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कानूनी कार्रवाई से सुरक्षा: फाइजर-मॉडर्ना के बाद अब सीरम ने की मांग, कहा- सबके लिए हो एक नियम, जानें पूरा मामला
Thu, 03 Jun 2021 12:26 PM IST
Tanuja Yadav
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुणे
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुणे
Published by: Tanuja Yadav
Updated Thu, 03 Jun 2021 12:26 PM IST
सार
सीरम इंस्टीट्यूट ने भारत सरकार से फाइजर और मॉडर्ना की तर्ज पर अपने टीके के नुकसान के दावे पर कानूनी कार्रवाई से सुरक्षा की मांग की है। सीरम कंपनी का कहना है कि अगर विदेशी कंपनियों को यह सुविधा मिल सकती है तो घरेलू कंपनियों को भी मिलनी चाहिए।
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अदार पूनावाला
- फोटो : Facebook/Bennett University
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विस्तार
वैक्सीन आपूर्ति को लेकर केंद्र सरकार के आगे अब और भी कई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। फाइजर, मॉर्डना के बाद सीरम, भारत बायोटेक, डॉ. रेड्डी जैसी घरेलू कंपनियों ने भी मुआवजा नहीं देने की मांग रखना शुरू कर दिया है जिसे लेकर राष्ट्रीय टास्क फोर्स भी अब असमंजस की स्थिति में है।
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भारत में कोविड वैक्सीन कोविशील्ड की निर्माता कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने सरकार से कानूनी कार्रवाई से सुरक्षा की मांग की है। सीरम ने ऐसे समय में यह मांग की है जब मॉडर्ना और फाइजर ने इस शर्त के स्वीकार होने के बाद ही भारत में वैक्सीन आपूर्ति की बात कही है। सरकार की ओर से इस आशय की शर्त स्वीकारने के बाद वैक्सीन निर्माता कंपनी को गंभीर दुष्प्रभाव की स्थिति में कानूनी कार्रवाई के खिलाफ सुरक्षा कवच मिल जाएगा। हालांकि अभी तक हुए टीकाकरण में ऐसा कोई मामला सामने भी नहीं आया है लेकिन देश में वैक्सीन की कमी को पूरा करने के लिए सरकार काफी हद तक फाइजर और मॉडर्ना कंपनी की शर्त मानने को तैयार है जिसकी आधिकारिक घोषणा का अभी इंतजार है।
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सीरम इंस्टीट्यूट ने कानूनी कार्रवाई से छूट की मांग करते हुए कहा है कि अगर मॉडर्ना और फाइजर को कानूनी कार्रवाई से छूट मिलती है तो उसे भी यह छूट हासिल करने का अधिकार है। सूत्रों का कहना है कि संभवत: सीरम इंस्टीट्यूट को यह अंदाजा है कि सरकार की ओर से मॉडर्ना और फाइजर को इस आशय की छूट दी जाएगी। इसलिए सीरम इंस्टीट्यूट ने इस आशय की मांग की है। चर्चा यहां तक है कि सीरम की तरह भारत बायोटेक, स्पूतनिक वी बनाने वाली डॉ. रेड्डी फॉर्मा कंपनियां भी ऐसी शर्त रख सकती हैं जो भविष्य में दूसरी कंपनियों के लिए भी वैकल्पिक हो सकता है।
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युवाओं को टीके से पहले बढ़ानी थी उत्पादन क्षमता
टीकाकरण को लेकर गठित राष्ट्रीय तकनीकी सलाह समूह के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि यह सब वैक्सीन की कमी को लेकर कंपनियों का दबाव है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार युवाओं को वैक्सीन देने से पहले उत्पादन क्षमता को बढ़ाने पर जोर देती तो शायद आज यह स्थिति नहीं देखने को मिलती। पिछले वर्ष दिसंबर और इस साल जनवरी में कई बार सीरम, जायडस, भारत बायोटेक, बॉयोलॉजिकल ई, जेनोवा कंपनियों के साथ बैठकें भी हुई थीं लेकिन सभी कंपनियों ने अपने अपने आंकड़े पेश करते हुए पर्याप्त वैक्सीन बनाने का दावा किया था। जब मांग बढ़ने लगी तो इनकी क्षमता का भी पता चल गया।
फाइजर को लेकर उन्होंने कहा कि यूके, अमेरिका सहित कई देशों ने उनकी शर्त को मान लिया है। इसीलिए वह भारत के साथ भी यह समझौता करना चाहते हैं। जबकि भारत और बाकी देशों में आबादी सहित कई प्रकार से अंतर है।
जल्द हो सकता है फैसला
स्वास्थ्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि अभी इस मामले में कुछ भी कहना जल्दबाजी होगा। हम इस मुद्दे पर विचार कर रहे हैं। अभी तक किसी भी कंपनी की शर्त मानने का फैसला नहीं लिया है। यह काफी मुश्किल समय है और जल्दबाजी में हम कोई फैसला लेना चाहते भी नहीं है। वहीं आईसीएमआर के पूर्व महानिदेशक डॉ. निर्मल कुमार गांगुली का कहना है कि भारत में इससे पहले कभी वैक्सीन निर्माता कंपनियों को ऐसी अनुमति नहीं दी गई है।
कोविशील्ड बढ़ा नहीं, स्पूतनिक भी बनाना है सीरम को
ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (सीडीएससीओ) के सूत्रों से पता चला है कि सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने स्पूतनिक वी का उत्पादन करने की अनुमति मांगी है। हालांकि इस आवेदन पर अभी विचार नहीं हुआ है लेकिन विभागीय अधिकारियों का मानना है कि कोविशील्ड का उत्पादन मांग के अनुरूप हो नहीं रहा, ऐसे में सीरम अब स्पूतनिक के लिए प्रयास करने लगी है। संभावना व्यक्त की जा रही है कि सरकार सीरम के इस आवेदन को खारिज कर सकती है।