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Shabnam Case: कपास की 900 लटों और 7200 धागों से तैयार होगा शबनम की फांसी का फंदा

Tue, 23 Feb 2021 05:46 PM IST
Harendra Chaudhary आशीष तिवारी, अमर उजाला, नई दिल्ली
आशीष तिवारी, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 23 Feb 2021 05:46 PM IST
सार

  • बक्सर की जेल में तैयार होता है फांसी का फंदा। ध्यान रखा जाता है कि जिसे फांसी हो रही है उसे फंदे से कोई चोट न लगे
  • एक विशेष किस्म की कपास की वैरायटी से फंदा तैयार होता है
  • नाथूराम गोडसे, अफजल गुरु, अजमल कसाब और निर्भया के हत्यारों की फांसी का फंदा बिहार की बक्सर जेल में ही बना

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Shabnam Case: Rope used for execution of death penalty of Nathuram Godse, Afzal Guru, Ajmal Kasab and Nirbhaya killers was made in Bihar Buxar Jail.
फांसी का फंदा - फोटो : फांसी का फंदा

विस्तार

उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले के बावनखेड़ी हत्याकांड की दोषी शबनम की फांसी एक बार फिर टल गई है। शबनम के अधिवक्ता की ओर से राज्यपाल को दोबारा से दया याचिका भेजी गई है। दया याचिका दाखिल होने की वजह से शबनम का डेथ वारंट जारी नहीं हो सका है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जो फांसी का फंदा शबनम के गले में पड़ेगा, उसे कपास की 900 लटों और 7200 धागों से तैयार किया जाएगा। यही नहीं उस धागे को बनाने वाले कपास का नाम "जे34" है।

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महात्मा गांधी का हत्यारा नाथूराम गोडसे हो या अफजल गुरु। अजमल कसाब हो या निर्भया की हत्या के चारों दोषी। सभी लोगों के गले की माप लेकर फांसी का फंदा बिहार की बक्सर जेल से ही बनकर तैयार हुआ। दरअसल पूरे देश में फांसी का फंदा सिर्फ बक्सर की जेल में ही बनाया जाता है। बक्सर जेल में अपनी सेवा दे चुके एक पूर्व अधिकारी ने बताया कि यहां पर फांसी का फंदा बनाने के लिए चार लोगों के पद सृजित हैं। यह सभी लोग फांसी के फंदे को अपनी देख-रेख में तैयार कराते हैं। हालांकि फंदा जेल में सज़ायाफ्ता कैदी ही तैयार करते हैं।
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वह बताते हैं कि जिस कपास से फांसी का फंदा तैयार होता है उस कपास वैरायटी 'जे34' है। दरअसल कपास की यह वैरायटी ज्यादा मुलायम होती है। फांसी का फंदा बनाने के लिए सबसे पहले कपास की लटें तैयार की जाती हैं। फिर इन्हें आपस में मिलाया जाता है। डेढ़ सौ लटों से फिर एक बड़ी लट बनती है। उक्त अधिकारी के मुताबिक डेढ़-डेढ़ सौ लटों को जोड़कर अलग-अलग छह बड़ी लटें तैयार की जाती हैं।
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यानी नौ सौ लटों से एक रस्सी का आकार बनाया जाता है। इस फांसी की रस्सी को आकार देने में कपास के 7200 पतले-पतले धागे लगते हैं। फांसी के फंदे को तैयार करने में एक सप्ताह का वक्त लगता है। बक्सर जेल में फांसी के फंदे के ऑर्डर दिए जाते हैं उसके बाद फांसी का फंदा तैयार किया जाता है।

जब फांसी के फंदे को तैयार किया जाता है, तो बक्सर जेल में अंग्रेजों के जमाने में लगाई गई फांसी के फंदे को तैयार करने वाली मशीन से धागे लपेटे जाते हैं। उसके बाद एक फंदा तैयार किया जाता है। कभी-कभी यह फंदा जिसे फांसी दी जाती है उसकी गर्दन की नाप का होता है या गर्दन की नाप के मुताबिक फांसी की लंबाई तैयार कर संबंधित जेल प्रशासन के लिए छोड़ दिया जाता है।

जब फांसी के फंदे को बनाने की पूरी प्रक्रिया की जाती है, उसके साथ इस बात का विशेष ध्यान रखा जाता है कि तैयार किया जाने वाला फांसी का फंदा अत्यंत मुलायम और नरम हो। जेल अधिकारियों के मुताबिक फांसी देने में इस बात का सबसे ज्यादा ख्याल रखा जाता है कि जिसे फांसी दी जा रही है उसके गले में चोट के निशान ना बने। यही वजह है कि फांसी के फंदे को विशेष प्रकार की वैरायटी वाले कपास से बनाया जाता है, जो बहुत मुलायम होता है। और उस कपास को और ज्यादा मुलायम करने के लिए बक्सर की जेल में लगी मशीन का इस्तेमाल करते हैं।

दिल्ली में तिहाड़ जेल के पूर्व लॉ ऑफिसर सुनील गुप्ता कहते हैं, दरअसल बक्सर गंगा का तटीय इलाका है। इस वजह से उस इलाके में होने वाली कपास पहले से ही ज्यादा मुलायम होती है। विशेष प्रकार की जो कपास होती है जिससे फांसी का फंदा बनाया जाता है उसे मशीन के माध्यम से और मुलायम किया जाता है।


सुनील गुप्ता के मुताबिक यही वजह रही कि अंग्रेजों के जमाने में बक्सर में ही फांसी का फंदा बनाने की अनुमति दी गई, जो आज तक जारी है। दरअसल अंग्रेजों के जमाने में बक्सर इलाके में सबसे बड़ी छावनी हुआ करती थी। इसके अलावा, अपने जमाने में बक्सर की जेल सबसे बड़ी जिलों में शुमार थी। यही वजह रही कि अंग्रेजों ने बक्सर की जेल में फांसी का फंदा बनाने की मशीन लगाई।

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