सहयोगी के आकलन का हवाला देते हुए कहा कि जुलाई-सितंबर 2025-26 से अप्रैल-जून 2026-27 तक की अवधि को देखा जाए तो भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि 8 प्रतिशत से थोड़ी अधिक बैठती है।
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दास ने कहा कि यह स्थिति उस बात से भी मेल खाती है, जो उन्होंने कुछ महीने पहले फाइनेंशियल टाइम्स लंदन से बातचीत में कही थी। उन्होंने उस समय कहा था कि भारत 8 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि दर हासिल करने के बेहद करीब है। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक माहौल में भी घरेलू मांग और निवेश की परिस्थितियों ने अर्थव्यवस्था को मजबूती दी है। उनके मुताबिक, पहली तिमाही में दर्ज 7.8 प्रतिशत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि इसी मजबूती को दर्शाती है।

भारत की आर्थिक मजबूती सुधारों का नतीजा : पूर्व आरबीआई गवर्नर 
दास ने कहा कि भारत की आर्थिक मजबूती किसी संयोग का परिणाम नहीं है, बल्कि पिछले एक दशक में किए गए व्यापक और एक-दूसरे को मजबूत करने वाले सुधारों का नतीजा है। उन्होंने कहा कि मजबूत संस्थानों, व्यापक आर्थिक स्थिरता और उत्पादक क्षमता में निवेश ने भारत को वैश्विक झटकों से निपटने के लिए बेहतर स्थिति में पहुंचाया है।

उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत की विकास यात्रा की एक खास बात यह रही है कि संकट आने से पहले ही शासन व्यवस्था की बुनियाद को धीरे-धीरे मजबूत किया गया। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में किए गए कई सुधार किसी एक समस्या के लिए तत्काल उपाय के तौर पर नहीं किए गए थे। बल्कि उनका उद्देश्य ऐसी व्यवस्थागत सुरक्षा तैयार करना था, जिससे अर्थव्यवस्था विभिन्न झटकों को झेल सके और तेजी से वापस पटरी पर आ सके।

व्यापक आर्थिक स्थिरता बनी सुरक्षा कवच
दास ने लचीली मुद्रास्फीति लक्ष्य व्यवस्था, वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी, डिजिटल भुगतान के विस्तार और बैंकिंग क्षेत्र में किए गए सुधारों को भारत की आर्थिक संरचना मजबूत करने वाले प्रमुख कदमों में गिनाया। उन्होंने कहा, "भारत की मजबूती संयोग नहीं है। यह व्यापक और एक-दूसरे को मजबूत करने वाले सुधारों का परिणाम है।"

दास ने व्यापक आर्थिक स्थिरता को भारत की आर्थिक मजबूती का दूसरा प्रमुख आधार बताया। उन्होंने कहा कि 2016 में लागू की गई लचीली मुद्रास्फीति लक्ष्य व्यवस्था ने कोविड महामारी, रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया में संघर्षों सहित लगातार आए विभिन्न झटकों से निपटने में भारत की मदद की।

उन्होंने कहा कि राजकोषीय नीति ने भी विकास को समर्थन देने वाले खर्च से समझौता किए बिना राजकोषीय मजबूती की दिशा में लगातार काम किया। दास ने जीएसटी सहित कर सुधारों का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, जीएसटी ने एकीकृत राष्ट्रीय बाजार बनाने, अलग-अलग स्तर पर लगने वाले करों के प्रभाव को कम करने और अर्थव्यवस्था के औपचारिकरण को बढ़ाने में मदद की। उन्होंने कहा कि वित्तीय क्षेत्र की स्थिति में सुधार भारत की आर्थिक मजबूती की एक "प्रमुख विशेषता" रहा है।

दास ने बताया क्या होगा भारत के विकास का रोडमैप? 
आगे की विकास यात्रा को लेकर दास ने पांच क्षेत्रों की पहचान की। इनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, गहरे वित्तीय बाजार, रणनीतिक आत्मनिर्भरता, सतत विकास और मानव पूंजी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि भारत की एआई रणनीति दो आधारों पर टिकी है।
  • पहला, देश में अपने फाउंडेशन मॉडल और तकनीकी क्षमताएं विकसित करना और दूसरा, "एआई फॉर ऑल" के जरिए इसकी पहुंच व्यापक बनाना।
  • दास ने कहा कि भारत की आर्थिक क्षमता बढ़ने के साथ कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार, पेंशन और बीमा फंड, नगर निकायों के वित्तपोषण तथा हरित और संक्रमण वित्त को भी और मजबूत करने की जरूरत होगी।
  • उन्होंने आत्मनिर्भरता को लेकर कहा, "आत्मनिर्भरता का मतलब अलग-थलग होना नहीं है।" उनके अनुसार, घरेलू क्षमताओं को मजबूत करने के साथ वैश्विक बाजारों के साथ एकीकरण भी जारी रहना चाहिए।
  • दास ने कहा कि सुधारों की गति को बनाए रखना बेहद महत्वपूर्ण होगा। उन्होंने कहा कि भारत का लक्ष्य केवल तेज आर्थिक वृद्धि हासिल करना नहीं है, बल्कि लंबे समय तक टिकाऊ और मजबूत आर्थिक विकास सुनिश्चित करना है।
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