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Muslim Quota: सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम कोटे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी पर लगाई रोक, कहा- कुछ शुचिता रहनी चाहिए

Tue, 09 May 2023 01:05 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नितिन गौतम Updated Tue, 09 May 2023 01:05 PM IST
सार

याचिकाकर्ता की तरफ से पेश हुए वकील दुष्यंत दवे ने कहा कि 'हर दिन गृह मंत्री अमित शाह कर्नाटक में इसे लेकर बयानबाजी कर रहे हैं और कह रहे हैं कि उन्होंने चार प्रतिशत मुस्लिम कोटा हटाया। ऐसे बयान क्यों दिए जा रहे हैं?'

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Scrapping of Muslim quota n karnataka supreme court said no political statements should be issue
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को न्यायालय में विचाराधीन मामले पर राजनीतिक बयानबाजी होने पर नाराजगी जाहिर की है। कोर्ट ने कहा कि शुचिता बनाए रखना जरूरी है। बता दें कि कर्नाटक में राज्य सरकार ने मुस्लिमों के चार प्रतिशत आरक्षण को खत्म कर दिया था और उनकी जगह लिंगायतों और वोक्कालिगा समुदाय को दो-दो प्रतिशत आरक्षण देने का फैसला किया था। सरकार के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। 
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कोर्ट ने बयानबाजी पर जताई नाराजगी
जस्टिस केएम जोसेफ, जस्टिस बीवी नागरत्न और जस्टिस अहसानुद्दीन अमनुलाज ने सुनवाई के दौरान कहा कि 'जब मामला कोर्ट में विचाराधीन है और अदालत ने मुस्लिम कोटे को लेकर आदेश दिया हुआ है तो फिर इस पर कोई राजनीतिक बयानबाजी नहीं होनी चाहिए। यह सही नहीं है। कुछ शुचिता बरकरार रहनी चाहिए।' याचिकाकर्ता की तरफ से पेश हुए वकील दुष्यंत दवे ने कहा कि 'हर दिन गृह मंत्री अमित शाह कर्नाटक में इसे लेकर बयानबाजी कर रहे हैं और कह रहे हैं कि उन्होंने चार प्रतिशत मुस्लिम कोटा हटाया। ऐसे बयान क्यों दिए जा रहे हैं?'
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सॉलिसिटर जनरल ने दी ये दलील
कर्नाटक सरकार की तरफ से कोर्ट में पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दुष्यंत दवे के बयान पर आपत्ति जताई और कहा कि 'उन्हें ऐसे किसी बयान की जानकारी नहीं है और अगर किसी ने ऐसा कहा है कि कोर्ट धर्म के आधार पर नहीं होना चाहिए तो इसमें क्या गलता है? यह एक तथ्य है।' इस पर जस्टिस जोसेफ ने कहा कि सॉलिसिटर जनरल कोर्ट में यह बात कह रहे हैं, इसमें कोई समस्या नहीं है लेकिन अगर कोई मामला कोर्ट में विचाराधीन है तो कोर्ट से बाहर उस पर कुछ भी बोलना सही नहीं है। 
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जुलाई में होगी सुनवाई
पीठ ने कहा कि हम कोर्ट को राजनीतिक मंच नहीं बनने देंगे और हम इसमें पार्टी नहीं हैं। इसके बाद कोर्ट ने अगली सुनवाई तक मामला स्थगित कर दिया। तुषार मेहता और लिंगायत और वोक्कालिगा समुदाय की तरफ से कोर्ट में पेश हुए वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि उन्हें सुनवाई में कुछ राहत दी जाए क्योंकि समलैंगिक विवाह मामले में संविधान पीठ सुनवाई कर रही है और वह दोनों उस मामले में भी दलीलें दे रहे हैं। कोर्ट अब इस मामले पर जुलाई में सुनवाई करेगा। 
 
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