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तीन साल पहले हुए स्टिंग ऑपरेशन से खुलेंगे कई राज, पूछताछ कर सकती है सीबीआई
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Wed, 31 Jan 2018 07:30 AM IST
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उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग में किस तरह भर्तियों में धांधली की गई, चार साल पहले एक चैनल की ओर से कराए गए स्टिंग ऑपरेशन में इसका खुलासा हुआ था। हालांकि इस दौरान जिन कर्मचारियों ने राजफाश किया था, उन सभी को सस्पेंड कर दिया गया था। बाद में इन कर्मचारियों की बहाली हो गई। अब चर्चा है कि स्टिंग ऑपरेशन की सीडी सीबीआई को मिल चुकी और सीबीआई की टीम कुछ कर्मचारियों से पूछताछ कर सकती है।
एक चैनल ने जुलाई 2014 में आयोग के छह कर्मचारियों और पांच विशेषज्ञों का स्टिंग ऑपरेशन किया था। इस दौरान कर्मचारियों ने बताया था कि आयोग की ओर से की जाने वाली भर्तियों में किस तरह से धांधली की जाती है। विशेषज्ञों ने भी यह बात स्वीकारी थी कि कुछ अभ्यर्थियों को अधिक नंबर देने के लिए उन पर दबाव बनाया जाता है और मना करने पर विशेषज्ञों से दुर्व्यवहार किया जाता है। चैनल में प्रसारित यह कार्यक्रम तकरीबन दो घंटे का था। कार्यक्रम के प्रसारण के बाद सभी छह कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया था। हालांकि बाद में सभी की बहाली हो गई।
सूत्रों के मुताबिक इस कार्यक्रम की सीडी सीबीआई को मिल चुकी है और सीबीआई इस सीडी के आधार पर कुछ कर्मचारियों और विशेषज्ञों से भी पूछताछ कर सकती है। ऐसे में आयोग के पूर्व अध्यक्ष अनिल यादव के कार्यकाल में हुईं भर्तियों को लेकर कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं और गड़बड़ी करने वालों पर सीबीआई का शिकंजा कस सकता है। सूत्रों का कहना है कि सीबीआई के कुछ अफसर पिछले दो-तीन दिनों से इलाहाबाद में हैं और अपने स्तर से उन्होंने जांच भी शुरू कर दी है। हालांकि आयोग के अफसर इसकी पुष्टि नहीं कर रहे हैं।
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एक चैनल ने जुलाई 2014 में आयोग के छह कर्मचारियों और पांच विशेषज्ञों का स्टिंग ऑपरेशन किया था। इस दौरान कर्मचारियों ने बताया था कि आयोग की ओर से की जाने वाली भर्तियों में किस तरह से धांधली की जाती है। विशेषज्ञों ने भी यह बात स्वीकारी थी कि कुछ अभ्यर्थियों को अधिक नंबर देने के लिए उन पर दबाव बनाया जाता है और मना करने पर विशेषज्ञों से दुर्व्यवहार किया जाता है। चैनल में प्रसारित यह कार्यक्रम तकरीबन दो घंटे का था। कार्यक्रम के प्रसारण के बाद सभी छह कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया था। हालांकि बाद में सभी की बहाली हो गई।
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सूत्रों के मुताबिक इस कार्यक्रम की सीडी सीबीआई को मिल चुकी है और सीबीआई इस सीडी के आधार पर कुछ कर्मचारियों और विशेषज्ञों से भी पूछताछ कर सकती है। ऐसे में आयोग के पूर्व अध्यक्ष अनिल यादव के कार्यकाल में हुईं भर्तियों को लेकर कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं और गड़बड़ी करने वालों पर सीबीआई का शिकंजा कस सकता है। सूत्रों का कहना है कि सीबीआई के कुछ अफसर पिछले दो-तीन दिनों से इलाहाबाद में हैं और अपने स्तर से उन्होंने जांच भी शुरू कर दी है। हालांकि आयोग के अफसर इसकी पुष्टि नहीं कर रहे हैं।
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आज आएगी सीबीआई की टीम
सीबीआई
सर्किट हाउस में प्रतियोगियों से हो सकती है मुलाकात
सीधी भर्तियों में भी गड़बड़ी की हो सकती है शिकायत
