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Mid Day Meal: पश्चिम बंगाल में 100 करोड़ के खाने की हुई गलत रिपोर्टिंग, शिक्षा मंत्रालय के पैनल ने किया दावा

Tue, 11 Apr 2023 11:30 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Tue, 11 Apr 2023 11:30 PM IST
सार

शिक्षा मंत्रालय (एमओई) को पश्चिम बंगाल में मिड डे मील योजना में अनियमितताओं की शिकायतें मिली थीं। इसके बाद पश्चिम बंगाल में केंद्र प्रायोजित योजना पीएम पोषण के कार्यान्वयन की समीक्षा के लिए जनवरी में 'संयुक्त समीक्षा मिशन' (जेआरएम) का गठन किया था।

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Serving of 16 cr mid day meals worth over Rs 100 crore over-reported by West Bengal govt, finds MoE panel
मिड डे मील। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

पश्चिम बंगाल में मध्यान्ह भोजन योजना में बड़ी हेराफेरी का मामला सामने आया है। शिक्षा मंत्रालय (एमओई) द्वारा गठित किए गए एक पैनल की रिपोर्ट में इस हेराफेरी का खुलासा हुआ है। पैनल ने अपनी जांच में पाया है कि पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा 100 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के 16 करोड़ मिड डे मील अधिक बांटे जाने की रिपोर्ट दी गई है। यह आंकड़ा बीते साल अप्रैल से सितंबर माह के बीच का है। जांच में सामने आया है कि 16 करोड़ मिड डे मील बांटा ही नहीं गया और उसकी रिपोर्टिंग कर दी गई। 

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दरअसल, शिक्षा मंत्रालय (एमओई) को पश्चिम बंगाल में मिड डे मील योजना में अनियमितताओं की शिकायतें मिली थीं। इसके बाद पश्चिम बंगाल में केंद्र प्रायोजित योजना पीएम पोषण के कार्यान्वयन की समीक्षा के लिए जनवरी में 'संयुक्त समीक्षा मिशन' (जेआरएम) का गठन किया था। मंत्रालय के इस पैनल ने कई स्तरों पर परोसे जाने वाले भोजन की संख्या के संबंध में प्रस्तुत जानकारी में बड़ी विसंगतियों का खुलासा किया है।  
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 पैनल ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि राज्य सरकार द्वारा भारत सरकार को दी गई पहली और दूसरी तिमाही प्रगति रिपोर्ट (क्यूपीआर) में बताया गया है कि अप्रैल से सितंबर, 2022 के दौरान पीएम पोषण योजना के तहत लगभग 140.25 करोड़ भोजन परोसा गया था। जबकि प्रस्तुत क्यूपीआर के अनुसार राज्य को जिलों में परोसे जाने वाले भोजन की संख्या लगभग 124.22 करोड़ थी। इस प्रकार 16 करोड़ से ज्यादा भोजन की अधिक रिपोर्टिंग की गई है। इस भोजन की लागत 100 करोड़ रुपये बैठती है। 
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इसके अलावा, इस पैनल ने अग्नि पीड़ितों को मुआवजे का भुगतान करने, खाद्यान्नों के गलत आवंटन, चावल-दाल और सब्जी की मात्रा में भी 70 फीसद कम खरीद की गई। साथ ही नमक-मिर्च इत्यादि के एक्सपायर हो चुके प्रोडक्ट भी इस्तेमाल में लाए जाने का आरोप है। 


जानकारी के मुताबिक, इस टीम में पीएम पोषण योजना के निदेशक वी भास्कर के अलावा केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के अधिकारी, एक पोषण विशेषज्ञ, यूनिसेफ का एक प्रतिनिधि शामिल हैं। टीम ने राज्य शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ एक बैठक की। यह टीम 6 फरवरी तक अपनी समीक्षा करेगी। इस दौरान वे उत्तर 24 परगना जिले के स्कूलों का दौरा भी करेगी। उल्लेखनीय है कि पिछले काफी समय से बंगाल में मिड-डे मील योजना के तहत परोसे जाने वाले भोजन में कई तरह की गड़बड़ियों की शिकायतें केंद्र को मिल रही थीं।

 

 

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