संवेदनशील वाइपर द्वीप पर विदेशी सैलानियों के प्रवेश पर लगी रोक हटी
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दूसरे विश्वयुद्ध की अनकही कहानियां और नेताजी सुभाषचंद्र बोस और जापान की शौर्यगाथा सैलानी भी देख सकेंगे। क्योंकि पर्यटन मंत्रालय और राज्य सरकार के प्रयास के बाद गृह मंत्रालय ने वाइपर द्वीप पर विदेशी पर्यटकों के जाने पर लगी रोक को हटाने का फरमान जारी कर दिया है।
वाइपर द्वीप अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के दक्षिणी अंडमान जिले का भाग है। पोर्ट ब्लेयर से यह महज चार किलोमीटर की दूरी पर पश्चिम में स्थित है। पूरा अंडमान और निकोबार के 300 द्वीपों की श्रृंखला हैं। इसमें से लगभग 24 पूरी तरह से आबाद हैं। वाइपर द्वीप सामरिक दृष्टि से खासा महत्वपूर्ण है। इसलिए यहां पर विदेशियों के आवागमन पर प्रतिबंध आयद था।
लेकिन अब कुछ शर्तों के साथ सैलानी आजाद हिंद फौज के सहयोग से वाइपर आइलैंड पर जापानियों के शौर्यगाथा कहते बंकरों के अवशेषों की मदद से इसके सुनहरी इतिहास को जान सकेंगे। 16 जून से केंद्रीय गृह मंत्रालय से जवाब का इंतजार कर रहे पर्यटन विभाग को आखिरकार गृह मंत्रालय से इसकी संस्तुति कर दी है।
इसके लिए विदेशी पर्यटक लम्बे समय से इंतजार कर रहे थे। लेकिन भारत सरकार ने इस पर रोक आयद कर रखी थी। पर अब अंडमान निकोबार द्वीप समूह के वाइपर द्वीप को कुछ शर्तों के साथ विदेशी पयर्टक यहां भी घूम सकेंगे।
वाइपर द्वीप में विदेशी सैलानी केवल दिन में ही घूम सकेंगे
केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने इसके लिए जारी सर्कुलर में बताया है कि वाइपर द्वीप पर विदेशियों के लिए अनाधिकार प्रवेश वर्जित आर्डर को वापस ले लिया गया है। अंडमान निकोबार द्वीपसमूह के मुख्य सचिव को लिखे पत्र में गृह मंत्रालय ने इस बात की ताकीद की है। विदेशी सैलानी केवल तय मानकों के अनुसार ही केवल दिन के समय ही यहां घूम सकेंगे।
अब तक लगी रोक की बड़ी वजह थी की इसकी सामुद्रिक सीमाएं हमारे लिए सामरिक महत्व के हिसाब से खासी संवेदनशील थी। इसलिए यहां विदेशी सैलानियों की निर्बाध आवाजाही सुरक्षा केलिहाज से बड़ी समस्या थी। इसके चलते यहां विदेशी सैलानियों के प्रवेश के लिए प्रतिबंधित लगा हुआ था।
अंडमान निकोबार प्रशासन के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि सुरक्षा के लिहाज से यह द्वीप काफी संवेदनशील है। इस द्वीप से विदेशी सामुद्रिक सीमाएं जिनमें मलेशिया, थाइलैंड, बर्मा और इंडोनेशिया आदि देशों की सीमाएं हैं यहां से काफी पास है।
इसलिए यहां आवाजाही को खोलने से पहले पूरे इलाके की सुरक्षा को बढ़ाया गया। इसके लिए हाल के वर्षों में इस द्वीप के आसपास की सुरक्षा काफी बढ़ाई गई है। पूरे इलाके को तकनीकों की मदद से हाईटेक सुरक्षा घेरे में लिया गया है।
इसके अलावा सैन्य और सामरिक दृष्टि से काफी संवेदनशील माने जाने वाले इलाके की सीमाओं में कई तरह के ऐसे उपकरण लगाए गए हैं ,जिससे कैसी भी अनाधिकृत गतिविधि पर नजर रखी जा सकेगी। इसके अलावा अत्याधुनिक तकनीकों की मदद से 24 घंटे सातों दिन इलाके की निगेहबानी की जाएगी। ताकि कोई भी अनाधिकृत व्यक्ति यहां प्रवेश न कर सके।