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'ग्वालियर के सिंधिया ने की थी अंग्रेजों की मदद', परीक्षा में पूछा गया सवाल हो रहा वायरल
Wed, 11 Mar 2020 09:41 PM IST
अमित कुमार
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला
Published by: अमित कुमार
Updated Wed, 11 Mar 2020 09:41 PM IST
सार
ज्योतिरादित्य सिंधिया जब से भाजपाई हुए हैं, उन्हें लेकर सोशल मीडिया में कई तरह की चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। यहां तक कि उनके पिता, दादा और उनसे भी पहले की पीढ़ियों का लेखा जोखा निकाला जा रहा है।
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ज्योतिरादित्य सिंधिया
- फोटो : PTI
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विस्तार
ज्योतिरादित्य सिंधिया बुधवार को जब भाजपा में शामिल हो रहे थे, तो उस दौरान सोशल मीडिया पर एक सूची वायरल कर दी गई। इसमें लिखा था कि कांग्रेस पार्टी ने आज तक उन्हें क्या कुछ दिया है।इसके थोड़ी देर बाद मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) की प्रारंभिक परीक्षा में पूछा गया एक सवाल वायरल हो गया। यह परीक्षा 2010 में आयोजित की गई थी।
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इसमें 1857 के स्वतंत्रता संग्राम को लेकर एक सवाल पूछा गया था। सोशल मीडिया में जो सवाल और जवाब वायरल हो रहा है। इसमें लिखा था, '1857 के स्वतंत्रता संग्राम में किस राजवंश ने अंग्रेजों की सर्वाधिक सहायता की थी। नीचे इसका जवाब लिखा था। ग्वालियर के सिंधिया।' एमपीपीएससी 2010 की प्रारंभिक परीक्षा में वह सवाल कुछ इस तरह से पूछा गया था।
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सवाल: 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में किस राजवंश ने अंग्रेजों की सर्वाधिक सहायता की थी?
ग्वालियर के सिंधिया
इंदौर के होल्कर
नागपुर के भोंसले
रामगढ़ के लोधी
उत्तर-ग्वालियर के सिंधिया
विस्तार:
‘1857 के स्वतंत्रता संघर्ष में ग्वालियर के सिंधिया ने अंग्रेजों की सर्वाधिक सहायता की। यूरोपीय इतिहासकारों ने ग्वालियर के मंत्री सर दिनाकर राव और हैदराबाद के मंत्री सालारजंग की राजभक्ति की बहुत सराहना की है।' संकट के समय कैनिंग ने कहा था, 'यदि सिंधिया भी विद्रोह में सम्मिलित हो जाए तो मुझे कल ही बिस्तर गोल करना होगा'। 2010 में वहां पर भाजपा की सरकार थी और शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री थे।
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बता दें कि इससे पहले जनवरी 2020 में मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा में भील समाज को लेकर पूछे गए सवालों पर विवाद खड़ा हो गया था। एमपीपीएससी द्वारा 12 जनवरी को आयोजित प्रारंभिक परीक्षा के द्वितीय प्रश्न पत्र में भील समाज को लेकर एक गद्यांश दिया गया था।
गद्यांश में भील समाज की निर्धनता का हवाला देते हुए पांच सवाल पूछे गए थे। उसमें इस वर्ग को आपराधिक प्रवृत्ति का बताया गया था। एमपीपीएससी के पेपर में आए इस सवाल को लेकर राज्य की सियासत गरमा गई। इसके लिए सीधे तौर पर आयोग को जिम्मेदार ठहराया गया। बाद में एमपीपीएससी ने एक अधिसूचना जारी कर बताया कि भील समाज से जुड़े गद्यांश के आधार पर पूछे गए सभी सवालों को हटा लिया गया है।
भाजपा विधायक ने कड़ी आपत्ति जाहिर की थी...
चूंकि उस गद्यांश में भील जनजाति को आपराधिक और शराबी बताया गया। इसके चलते भाजपा विधायक राम दांगोरे ने उस पर कड़ी आपत्ति जताई थी। दांगोरे का कहना था कि प्रश्नपत्र में पूछे गए सवाल के जरिए हमें निशाने पर लिया जा रहा है।
विधायक का कहना था, 'मैं एक अध्यापक हूं। भील जनजाति से ताल्लुक रखता हूं। हमारी जाति का एक लंबा इतिहास रहा है।हमने स्वतंत्रता संग्राम में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।' देश में भीलों की आबादी करीब 1.6 करोड़ है। इसमें से मध्य प्रदेश में तकरीबन 60 लाख की आबादी निवास करती है।यह देश में प्रभावशाली जनजाति है।