SC Update: नोटबंदी के खिलाफ याचिकाओं पर दो जनवरी को आएगा फैसला! पढ़ें सुप्रीम कोर्ट की अहम खबरें
नोटबंदी के खिलाफ याचिकाओं पर न्यायमूर्ति एस ए नजीर की अध्यक्षता वाली पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ दो जनवरी को अपना फैसला सुना सकती है। गौरतलब है कि न्यायमूर्ति एस ए नजीर की अध्यक्षता वाली पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ 4 जनवरी को सेवानिवृत्त हो रही है।
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साल 2016 में मोदी सरकार ने एक हजार रुपये और पांच सौ रुपये के नोटों को बंद करने का फैसला लिया था। सरकार के उस फैसले की खूब आलोचना भी की गई थी। इतना ही नहीं, सरकार के उस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट नें कई याचिकाएं भी दाखिल की गई थीं। अब उन याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट दो जनवरी 2023 को फैसला सुना सकती है। भारत के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ ने शीर्ष अदालत के न्यायाधीश न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया है। ये समिति शीर्ष अदालत परिसर को विकलांगों के अनुकूल बनाने के लिए और उनकी भौतिक और कार्यात्मक पहुंच का ऑडिट करेगी।
दो जनवरी को फैसला सुना सकती है सुप्रीम कोर्ट
नोटबंदी के खिलाफ याचिकाओं पर न्यायमूर्ति एस ए नजीर की अध्यक्षता वाली पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ दो जनवरी को अपना फैसला सुना सकती है। गौरतलब है कि न्यायमूर्ति एस ए नजीर की अध्यक्षता वाली पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ 4 जनवरी को सेवानिवृत्त हो रही है।
इससे पहले शीर्ष अदालत ने सात दिसंबर को केंद्र और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को निर्देश दिया था कि वे 2016 के फैसले से संबंधित सारे रिकॉर्ड उनको सौंपे। इसके बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। इस पीठ में न्यायमूर्ति बी आर गवई, ए एस बोपन्ना, वी रामसुब्रमण्यन और बी वी नागरत्ना भी शामिल हैं। उन्होंने वरिष्ठ अधिवक्ता पी चिदंबरम और श्याम दीवान सहित आरबीआई के वकील और याचिकाकर्ताओं के वकीलों, अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी की दलीलें सुनी थीं।
CJI चंद्रचूड़ ने सुप्रीम कोर्ट परिसर की एक्सेसिबिलिटी ऑडिट करने के लिए की समिति गठित
भारत के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ ने शीर्ष अदालत के न्यायाधीश न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया है। ये समिति शीर्ष अदालत परिसर को विकलांगों के अनुकूल बनाने के लिए और उनकी भौतिक और कार्यात्मक पहुंच का ऑडिट करेगी।
'सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑन एक्सेसिबिलिटी' को विकलांग व्यक्तियों के लिए एक प्रश्नावली तैयार करने और जारी करने का व्यापक अधिकार दिया गया है। शीर्ष अदालत की वेबसाइट पर अपलोड किए गए एक नोटिस के अनुसार, समिति एक्सेसिबिलिटी ऑडिट, विकलांग व्यक्तियों के सर्वेक्षण के परिणाम और न्याय तक उनकी पहुंच की बाधाओं को दूर करने की दिशा में सिफारिशों/प्रस्तावों पर एक रिपोर्ट तैयार करेगी।