{"_id":"651ee12167611f41670955e3","slug":"september-2023-warmest-september-on-record-new-data-confirms-2023-10-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"Warmest September On Record: क्या 2023 होगा सबसे गर्म साल? सबसे ज्यादा तापमान बीते सितंबर में रिकॉर्ड किया गया","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Warmest September On Record: क्या 2023 होगा सबसे गर्म साल? सबसे ज्यादा तापमान बीते सितंबर में रिकॉर्ड किया गया
Thu, 05 Oct 2023 09:45 PM IST
शिव शरण शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Thu, 05 Oct 2023 09:45 PM IST
विज्ञापन
गर्मी से बचने की कोशिश करती युवतियां।
- फोटो : अमर उजाला।
जलवायु परिवर्तन के कारण दुनिया के बढ़ते तापमान से हर कोई परेशान है। इसके चलते मौसम में आमूल-चूल परिवर्तन हो रहा है। वहीं, प्राकृतिक आपदाओं में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है। इस बीच, यूरोपीय संघ की 'कॉपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस' (C3S) ने चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए हैं। इनमें कहा गया है कि इस साल का सितंबर अब तक का सबसे गर्म सितंबर रहा है। इसमें यह भी कहा गया है कि साल के पहले नौ महीनों में पूरी दुनिया का तापमान औसत से 0.52 डिग्री सेल्सियस ज्यादा था। रिपोर्ट यह भी बताती है कि 2023 अब तक का सबसे गर्म साल बनने जा रहा है।
विज्ञापन
बीते माह में औसत तापमान 16.38 डिग्री सेल्सियस
यूरोपीय संघ द्वारा वित्त पोषित कॉपरनिकस क्लाइमेट चेंज द्वारा पेश किए गए आंकड़ों में बताया गया है कि सितंबर 2023 अब तक का सबसे गर्म सितंबर दर्ज किया गया है। बीते माह में औसत तापमान 16.38 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यह 1991-2020 के महीने के औसत से 0.93 डिग्री अधिक था। इसमें यह भी बताया गया है कि अभी तक साल 2020 के सितंबर को सबसे गर्म सितंबर के रूप में दर्ज किया गया था। लेकिन, 2023 के सितंबर का तापमान इससे भी 0.5 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहा।
विज्ञापन
2023 सबसे गर्म साल बनने जा रहा
कॉपरनिकस क्लाइमेट चेंज ने यह भी दावा किया है कि बीते कुछ महीनों के तापमान को देखें को साल 2023 अब तक का सबसे गर्म साल बन सकता है। दावा किया है कि साल 2016 अब तक का सबसे गर्म साल रहा है, लेकिन इस साल के शुरुआत के नौ महीनों का तापमान 2016 के शुरुआत के नौ महीने के तापमान से भी 0.05 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया है।
विज्ञापन
कॉपरनिकस क्लाइमेट चेंज की डिप्टी डायरेक्टर समांथा बर्जेस ने इस स्थिति पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि यह वह समय है जबकि महत्वाकांक्षी जलवायु योजना जल्दी से जल्दी बनाई जानी चाहिए।
वहीं, अमेरिका के एक संगठन बर्कले अर्थ के शोधकर्ताओं ने कहा कि गर्मी की लंबी अवधि एक साथ काम करने वाले कई मानव निर्मित और प्राकृतिक कारकों से मिलकर बनी है। उन्होंने कहा कि मानव निर्मित ग्लोबल वार्मिंग पृथ्वी के तापमान को प्रति दशक लगभग 0.19 डिग्री सेल्सियस बढ़ा रही है। यह वायुमंडल में अतिरिक्त ग्रीनहाउस गैसों, विशेषकर कार्बन डाइऑक्साइड के संचय का प्रत्यक्ष परिणाम है।