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कोरोना वायरस की वैक्सीन तैयार करने में जुटी हैं सात भारतीय दवा कंपनियां

Mon, 20 Jul 2020 03:37 AM IST
अवधेश कुमार अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: अवधेश कुमार Updated Mon, 20 Jul 2020 03:37 AM IST
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Seven Indian pharmaceutical companies are busy preparing the corona virus vaccine
कोरोना वैक्सीन - फोटो : social media
दुनियाभर में फैली जानलेवा कोरोना वायरस महामारी के प्रसार को रोकने के लिए वैक्सीन तैयार करने में सात भारतीय दवा कंपनियां भी जीजान से जुटी हैं। विश्व में अब तक 1.4 करोड़ लोग इस वायरस से संक्रमित हो चुके हैं और करीब 6 लाख से अधिक लोगों की जान जा चुकी है।  
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देश में भारत बायोटेक, सीरम इंस्टीट्यूट, जायडस कैडिला, पैनेशिया बायोटेक, इंडियन इम्यूनोलॉजिकल्स, मायनवैक्स और बायोलॉजिकल ई कंपनियां कोविड-19 की वैक्सीन तैयार करने में लगी हैं। आमतौर पर वैक्सीन तैयार करने के लिए परीक्षण और उसके बाद उत्पादन में कई साल लग जाते हैं लेकिन कोरोना महामारी के चलते वैज्ञानिक कुछ ही महीनों में इसकी कोई वैक्सीन तैयार होने की उम्मीद जता रहे हैं।
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भारत बायोटेक को वैक्सीन ‘कैंडिडेट’ कोवैक्सीन के पहले और दूसरे चरण के क्लिनिकल परीक्षण की अनुमति मिली है। इसका विनिर्माण कंपनी के हैदराबाद स्थित फैक्टरी में किया जाएगा। कंपनी ने पिछले हफ्ते ही इंसानों पर परीक्षण शुरू किया है। भारतीय औषधि नियामक से कंपनी को सार्स-कोव-2 वैक्सीन के पहले और दूसरे चरण क्लिनिकल परीक्षण की मंजूरी मिली है। कंपनी ने यह टीका भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (एनआईवी) के सहयोग से विकसित किया है। 
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साल के अंत तक वैक्सीन तैयार करने की सीरम को उम्मीद

एक अन्य कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया को उम्मीद है कि वह इस साल के अंत तक कोविड-19 की वैक्सीन तैयार कर लेगी। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अदर पूनावाला ने कहा कि फिलहाल हम एस्ट्रजेनेका ऑक्सफोर्ड वैक्सीन पर काम कर रहे हैं। इसके तीसरे चरण का क्लिनिकल परीक्षण चल रहा है। हम अगस्त में देश में मानव परीक्षण शुरू करेंगे। अभी तक क्लिनिकल परीक्षण को लेकर जो जानकारी उपलब्ध है, उसके आधार पर हमें उम्मीद है कि एस्ट्राजेनेका ऑक्सफोर्ड वैक्सीन इस साल के अंत तक उपलब्ध होगी।

कैडिला सात माह में पूरा कर सकती है क्लिनिकल परीक्षण

दवा कंपनी जायडस कैडिला ने कहा कि वह कोविड-19 के वैक्सीन ‘कैंडिडेट’ जाइकोव-डी का क्लिनिकल परीक्षण सात माह में पूरा करने की उम्मीद कर रही है। कंपनी के चेयरमैन पंकज आर पटेल ने कहा कि अध्ययन के नतीजों के बाद यदि डाटा उत्साहवर्धक रहा और परीक्षण के दौरान वैक्सीन प्रभावी साबित होती है तो परीक्षण पूरा करने और वैक्सीन लाने में सात माह लगेंगे। 

अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया की कंपनियों से किया करार

