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SIR: बंगाल में 72 घंटे में दूसरी मौत, वोटर लिस्ट से नाम कटने के डर से की आत्महत्या; परिवार ने लगाए ये आरोप

Thu, 30 Oct 2025 05:03 PM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Published by: हिमांशु चंदेल Updated Thu, 30 Oct 2025 05:03 PM IST
सार

पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में क्षितिश मजूमदार नामक बुजुर्ग ने मतदाता सूची से नाम कटने के डर में आत्महत्या कर ली। परिवार का कहना है कि 2002 की वोटर लिस्ट में उनका नाम नहीं था, जिससे वह तनाव में थे।

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Second death Bengal in 72 hours suicide due to fear of being struck off voter list family alleges SIR process
ममता बनर्जी - फोटो : ANI

विस्तार

पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण को लेकर तनाव गहराता जा रहा है। इसी बीच बीरभूम जिले के इलांबाजार में एक बुजुर्ग व्यक्ति ने आत्महत्या कर ली। परिवार का कहना है कि वह अपने नाम के मतदाता सूची से हटने की आशंका से डरे हुए थे। यह पिछले 72 घंटों में राज्य में इस तरह की दूसरी आत्महत्या है, जिसने प्रशासन को चिंता में डाल दिया है। इससे पहले वाली आत्महत्या पर भी सीएम ममता ने कहा था कि लोग एसआईआर के कारण आत्महत्या कर रहे हैं।  
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पुलिस के अनुसार मृतक की पहचान क्षितिश मजूमदार के रूप में हुई है, जो पश्चिम मेदिनीपुर जिले के रहने वाले थे। वह बुधवार रात अपनी बेटी के घर इलांबाजार क्षेत्र में फंदे से लटके मिले। पुलिस ने बताया कि शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया है और अस्वाभाविक मौत का मामला दर्ज कर लिया गया है। परिजनों का आरोप है कि वह मतदाता सूची के सत्यापन प्रक्रिया से बेहद चिंतित थे और उन्हें डर था कि अगर उनका नाम सूची से गायब हुआ तो उन्हें विदेशी घोषित कर दिया जाएगा।
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परिवार के आरोप और मानसिक स्थिति
मजूमदार के परिवार के सदस्यों ने बताया कि वह बीते कई दिनों से बेचैन थे क्योंकि 2002 की मतदाता सूची में उनका नाम नहीं था। परिवार ने कहा कि वह अक्सर कहते थे कि अगर मेरा नाम वोटर लिस्ट में नहीं है, तो क्या मुझे बांग्लादेश लौटना पड़ेगा परिवार का कहना है कि हाल में जब मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया शुरू हुई, तो उनका डर और बढ़ गया। इसी तनाव के चलते उन्होंने यह कदम उठाया।
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72 घंटे में दूसरी आत्महत्या
यह मामला पिछले तीन दिनों में पश्चिम बंगाल में दूसरी आत्महत्या का है। इससे पहले पनिहाटी के पास भी एक व्यक्ति ने इसी तरह की चिंता में आत्महत्या कर ली थी। वहीं, कूच बिहार में एक किसान ने आत्महत्या की कोशिश की, जो फिलहाल अस्पताल में भर्ती है। इन घटनाओं ने मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर लोगों के बीच फैली अफवाहों और असमंजस पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्रशासन की जांच जारी
स्थानीय पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और कहा है कि सभी पहलुओं की पड़ताल की जाएगी। हालांकि, अब तक चुनाव आयोग की ओर से इस घटना पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। अधिकारियों का मानना है कि मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया को लेकर गलतफहमियों और जागरूकता की कमी के कारण लोग अनावश्यक भय में हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को इस प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाना चाहिए ताकि नागरिकों में भरोसा कायम रह सके।

बता दें, हाल ही में चुनाव आयोग ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए ये एलान किया था कि 12 राज्य ओर केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इस सूची में बंगाल का भी नाम था। शुरु से ही ममता सरकार इस एसआईआर का विरोध कर रही है। राज्य अबतक दो लोग आत्महत्या कर चुके हैं। कहा जा रहा है कि ये दोनों आत्महत्याएं एसआईआर के खौफ के कारण हुई हैं।

आत्महत्या पर टीएमसी का हंगामा 
पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के पानिहाटी में गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस ने 57 वर्षीय प्रदीप कर की आत्महत्या को लेकर जोरदार विरोध मार्च निकाला। पार्टी ने इस मौत के लिए राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया से पैदा हुए भय और भ्रम को जिम्मेदार ठहराया।

स्थानीय पुलिस के मुताबिक, प्रदीप कर का शव मंगलवार को उनके कमरे में फांसी के फंदे से लटका मिला। वे दस्तावेजों की कमी के कारण मतदाता सूची से बाहर हो जाने के डर से परेशान थे। यह घटना उस दिन के अगले दिन हुई जब चुनाव आयोग ने पूरे बंगाल में मतदाता सूची के एसआईआर अभ्यास की घोषणा की थी।

टीएमसी ने राज्य में भाजपा के खिलाफ किया प्रदर्शन
टीएमसी के चीफ व्हिप और स्थानीय विधायक निर्मल घोष के नेतृत्व में निकाले गए इस विरोध जुलूस में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और स्थानीय लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने “जस्टिस फॉर प्रदीप” के बैनर और तख्तियां लेकर चुनाव आयोग और भाजपा के खिलाफ नारे लगाए। घोष ने कहा कि भाजपा और चुनाव आयोग ने बंगाल में डर और भ्रम का माहौल बना दिया है।


प्रदीप कर की मौत इसी भय का परिणाम है। गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ग्यानेश कुमार के खिलाफ एफआईआर दर्ज होनी चाहिए। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि यह पूरा अभियान ‘बैकडोर एनआरसी’ साबित हो सकता है, जिसका उद्देश्य गरीब और वंचित वर्गों को निशाना बनाना है। वहीं, भाजपा और चुनाव आयोग ने टीएमसी के इन आरोपों पर अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

सरकार हर नागरिक के साथ- ममता
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य में प्रस्तावित एसआईआर को लेकर उत्पन्न तनाव से जुड़ी मौतों और आत्महत्या के प्रयास की निंदा की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, ये घटनाएं भाजपा की डर और नफरत फैलाने वाली राजनीति का नतीजा हैं। भाजपा के दबाव में चुनाव आयोग ने बंगाल में एसआईआर की प्रक्रिया जबरन लागू की है। मैं लोगों से अपील करती हूं कि वे किसी के उकसावे में न आएं और भरोसा बनाए रखें। हमारी सरकार हर नागरिक के साथ है। बंगाल में एनआरसी लागू नहीं होने दिया जाएगा और किसी वैध नागरिक को बाहरी नहीं कहा जाएगा।



 
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