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नोटबंदी के 2 साल पूरे: क्या खोया क्या पाया देश ने

Thu, 08 Nov 2018 02:29 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 08 Nov 2018 02:29 PM IST
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Second anniversary of demonetisation, benefits and loss of country
नोटबंदी के फायदे और नुकसान - फोटो : twitter

आज 8 नवंबर के दिन नोटबंदी को लागू हुए पूरे दो साल हो गए हैं। आज ही के दिन साल 2016 में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी की घोषणा की थी। जिसके बाद पुराने 500 और 1000 रुपये के नोट बंद हो गए थे। इनके स्थान पर 500 और 2 हजार रुपये के नए नोट जारी किए गए थे। लोगों को बैंकों के बाहर लाइन लगाकर नोटों को बदलवाने को कहा गया। भारी संख्या में लोग लाइनों में लगे और नोट बदलवाए। देशभर में अफरातफरी का माहौल रहा।


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आज 8 नवंबर के दिन नोटबंदी को लागू हुए पूरे दो साल हो गए हैं। आज ही के दिन साल 2016 में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी की घोषणा की थी। जिसके बाद पुराने 500 और 1000 रुपये के नोट बंद हो गए थे। इनके स्थान पर 500 और 2 हजार रुपये के नए नोट जारी किए गए थे। लोगों को बैंकों के बाहर लाइन लगाकर नोटों को बदलवाने को कहा गया। भारी संख्या में लोग लाइनों में लगे और नोट बदलवाए। देशभर में अफरातफरी का माहौल रहा।

इस फैसले पर एक तरफ जहां सरकार का कहना है कि इससे काले धन पर रोक लगी और काला धन रखने वालों पर शिकंजा कसा गया। वहीं दूसरी तरफ विपक्षी पार्टियों का कहना है कि इससे देश की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हुआ है। केवल इतनी ही नहीं विपक्षी पार्टियों का तो यहां तक कहना है कि इससे बहुत सी जानें गई हैं। चलिए जानते हैं कि नोटबंदी से देश ने क्या खोया और क्या पाया है-

नोटबंदी से देश ने क्या खोया?

- विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने नोटबंदी के 2 साल पूरे होने पर इसके नुकसान गिनाए हैं। इस मौके पर कांग्रेस ने #नोटबंदी की दूसरी बरसी लिख कई ट्वीट किए हैं। एक ट्वीट में बताया गया है कि नोटबंदी से 35 लाख नौकरियां छिनीं, 1.5 करोड़ श्रम बल का नुकसान हुआ है। जिससे देश की जीडीपी को 1.5 करोड़ का नुकसान हुआ। 8 हजार करोड़ नोटों की छपाई पर खर्च हुए हैं।

ट्वीट में यह भी कहा गया है, 'नोटबंदी से मोदी जी ने, किया ये गड़बड़झाला। सौ से ज्यादा परिवारों में, अंधकार कर डाला।' इसके साथ लगी तस्वीर में लिखा है, प्रधानमंत्री के इस स्टंट से 105 लोगों की जान गई है, और अभी तक जारी...
 




- एक अन्य ट्वीट में कांग्रेस ने कहा है कि नोटबंदी के काले दौर में जहां एक तरफ जनता बैंक के आगे कतारों में दम तोड़ रही थी, वहीं दूसरी तरफ, भाजपा से जुड़े लोग बैंक के पिछले दरवाजे से तिजोरी भर रहे थे। इस ट्वीट के साथ एक फोटो भी लगी है। जिसमें लिखा है, 'नोटबंदी के बाद भाजपा के खजाने में 81 फीसदी वृद्धि हुई है। नोटबंदी के शुरुआती पांच दिनों में गुजरात के भाजपा से संबंधित सहकारी बैंकों में 3,118.51 करोड़ रुपये के प्रतिबंधित नोट जमा हुए हैं।' इसके अलावा फोटो में एक लिखा है, भारत का नुकसान, भाजपा धनवान।

- कांग्रेस ने एक और ट्वीट किया है, जिसमें लिखा है, 'अब जब लगभग सभी पुराने नोट रिजर्व बैंक के पास जमा हो गए हैं, तो आवश्यक है कि मोदी जी इस 'स्व-निर्मित आपदा' के लिए देशवासियों से माफी मांगें।' इस ट्वीट के साथ लगी फोटो में लिखा है, 'नोटबंदी की दूसरी बरसी, नोटबंदी के बाद पुराने नोटों में से 99.3 फीसदी आरबीआई के पास लौटे.. प्रिय प्रधानमंत्री जी, आप मोदी-निर्मित आपदा के लिए कब क्षमा मांग रहे हो?'

- देश के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी नोटबंदी का विरोध कर सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने नोटबंदी के फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। सिंह ने कहा कि 2016 में लिए गए इस फैसले का खामियाजा आज तक देश की जनता भुगत रही है।  

उन्होंने कहा, 'नरेंद्र मोदी सरकार ने 2016 में त्रुटिपूर्ण ढंग से और सही तरीके से विचार किये बिना नोटबंदी का कदम उठाया था। आज उसके दो साल पूरे हो गए। भारतीय अर्थव्यवस्था और समाज के साथ की गई इस तबाही का असर अब सभी के सामने स्पष्ट है।' सिंह ने कहा, 'नोटबंदी से हर व्यक्ति प्रभावित हुआ, चाहे वह किसी भी उम्र का हो, किसी लैंगिक समूह का हो, किसी धर्म का हो, किसी पेशे का हो। हर किसी पर इसका असर पड़ा है।'