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की ओर से पिछले पांच वर्षों में हुईं भर्तियों की जांच के लिए सीबीआई की टीम बुधवार सुबह इलाहाबाद पहुंच रही है। इस दौरान टीम के सदस्य सर्किट हाउस में प्रतियोगियों से मुलाकात कर सकते हैं और इस दौरान प्रतियोगी भर्तियों में हुई धांधली से जुड़े साक्ष्य सीबीआई को सौंप सकते हैं।
हालांकि मुख्य शिकायत पीसीएस परीक्षा को लेकर है लेकिन सीधी भर्तियों में भी धांधली की शिकायतें कम नहीं हैं। इसके अलावा आरओ-एआरओ प्रारंभिक परीक्षा-2016 की जांच पहले से ही सीबीसीआईडी कर रही है। ऐसे में अन्य भर्तियों से संबंधित मामले भी सीबीआई तक पहुंचाए जा सकते हैं। सीबीआई के आने से पहले कुछ पुराने मामलों को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।
इनमें आयोग की ओर से 1985 में आयोजित पीसीएस परीक्षा में पुलिस उपाधीक्षक और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (महिला) के पदों पर हुई भर्ती में धांधली के मामले शामिल हैं। पूर्व में इन भर्तियों को लेकर भी सीबीआई जांच की मांग की गई थी। उस वक्त शासन की ओर से सीबीआई जांच के लिए पत्र भेजा गया था।
इसके अलावा काफी पहले आयोग में आगजनी की कुछ घटनाएं भी हुईं थी और उस वक्त कई महत्वपूर्ण दस्तावेज नष्ट हो गए थे। कुछ लोगों ने इससे जुड़े दस्तावेज भी सीबीआई तक पहुंचाने की तैयारी कर रखी है। वहीं, पिछले कुछ वर्षों में हुईं पीसीएस की कॉपियों को नष्ट किए जाने से संबंधित मामले भी सीबीआई तक पहुंच सकते हैं।
प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के मीडिया प्रभारी अवनीश पांडेय का कहना है कि बुधवार को आईपीएस राजीव रंजन के नेतृत्व में सीबीआई की टीम सर्किट हाउस पहुंच रही है। इस दौरान प्रतियोगी वहां पहुंचकर साक्ष्य प्रस्तुत कर सकते हैं।
सीधी भर्तियों में भी गड़बड़ी की हो सकती है शिकायत
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की ओर से पिछले पांच वर्षों में हुईं भर्तियों की जांच के लिए सीबीआई की टीम बुधवार सुबह इलाहाबाद पहुंच रही है। इस दौरान टीम के सदस्य सर्किट हाउस में प्रतियोगियों से मुलाकात कर सकते हैं और इस दौरान प्रतियोगी भर्तियों में हुई धांधली से जुड़े साक्ष्य सीबीआई को सौंप सकते हैं।
हालांकि मुख्य शिकायत पीसीएस परीक्षा को लेकर है लेकिन सीधी भर्तियों में भी धांधली की शिकायतें कम नहीं हैं। इसके अलावा आरओ-एआरओ प्रारंभिक परीक्षा-2016 की जांच पहले से ही सीबीसीआईडी कर रही है। ऐसे में अन्य भर्तियों से संबंधित मामले भी सीबीआई तक पहुंचाए जा सकते हैं। सीबीआई के आने से पहले कुछ पुराने मामलों को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।
इनमें आयोग की ओर से 1985 में आयोजित पीसीएस परीक्षा में पुलिस उपाधीक्षक और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (महिला) के पदों पर हुई भर्ती में धांधली के मामले शामिल हैं। पूर्व में इन भर्तियों को लेकर भी सीबीआई जांच की मांग की गई थी। उस वक्त शासन की ओर से सीबीआई जांच के लिए पत्र भेजा गया था।
इसके अलावा काफी पहले आयोग में आगजनी की कुछ घटनाएं भी हुईं थी और उस वक्त कई महत्वपूर्ण दस्तावेज नष्ट हो गए थे। कुछ लोगों ने इससे जुड़े दस्तावेज भी सीबीआई तक पहुंचाने की तैयारी कर रखी है। वहीं, पिछले कुछ वर्षों में हुईं पीसीएस की कॉपियों को नष्ट किए जाने से संबंधित मामले भी सीबीआई तक पहुंच सकते हैं।
प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के मीडिया प्रभारी अवनीश पांडेय का कहना है कि बुधवार को आईपीएस राजीव रंजन के नेतृत्व में सीबीआई की टीम सर्किट हाउस पहुंच रही है। इस दौरान प्रतियोगी वहां पहुंचकर साक्ष्य प्रस्तुत कर सकते हैं।