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सुरक्षा एजेंसियों को मिला सभी कंप्यूटरों की जांच का अधिकार, कांग्रेस और ओवैसी ने उठाए सवाल

Fri, 21 Dec 2018 11:15 AM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Sneha Baluni Updated Fri, 21 Dec 2018 11:15 AM IST
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security agencies got right to investigate computers on which Owaisi raised question
असदुद्दीन ओवैसी

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक आदेश जारी करते हुए सभी सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों को कंप्यूटरों के डाटा जांचने का अधिकार दे दिया है। केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69 के तहत यदि एजेंसियों को किसी भी संस्थान या व्यक्ति पर देशविरोधी गतिविधियों में शामिल होने का शक होता है तो वे उनके कंप्यूटरों में मौजूद सामग्रियों को जांच सकती हैं और उन पर कार्रवाई कर सकती हैं।

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इसमें जांच एजेंसी के पास धारा 69 के तहत संदिग्ध शख्स के कंप्यूटर संसाधन से उत्पन्न, प्रेषित, प्राप्त या संग्रहीत किसी भी जानकारी को रोकने, निगरानी और डीकोड करने का अधिकार होगा। इस मामले पर राजनीति शुरू हो गई है। एआईएमआईएम के मुखिया और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी का कहना है कि आपका 1984 में स्वागत है।
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ओवैसी ने ट्वीट करते हुए कहा, 'मोदी ने सरकार के एक सामान्य आदेश का इस्तेमाल करते हुए राष्ट्रीय जांच एजेंसियों को हमारे संचार की जासूसी करने की इजाजत दे दी। किसे पता था कि जब वह कहते थे घर घर मोदी, तब उनका मतलब यह था। जॉर्ज ऑर्गवेल के बड़े भाई यहां हैं और 1984 में आपका स्वागत है।'
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इस मामले पर पूर्व केंद्रीय वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने कहा, 'मैंने मामला नहीं पढ़ा है लेकिन यदि कोई कंप्यूटरों की निगरानी करेगा तो यह ऑरवेलियन स्थिति (एक ऐसी परिस्थिति जिसे जॉर्ज ऑरवेल ने स्वतंत्र समाजद के लिए विनाशकारक बताया था) होगी।' 

जो 10 एजेंसियां कंप्यूटरों की जांच कर सकती हैं उनके नाम हैं- इंटेलिजेंस ब्यूरो, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, प्रवर्तन निदेशालय, सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज, डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस, सीबीआई, एनआईए, कैबिनेट सचिवालय (रॉ), डायरेक्टोरेट ऑफ सिग्नल इंटेलिजेंस और दिल्ली पुलिस कमिश्नर।

आदेश के संबंध में केंद्र सरकार ने आईबी, रॉ, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, ईडी, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड, राजस्व खुफिया निदेशालय, सीबीआई, दिल्ली पुलिस के आयुक्त, एनआईए और जम्मू-कश्मीर, पूर्वोत्तर तथा असम के सिगनल इंटेलीजेंस निदेशालय को आदेश जारी कर दिया है।

गुरुवार को गृह सचिव राजीव गाबा की तरफ से जारी एक आदेश में कहा गया है कि सूचना एवं तकनीकी नियमों के मुताबिक एजेंसियों को जांचने का अधिकार है। हाल के दिनों में कई ऐसे मामले सामने आए हैं जिनमें दुश्मन देश हनीट्रैप के जरिये सेना के अधिकारियों और संवेदनशील पदों पर बैठे अधिकारियों से खुफिया जानकारी हासिल कर लेते हैं। देश के कई इलाकों से पाकिस्तान को खुफिया जानकारी देते हुए ऐसे कुछ लोग पकड़े भी गए थे।

 

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