उन्होंने कहा कि देश के मझोले और छोटे कारोबार अब भी नोटबंदी की मार से उबर नहीं पाए हैं। सिंह ने मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों पर निशाना साधा और कहा कि अर्थव्यवस्था की 'तबाही' वाले इस कदम का असर अब स्पष्ट हो चुका है तथा इससे देश का हर व्यक्ति प्रभावित हुआ है।

रिपोर्ट में सामने आई ये बात

बेरोजगारी
बेरोजगारी - फोटो : PTI
- आज नोटबंदी को पूरे दो साल हो गए हैं। एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि नोटबंदी के बाद से बेरोजगारी का स्तर बढ़कर अक्तूबर माह में 6.9 फीसदी पर पहुंच गया है। यह आंकड़ा 2 साल के सबसे ऊंचे स्तर पर है। वहीं काम करने के इच्छुक युवकों का आंकड़ा भी 42.4 फीसदी तक गिर गया है। यह 2016 के बाद का सबसे निचला स्तर है। यह अध्ययन सीएमआईई द्वारा किया गया है। सीएमआईई का यह भी कहना है कि काम करने के इच्छुक वयस्कों की संख्या में कमी नोटबंदी के बाद आई है जिसकी स्थिति अभी भी ठीक नहीं है। हालात सितंबर माह में ठीक थे, लेकिन श्रम बाजार के गिरते आंकड़े अक्तूबर में फिर से पहले जैसेे हो गए।

कार्यरत लोगों की संख्या अक्तूबर 2018 में 39.7 करोड़ मापी गई। यह आंकड़ा अक्तूबर 2017 में 40.7 करोड़ था। इसमें करीब 2.4 फीसदी की गिरावट आई है। सीएमआईई के बुलेटिन के अनुसार अक्तूबर में बेरोजगार के स्तर में हुई तेजी से गिरावट श्रम बाजार के लिए बेहद चिंताजनक है। वहीं बेरोजगार लोग जो नौकरी की तलाश में हैं, उनकी संख्या भी 2.95 करोड़ पर पहुंच गई है। यह आंकड़ा अक्तूबर 2018 का है। जो कि बीते साल के मुकाबले दो गुना अधिक हो गया है। अक्तूबर 2017 में ऐसे लोगों की संख्या जो नौकरी की तलाश में थे, 1.4 करोड़ था।

सीएमआईई के इन आंकड़ों पर एचआर सर्विसेज सीआईईएल के सीईओ आदित्य नारायण मिश्रा का कहना है, 'भारतीय अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में अक्तूबर-दिसंबर का समय नौकरी के निर्माण का समय होता है, लेकिन नौकरी की मांग ज्यादा है और नौकरी कम इसलिए इस दौरान यह आंकड़ा इतना चिंताजनक है।' उन्होंने आगे कहा कि हर साल 1.2 करोड़ लोग देश के श्रम बाजार में प्रवेश करते हैं (नौकरी करने के लिए तैयार रहते हैं) लेकिन उनकी संख्या के मुकाबले नौकरी की संख्या बेहद कम होती है।

देश को क्या मिला नोटबंदी से?

नोटबंदी
नोटबंदी - फोटो : PTI
- भारतीय जनता पार्टी ने #करप्ट कांग्रेस फीअर्स डेमो नाम से ट्वीट कर नोटबंदी के फायदे गिनाए हैं। इसमें कहा गया है कि नोटबंदी के बाद फाइल रिटर्न करने वालों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। ट्वीट के साथ लगी तस्वीर में दर्शाया गया है कि साल 2013-14 में 3.7 करोड़ रिटर्न फाइल होती थीं। यह संख्या साल 2017-18 में बढ़कर 6.86 करोड़ पर पहुंच गई है।  

- भाजपा ने ट्वीट में कहा है कि एक करोड़ से ऊपर की कमाई वाले लोगों के कर जमा करने की संख्या भी बढ़ी है। साल 2014-15 में ऐसे लोगों की संख्या 88.6 हजार थी जो साल 2017-18 में बढ़कर 1.4 लाख हो गई है। इसके अलावा ट्वीट में लिखा है कि  कॉरपोरेट करदाता द्वारा औसत कर देने में भी 55 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।

- देश के वित्त मंत्री अरुण जेटली ने ट्वीट कर नोटबंदी के फायदे गिनाए हैं। उनका मानना है कि पीएम मोदी द्वारा उठाया गया यह बहुत बड़ा कदम है। इससे कालेधन और भ्रष्टाचार पर लगाम लगी है।
 
करंसी का चलन बढ़ा

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक 26 अक्तूबर 2018 तक बाजार में मुद्रा का चलन बढ़कर 19.6 लाख करोड़ रुपये हो गया है, जो कि दो साल पहले के मुकाबले 9.5 फीसदी अधिक है। यह आंकड़ा साल 4 नवंबर, 2016 में 17.9 लाख करोड़ रुपये था।

एटीएम से पैसों की निकासी में उछाल

आरबीआई के आंकड़ों में कहा गया है कि नोटबंदी से एटीएम से पैसे की निकासी में भी उछाल आया है। अगस्त 2018 में एटीएम से कैश निकासी का आंकड़ा 2.75 लाख करोड़ रुपये आया। जो अक्तूबर 2016 में 2.54 लाख करोड़ रुपये था। लेकिन एटीएम से कितने पैसे निकाले गए ये आंकड़े दिसंबर में सामने आएंगे।

मोबाइल बैंकिंग में फायदा

मोबाइल बैंकिंग से पैसों के लेनदेन के आंकड़ों में बढ़ोतरी हुई है। आंकड़ों के मुताबिक अगस्त 2018 में मोबाइल बैंकिंग के जरिए 2.06 लाख करोड़ रुपये का ट्रांजेक्शन हुआ जो कि अक्तूबर साल 2016 में 1.13 लाख करोड़ रुपये था। यह पहले से 82 फीसदी अधिक है।  
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