जुल्मी शौहर से तो उसका तलाक देना अच्छा, मौलानाओं के सामने नहीं गिड़गिड़ाएगी शबनम
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हाफिजगंज कस्बे की रहने वाली शबनम को उसके पति आजाद शाह ने केवल इसलिए तलाक दे दिया था कि उसने उसको गलत रास्ते पर जाने से रोका था जोकि शरियन एक बीवी का फर्ज भी था। अपने पति को नेक बनाना चाहती थी।
चोरी और नशा करने से जब जब उसने पति को रोका, बदले में लात घूंसे और गालियां ही मिलीं। एक बार तो जालिम ने उसको छत से नीचे फेंक दिया। वह आज भी ठीक से चल नहीं पाती। पति ने उसी शरियत का अस्त्र बनाकर शबनम की जिंदगी तबाह कर दी। शबनम का कहना है कि उसको तलाक मंजूर है। अब किसी फतवे की भी जरूरत नहीं।
शबनम के बेटे मुश्ताक ने कड़ी मेहनत से एक कमरा हाफिजगंज में बनाया। इसमें ही उसका पूरा परिवार रहता है। घर का खर्च बेटा मुश्ताक और बेटी आफरीन कढ़ाई करके उठाते हैं। वह चाहती है कि यह मकान उसको ही मिले। इसे बेचकर वह अपने बच्चों के साथ दूसरी जगह रहना चाहती है। लड़कियों की शादी करने और रहने की समस्या अब उसके सामने खड़ी है।
शरियत के हुक्म से वह एक मां का फर्ज आखिरी सांस तक निभाएगी। शबनम के दोनों भाई अकबर अली व अफसर अली की भी स्थिति इतनी बेहतर नहीं कि वह उसके परिवार को अपने घर में रख सकें। शबनम का कहना है कि परिस्थितियां चाहें जो भी रहें वह अपने बच्चों को लिए पति के सामने कभी गिड़गिड़ाएगी नहीं।
उलमा राह दिखाएं, कैसे रोकें ऐसे तलाक
शबनम की कहानी पढ़ कर कई सामाजिक संगठनों ने भी चिंता जाहिर की है। सवाल उठाए हैं कि इन हालात में तलाक देने वालों की सजा और उन्हें रोकने के लिए भी उलमा शरियत के हवाले से कोई कायदे सामने रखें। कई संगठन उसकी मदद को आगे आने के लिए तैयार हैं बशर्तें वह अपनी इच्छा जाहिर करे कि वह क्या चाहती है।
आम औरत सेवा समिति (आस) की अध्यक्ष समयुन खान शबनम के पति आजाद की हरकत को बिल्कुल गलत बताती हैं। उन्होंने कहा कि यह भी अकसर देखने में आया है कि कोई मर्द किसी दूसरी लड़की से शादी करने के लिए पहली बीवी को सिर्फ तीन बार तलाक... कह कर मुक्ति पा जाता है। इसे रोकने के लिए सख्त नियम होना चाहिए। इस तरह अपने स्वार्थ की खातिर कोई कैसे बीवी को छोड़ सकता है। फिर वह कहां जाएगी। इसके पीछे अगर कोई वजह हो तो उलमा साफ करें या इस व्यवस्था को बदल दें।
वुमेन वाइस की अध्यक्ष शब्बो खान ने कहा, तीन बोल औरत को कुबूल कर लेते हैं और तीन बोल तलाक के औरतों को दूर कर देते हैं। यह बड़ी नाइंसाफी है। अगर महिला गलत भी है तो पहले बातचीत करना चाहिए। जिस स्थिति में आजाद ने अपनी बीवी को तलाक दिया है वह सरासर गलत है। पहले तो इस्लाम में बीवी पर हाथ उठाना ही गलत कहा गया है ऊपर से बेकुसूरी में तलाक देना। इसके लिए शौहर को कड़ी सजा मिलना चाहिए। इसमें उलमा भी कुछ ऐसा फैसला लें ताकि इस तरह के मामले में मर्द पर भी पाबंदी आयद हो।
जन सेवा टीम के पम्मी खां वारसी ने भी कहा है कि इस तरह के तलाक पर रोक के लिए अलग से कोई व्यवस्था होना जरूरी है। जमीयतुल कुरैश के महानगर अध्यक्ष फिरोज सैफ कुरैशी ने कहा कि हाफिजगंज की घटना इंसानी तौर पर ठीक नहीं है। उलमा को भी साफ करना चाहिए कि तलाक किस बिना पर ठीक है। इसकी अहमियत को बताएं ताकि इस पर सवाल न उठें।
राष्ट्रीय महासचिव जमात रजा मुस्तफा, दरगाह आला हजरत बरेली मौलाना शहाबउद्दीन रजवी ने कहा कि लोग तलाक के बाद की कठिनाइयों को समझते नहीं जिनकी वजह से पूरा परिवार उजड़ जा रहा है। इसे रोकने के लिए आल इंडिया जमात रजा मुस्तफा मुहिम चलाएगी। इसके तहत अवाम के बीच जा कर तलाक देने की शरई प्रक्रिया की जानकारी उलमा देंगे। हाफिजगंज के मामले को देखेंगे और जो भी संभव कानूनी, शरई और अखलाकी सहायता हो सकेगी दी जाएगी।