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संसद की दस बैठकों में दिखेंगे पक्ष-विपक्ष के सात रंग

Mon, 30 Jul 2018 11:43 AM IST
शशिधर पाठक, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, नई दिल्ली Updated Mon, 30 Jul 2018 11:43 AM IST
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Seven colors of the government and opposition will seen in ten meetings of Parliament

संसदीय कार्यमंत्री अनंत कुमार के कौशल के सहारे सत्ता पक्ष संसद के दोनों सदनों में विपक्ष की धार कुंद करने के लिए तैयार है। वहीं, विपक्ष के पास संसद में सरकार को घेरने के लिए दस दिन (कार्य दिवस) बचे हैं। संसद का मानसून सत्र दस अगस्त तक के लिए ही प्रस्तावित है। विपक्ष के नेताओं का मानना है कि अविश्वास प्रस्ताव के सहारे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी सरकार को घेरने में सफल रहे हैं। वहीं, अब बारी केन्द्र सरकार की है। कई मुद्दे और चुनौतियां है। समझा जा रहा है कि प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में सत्ता पक्ष के रणनीतिकार विपक्षी दावे की हवा निकाल सकते हैं।

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राज्यसभा में उपसभापति का चुनाव

विपक्ष राज्यसभा में उपसभापति का चुनाव चाहता है। समझा जा रहा है कि सोमवार को राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद इसपर कोई पहल कर सकते हैं। हालांकि सदन के उपनेता आनंद शर्मा को मानसून सत्र में इस चुनाव के होने की संभावना कम नजर आ रही है। संसदीय कार्य राज्यमंत्री विजय गोयल इस सवाल का कोई सटीक उत्तर नहीं दे रहे हैं। राज्यसभा में वैसे भी सत्ता पक्ष के पास बहुमत नहीं है, लेकिन वह अपने उम्मीदवार को उपसभापति के रूप में देखना चाहता है। यह सत्ता पक्ष के लिए विपक्षी एकता में सेंध लगाने के अवसर की तरह है, लेकिन सूत्र बताते हैं सरकार सावधानी से चलना चाह रही है।
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महिला आरक्षण

कांग्रेस की सांसद और महिला कांग्रेस की सुष्मिता देव ने महिला आरक्षण के लिए कमर कस रखी है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का सुष्मिता देव के इस प्रयास को समर्थन है। यूपीए चेयरपर्सन भी सुष्मिता देव की पहल से खुश हैं। कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री को पत्र लिख दिया है। विपक्ष इसे सत्ता पक्ष के तीन तलाक के बिल का ठोस जवाब मान रहा है। विपक्ष का कहना है कि वह सरकार को तीन तलाक पर भी साथ देने को तैयार है। बशर्ते सरकार पीड़ित महिलाओं को मुआवजा देना स्वीकार कर ले। फिलहाल विपक्ष महिला आरक्षण को लेकर सात अगस्त को सड़क से संसद तक आंदोलन और मुद्दे पर मांग तेज करने के लिए कमर कस रहा है।
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केन्द्र सरकार के पास अभी महिला आरक्षण के मुद्दे पर टाल-मटोल की स्थिति है। मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर इसे यूपीए सरकार के दौर से जोड़ देते हैं। उनका कहना है कि यूपीए सरकार के समय में भाजपा इसे समर्थन दे रही थी, लेकिन तब तत्कालीन सरकार के सहयोगियों ने इसका विरोध कर दिया था। यह न होता तो महिला आरक्षण विधेयक को काफी पहले मंजूरी मिल जाती।

अनुसूचित जाति, जनजाति

अनुसूचित जाति, जनजाति के संगठन, राजनीतिक दल बड़े आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं। जन सम्मान पार्टी मध्य प्रदेश के रीवा क्षेत्र में बड़ा जनाधार खड़ा कर रही है। मध्य प्रदेश में भी विधानसभा चुनाव होना है। इसके नेता अशोक भारती का कहना है कि देश भर के दलित केन्द्र सरकार के रवैये से नाराज हैं। अशोक भारती का कहना है कि नौ अगस्त को हम राष्ट्रव्यापी आंदोलन कर रहे हैं। सरकार के सहयोगी दल लोजपा और रालोसपा ने पहले ही केन्द्र सरकार पर दलित उत्पीड़न को लेकर अध्यादेश लाने का दबाव बना रखा है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी समेत विपक्ष के कई दलों को अनुसूचित जाति, जनजाति की मांग का समर्थन हासिल है। कांग्रेस अध्यक्ष ने इसके बाबत प्रधानमंत्री को खुला पत्र लिखा है। नौ अगस्त को इस मुद्दे पर सड़क से संसद तक मुद्दा उठाने, मांग करने, बंद का आह्वान करने की तैयारी है।

केन्द्र सरकार विपक्ष को इसका श्रेय न लेने देने की तैयारी कर रही है। सूत्र बताते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद इसकी मॉनिटरिंग कर रहे हैं। संसद में सरकार के पक्ष को लेकर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से भी मंत्रणा हुई है। मंगलवार को पार्टी के संसदीय बोर्ड की बैठक में सत्ता पक्ष की नई रणनीति का संकेत मिल सकता है।    
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