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Heat: स्कूलों में पीक तापमान से पहले हो छुट्टी, हर बच्चे को 2-3 लीटर पानी अनिवार्य; केंद्रीय एजेंसी की सलाह

Wed, 09 Apr 2025 04:54 AM IST
निर्मल कांत परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली।
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Wed, 09 Apr 2025 04:54 AM IST
सार

Heat: एनपीसीसीएचएच ने स्कूलों और बच्चों के लिए हीट स्ट्रोक प्रबंधन को लेकर दिशा निर्देश जारी किए हैं, जिसमें पीक तापमान से पहले छुट्टी करने और बच्चों को नियमित रूप से पानी पीने की सलाह दी गई है।

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Schools should close before peak temperatures, every child must have 2-3 liters of water; NPCCHH advice
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : फ्रीपिक

विस्तार

नई दिल्ली। स्कूलों में पीक तापमान से पहले छुट्टी होनी चाहिए। हालांकि पढ़ाई का समय पूरा करने के लिए सुबह जल्दी क्लास शुरू की जा सकती हैं। मौसम विभाग की चेतावनी के बाद नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन एवं मानव स्वास्थ्य कार्यक्रम (एनपीसीसीएचएच) ने हीट स्ट्रोक प्रबंधन को लेकर दिशा निर्देश जारी किए हैं जिसमें स्कूलों और छोटे बच्चों को लेकर विशेष जोर दिया गया।

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देश भर के सभी स्कूल संचालकों से कहा है कि दोपहर 12 से शाम चार बजे के बीच सबसे अधिक तापमान दर्ज किया जाता है। यह देखा जा रहा है कि लगभग सभी स्कूलों में दोपहर दो बजे के आसपास अवकाश हो रहा है। अगर दिल्ली जैसे शहरों की बात करें तो यहां स्कूल से घर पहुंचने के लिए अतिरिक्त 30 से 60 मिनट चाहिए। इस तरह बच्चों में पीक गर्मी की चपेट में आने का जोखिम बढ़ता है।
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एनपीसीसीएचएच ने इस रिपोर्ट में दिल्ली एम्स, आरएमएल अस्पताल और आर्मी हॉस्पिटल रिसर्च एंड रेफरल (आरआर) के विशेषज्ञों का हवाला भी दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, भीषण गर्मी और लू की चपेट में आने वालों में करीब 48 फीसदी हिस्सेदारी बच्चों की होती है। ऐसे में हीट स्ट्रोक प्रबंधन को लेकर स्कूल, अभिभावक और बच्चों में जागरूकता लाना बहुत जरूरी है। गर्मी लगने पर बच्चे का तापमान कम करना आवश्यक है जिसके लिए उसे नजदीकी अस्पताल में भर्ती करना चाहिए। अधिक समय व्यतीत होने पर बच्चे को कई तरह के स्वास्थ्य जोखिम हो सकते हैं।

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बच्चों के पास नहीं हो प्लास्टिक बोतल
नई दिल्ली स्थित आर्मी हॉस्पिटल रिसर्च एंड रेफरल (आरआर) के डॉ. सुभाष चंद्र शॉ ने कहा है कि गर्मी के मौसम में बच्चों की दिनचर्या पर बहुत ध्यान देना चाहिए। बच्चों के साथ प्लास्टिक बोतल नहीं होनी चाहिए। इसके लिए स्कूलों को भी अपील करनी चाहिए। इसके अलावा हर घंटे कम से कम एक कप पानी का सेवन बच्चों के लिए बहुत जरूरी है।

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