पैनेशिया बायोटेक ने जून में कहा था कि वह कोविड-19 की वैक्सीन तैयार करने के लिए अमेरिका की रेफैना के साथ मिलकर आयरलैंड में संयुक्त उद्यम लगा रही है। राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) की अनुषंगी इंडियन इम्यूनोलॉजिकल्स ने कोरोना वायरस का टीका विकसित करने के लिए ऑस्ट्रेलिया के ग्रिफिथ विश्वविद्यालय के साथ करार किया है। इसके अलावा मायनवैक्स और बायोलॉजिकल ई भी कोविड-19 का टीका तैयार करने के लिए काम कर 
रही हैं।

संक्रमण फैलाने में वयस्कों से पीछे नहीं बड़े बच्चे

कोरोना महामारी के चलते दुनिया के अधिकतर देशों में स्कूल और कालेज बंद हैं। बच्चे कई महीने से स्कूल नहीं गए हैं। संक्रमण के डर से वे घरों में ‘कैद’ हैं। हालांकि, अब बहस इस बात पर हो रही है कि बच्चों से संक्रमण किस हद तक और कितना फैल सकता है। दक्षिण कोरिया में किए गए बड़े नए अध्ययन से पता चला है कि 10 से 19 साल के बच्चे संक्रमण फैलाने में वयस्कों से पीछे नहीं हैं। एक बड़ा बच्चा भी वयस्क जितना संक्रमण फैला सकता है। जबकि 10 साल से छोटा बच्चा किसी वयस्क की तुलना में कम लोगों को ही संक्रमित कर सकता है।

स्कूल खुलने पर संक्रमण फैलने का खतरा अधिक

कई विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इस महामारी में अगर स्कूल खुलते हैं तो बच्चों से संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ सकता है। मिनेसोटा यूनिवर्सिटी में संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. माइकल ओस्टरहोम ने कहा, मैं इस बात से डर जाता हूं जब लोग यह कहते हैं कि बच्चे कम संक्रमित होते हैं और उनसे कोरोना कम फैलता है। हार्वर्ड ग्लोबल हेल्थ इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ. आशीष झा ने कहा, यूरोप और एशिया में हुए कई शोध बताते हैं कि वयस्कों की तुलना बच्चों के संक्रमित होने की संभावना कम होती है। बच्चों से संक्रमण फैलने का खतरा भी कम होता है, लेकिन ये सारे शोध छोटे स्तर पर किए गए थे। सच्चाई यह कि बड़े बच्चे भी वयस्क जितना ही संक्रमण फैला सकते हैं।

शोध में 5706 संक्रमित लोगों से जुटाया गया डेटा

डॉ. झा के मुताबिक, नया शोध बड़े पैमाने पर और सावधानी पूर्वक किया गया है। इसे अब तक का सर्वश्रेष्ठ शोध भी कहा जा सकता है। कोरोना एक फैलने वाली बीमारी है। किसी के संपर्क में आने से दूसरा व्यक्ति भी संक्रमित हो सकता है। दक्षिण कोरिया में किए गए इस शोध से पता चला है कि एक बड़ा बच्चा भी वयस्क जितना संक्रमण फैला सकता है। दक्षिण कोरियाई शोधकर्ताओं ने 20 जनवरी और 27 मार्च के बीच अपने घरों में संक्रमित होने वाले पहले 5706 लोगों की पहचान की। तब सभी स्कूल बंद थे। इसके बाद हर मरीज के घर के सभी लोगों की जांच की गई, जिससे पता चला कि वे बाहर किसी के संपर्क में आने से संक्रमित हुए। 

10 साल से कम उम्र का बच्चा छोड़ता है कम सांस 

हार्वर्ड टीएच चान स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के बिल हैनेज ने बताया कि 10 साल से कम उम्र का बच्चा किसी वयस्क की तुलना आधा ही संक्रमण फैला सकता है। ये इसलिए क्योंकि बच्चा आमतौर पर किसी वयस्क के मुकाबले कम सांस छोड़ता है। इससे हवा में कम वायरस फैलता है। कम उम्र के बच्चों की लंबाई भी वयस्कों की तुलना में कम होती है और वे जो सांस छोड़ते हैं उससे संक्रमण की संभावना कम होती है। शोध में शामिल कई विशेषज्ञ फिलहाल स्कूल खोलने के पक्ष में नहीं हैं। 
 
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