फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   scientific research on underground rocks of india will open the secret of the birth of the Himalayas

भूगर्भ से निकले पत्थरों पर विश्व के वैज्ञानिक करेंगे शोध, खुलेगा हिमालय के जन्म का राज

Thu, 01 Sep 2016 11:13 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला,देहरादून
ब्यूरो/ अमर उजाला,देहरादून Updated Thu, 01 Sep 2016 11:13 PM IST
विज्ञापन
scientific research on underground rocks of india will open the secret of the birth of the Himalayas
- फोटो : अमर उजाला

हिमालय पर्वत मालाओं के शिखरों पर डेढ़ सौ करोड़ से अधिक वर्षों के रहस्य समेटे पत्थरों पर अब देश-दुनिया के विज्ञानियों की नजर पड़ी है। हिमालय उगने के पहले इस क्षेत्र में ज्वालामुखी फटे थे और भूगर्भ ने खूब लावा उगला।

विज्ञापन


करोड़ों साल बाद इन पत्थरों से दुनिया भर के विज्ञानी अब उस समय का राज उगलवाना चाहते हैं। कई देशों के विज्ञानियों ने इन पत्थरों पर शोध करने के लिए अपने प्रोजेक्ट तैयार किए हैं। ये सभी वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान के साथ मिलकर शोध करेंगे।
विज्ञापन

 

माना जाता है कि हिमालय के वजूद में आने के पहले इस क्षेत्र में अचानक भूगर्भीय गतिविधियों ने रफ्तार पकड़ी ली थी। भूगर्भ में टेक्टिानिक प्लेटें आपस में टकराकर कमजोर पड़ी और ज्वालामुखी फट पड़े।
विज्ञापन
विज्ञापन


यहां लावा सैकड़ों साल तक बहा। भूगर्भ में समाए पत्थर और चट्टानें धरातल पर आकर समय के साथ ठंडे पड़े। तभी टेक्टिानिक गतिविधि मंद पड़ी और हिमालय की पैदाइश का वक्त आ गया। धरती की सतह ऊंची होकर पहाड़ की शक्ल अख्तियार करने लगी। इसके साथ ही भूगर्भ से निकले पत्थर भी ऊपर जाने लगे।

वाडिया के विज्ञानियों ने इन पत्थरों की पहचान करके आइसोटोपिक जांच की तो पता चला कि ये पत्थर 150 से 180 करोड़ साल पुराने हैं। उत्तराखंड, हिमाचल और जम्मू कश्मीर में ज्वालामुखी के ये साक्ष्य बिखरे पड़े हैं।

श्रीनगर, भीमताल, मनीकर्ण, रामपुर, लद्दाख आदि क्षेत्रों से इनके सैंपल लिए गए हैं। अभी तक देश के विज्ञानी ही इन पर शोध कर रहे थे, लेकिन 9 अक्टूबर, 2015 को वाडिया के वरिष्ठ विज्ञानी डा. राजेश शर्मा की अगुवाई में विदेशी विज्ञानियों की टीम जब तीन दिवसीय विजिट पर गई तो टेक्टिानिक विकास और बदलाव के साक्ष्य देख वे भौंचक्के रह गए।

विदेशों से इन विज्ञानियों ने दिखाई दिलचस्पी

scientific research on underground rocks of india will open the secret of the birth of the Himalayas

बता दें कि शिवालिक उगने के बाद हिमालय में जबरदस्त जलवायु परिवर्तन भी आया। इसमें वनस्पतियों, वन्य जीवों की कई प्रजातियां पैदा हुईं तो कई का नामो-निशान मिट गया। इसके साक्ष्य भारतीय मानव सर्वेक्षण के पास उपलब्ध हैं।


विदेशों से इन विज्ञानियों ने दिखाई दिलचस्पी
इस प्रोजेक्ट पर काम करने के लिए इटली के लोडोल मोरोसी, स्विटजरलैंड के इगोर विला, अमेरिका के साइमन क्लम्परर, फ्रांस की जूलिया डी सीजर, जापान की हरातुका सकाई समेत कई विदेशी विज्ञानी आएंगे। सभी इन पत्थरों पर शोध करने के लिए प्रोजेक्ट तैयार करने में जुट हुए हैं। इसके अलावा अमेरिकी विज्ञानी साइमन क्लम्परर की गर्म झरनों में दिलचस्पी है। मालूम हो कि हिमालयी क्षेत्र में बड़ी संख्या में गर्म पानी के स्रोत हैं।

अंदाजा लगाने में होगी आसानी
पत्थरों की जांच से हिमालयी क्षेत्र की भूगर्भीय गतिविधियों को समझने में आसानी हो जाएगी। इस समय हिमालय क्षेत्र भूगर्भीय गतिविधियों के बदलाव के दौर से गुजर रहा है। जांच से विज्ञानी आने वाली स्थिति के संबंध में कयास लगा सकेंगे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed