फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Schools became the shield of political attack on Kejriwal in Delhi elections...

दिल्ली चुनाव में केजरीवाल पर हर राजनीतिक हमले की ढाल बन गए शिक्षा के मंदिर...

Tue, 11 Feb 2020 07:04 PM IST
Trainee Trainee जितेंद्र भारद्वाज, डिजिटल ब्यूरो, नई दिल्ली  
जितेंद्र भारद्वाज, डिजिटल ब्यूरो, नई दिल्ली   Published by: Trainee Trainee Updated Tue, 11 Feb 2020 07:04 PM IST
विज्ञापन
Schools became the shield of political attack on Kejriwal in Delhi elections...
अरविंद केजरीवाल

दिल्ली चुनाव में आम आदमी पार्टी को मिली प्रचंड जीत में केजरीवाल सरकार के मोहल्ला क्लीनिक और सरकारी स्कूल, इन दोनों की अहम भूमिका रही है। चुनाव प्रचार के दौरान केजरीवाल पर जितने भी राजनीतिक हमले हुए, शिक्षा और स्वास्थ्य का मुद्दा उनकी ढाल बने रहे।

विज्ञापन


यहां तक कि सीएए और शाहीन बाग को लेकर विपक्षी दलों ने उन्हें आतंकवादी तक कह दिया, लेकिन इसके बावजूद आम आदमी पार्टी अपने कामों को लेकर उनके समक्ष डटी रही।  2015-16 में दिल्ली सरकार ने स्वास्थ्य पर 3300 करोड़ रुपये खर्च किए थे, जबकि 2019-20 में यह बजट 7485 हो गया है।
विज्ञापन


इसी तरह 2015-16 में आप की सरकार ने शिक्षा के लिए 6208 करोड़ रुपए के बजट का प्रावधान किया था, वहीं 2019-20 के लिए यह बजट 15 हजार करोड़ रुपए के पार पहुंच गया है। दुनिया की कई शख्सियत केजरीवाल सरकार के मोहल्ला क्लीनिक और सरकारी स्कूलों का दौरा कर चुकी हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


आप के राज्यसभा सांसद संजय सिंह बताते हैं, चुनाव प्रचार में आरोप-प्रत्यारोप चलता है, विपक्ष जमकर हमले करता है, मगर वोटिंग के दौरान दिल्ली के लोगों ने केजरीवाल सरकार के स्कूल, मोहल्ला क्लीनिक और बिजली पानी की बेहतर प्रबंध व्यवस्था को अपने जेहन में रखा।

2015 के चुनाव से पहले खींच लिया था दिल्ली के स्कूलों और अस्पतालों की कायाकल्प करने का खाका... 

2013 में जब अरविंद केजरीवाल 49 दिन के मुख्यमंत्री बने थे तो उन्होंने बिजली पानी का वादा पूरा करने के अलावा लोगों को यह भरोसा दिलाया था कि 2015 के चुनाव में यदि उन्हें मौका मिलता है तो वे स्कूलों और अस्पतालों की कायापल्ट कर देंगे।

पिछले विधानसभा चुनाव में आप ने दिल्ली में 500 नए स्कूल खोलने का वादा किया था। हालांकि वह पूरा नहीं हो सका, लेकिन केजरीवाल सरकार ने अपने स्कूलों को उनकी दयनीय हालत से काफी हद तक बाहर निकालने में कामयाबी हासिल की है।

दिल्ली का विकास करने के लिए आप ने पिछले विधानसभा चुनाव में 'दिल्ली डायलॉग' आयोजित किया था। इसमें शिक्षा और स्वास्थ्य सहित विभिन्न मुद्दों पर लोगों के साथ सीधा संवाद किया गया। पूर्व आप नेता आशीष खेतान जो कि 2014 के लोकसभा चुनाव में नई दिल्ली सीट से चुनाव लड़े थे, उन्हें दिल्ली डायलॉग की जिम्मेदारी सौंपी गई।

खेतान ने इस बाबत एक खास रिपोर्ट कर उसे केजरीवाल को सौंपा था। उनके साथ मीरा सान्याल ने भी काम किया था। पहले डायलॉग में युवाओं के मुद्दों पर पार्टी का नजरिया, दूसरे में महिला सुरक्षा और तीसरे में सस्ती बिजली की योजना बनाई गई। तय हुआ कि बिजली के लिए लंबे समय तक सब्सिडी का सहारा नहीं लिया जाएगा।

बिजली क्षेत्र में बुनियादी बदलाव होंगे। जब बिजली कंपनियों की ऑडिट रिपोर्ट आएगी तो बिजली दरें खुद-ब-खुद आधी रह जाएंगी। बिजली के ट्रांसमीशन और वितरण की कमियां दूर होंगी। इसी तरह चौथा डायलॉग ग्रामीण विकास, पांचवां डायलॉग स्वास्थ्य एवं शिक्षा, छठा डायलॉग व्यापारियों के मुद्दों पर, सातवां डायलॉग और सरकार में पारदर्शिता व आठवें डायलॉग में ट्रैफिक, पार्किंग और सार्वजनिक परिवहन जैसे विषय शामिल किए गए।
 

शिक्षा के क्षेत्र में केजरीवाल ने तय किए थे ये लक्ष्य ... 

दिल्ली में शिक्षा का अधिकार पांचवीं से बढ़ाकर 12 वीं कक्षा तक किया जाएगा। सरकारी स्कूलों का स्तर केंद्रीय विद्यालयों और प्राइवेट स्कूलों से भी बेहतर बनेगा। 20 नए कालेज और वोकेशनल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट खोले जाएंगे। हालांकि नए कालेज बनाने का वादा अभी फाइलों में है।  केजरीवाल ने मनीष सिसोदिया और आतिशी मार्लेना के साथ मिलकर स्कूलों की दशा सुधारी।

शिक्षकों का शोषण बंद कर उन्हें सम्मानजनक वेतनमान देने के अलावा विदेशों में उनकी ट्रेनिंग कराई गई। केजरीवाल कहते रहे हैं कि आज निहित स्वार्थों की वजह से दिल्ली के सरकारी स्कूलों की हालत बेहद खराब हो गई है।

हम निजी स्कूलों के खिलाफ नहीं हैं। कुछ निजी स्कूलों को बड़े कारोबारी तथा राजनीतिज्ञ चला रहे हैं, जिन्होंने सरकारी स्कूलों की व्यवस्था को बर्बाद कर दिया है। उनका मकसद है कि किसी भी तरह से उनके स्कूलों में ज्यादा से ज्यादा बच्चे आएं, जिससे कि उनकी मोटी कमाई हो सके।

यह प्रवृत्ति बदलने की जरूरत है। ऐसी व्यवस्था शुरू होगी कि अमीर लोग भी अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में भेजना शुरू कर देंगे। स्कूल नामांकन प्रणाली में सुधार के लिए आप नेता ने स्थानीय कमेटी के गठन की जरूरत पर जोर दिया।

केजरीवाल सरकार ने बहुत हद तक अपना वादा पूरा किया... 

दिल्ली में आप सरकार ने ‘एजुकेशन फ़र्स्ट’ जैसे नारे को चुनावी मुदा बना दिया था। आप सांसद संजय सिंह के मुताबिक, चुनाव में एक तरफ शाहीन बाग के मसले पर केजरीवाल को आतंकवादी कहा जा रहा था तो दूसरी ओर आप नेता शिक्षा व्यवस्था का मुद्दा उठाए घूम रहे थे।

लोगों को बताया गया कि आप सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र को सबसे ज़्यादा फंड आवंटित किया है। लोगों को पता चला कि सरकारी स्कूलों में टीचरों की ट्रेनिंग कराई जा रही है। नतीजा भी लोगों के सामने था। द्वारका में स्थित राजकीय प्रतिभा विकास विद्यालय को देश के सभी सरकारी स्कूलों में नंबर वन का स्थान मिल गया। इसके अलावा दिल्ली के दो अन्य सरकारी स्कूल भी 2019 में की रैंकिंग में पहले दस में शामिल रहे।

2015-16 में आप सरकार ने शिक्षा के लिए 6208 करोड़ रुपए का बजट रखा। अगले साल वह बजट बढ़ा कर 8642 करोड़ रुपए कर दिया गया।2017-18 में 9888 करोड़ रुपए और 2018-19 में वह बजट 11,201 करोड़ रुपए तक पहुंचा। 2019-20 में 15 हजार करोड़ के पास चला गया। सरकारी स्कूलों नई प्रयोगशालाएं और स्मार्ट क्लास रूम बनाए गए। पढ़ाई के लिए ई-मॉड्यूल्स का इस्तेमाल किया गया।

गरीब तबके ही नहीं, बल्कि मध्यम वर्ग भी अपने बच्चों को निजी स्कूलों से निकालकर सरकारी स्कूलों में ले आए। आधुनिक सुविधाओं से लैस 21 नए स्कूल बनाए गए। सरकारी स्कूलों में हैपीनेस करीकुलम यानी ख़ुशियों का पाठ्यक्रम भी जोड़ा गया। स्कूलों में तीन स्तरीय पुस्तकालय व्यवस्था, लड़कों व लड़कियों के लिए अलग-अलग शौचालय और 88.82 प्रतिशत सरकारी स्कूलों में कंप्यूटर की सुविधाएं मुहैया कराई गई।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed