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फैसले पर सवाल: मद्रास हाई कोर्ट ने एक ही केस में दो अलग-अलग आदेश दिए, सुप्रीम कोर्ट ने मांगी रिपोर्ट
Fri, 23 Sep 2022 09:37 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Fri, 23 Sep 2022 09:37 PM IST
सार
याचिका में आरोप लगाया गया है कि समान कार्यवाही वाले मामले से संबंधित दो अलग-अलग आदेशों को दो अलग-अलग बिंदुओं पर अदालत की वेबसाइट पर पोस्ट किया गया था।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : Social media
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मद्रास हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल से चार सप्ताह में एक सीलबंद कवर रिपोर्ट मांगी, जिसमें उन परिस्थितियों की व्याख्या करने को कहा गया है जिनके तहत एक ही दीवानी मामले में एक खंडपीठ द्वारा 1 सितंबर को दो अलग-अलग आदेश पारित किए गए थे। न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी और न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना की पीठ ने एक पक्ष की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता के सुब्रमण्यम की इस दलील पर गौर किया कि खुली अदालत में सुनाया गया आदेश उन्हें मिली प्रमाणित प्रति से अलग है।
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याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि समान कार्यवाही वाले मामले से संबंधित दो अलग-अलग आदेशों को दो अलग-अलग बिंदुओं पर अदालत की वेबसाइट पर पोस्ट किया गया था। याचिकाकर्ता के वकील द्वारा एक बहुत ही असामान्य स्थिति हमारे संज्ञान में लाई गई है। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने 29 अगस्त, 2022 को सुनवाई पूरी की। 1 सितंबर को बेंच ने ओपन कोर्ट में अपना आदेश सुनाया। पीठ ने मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा सुनाए गए आदेश का अवलोकन किया, जिसे उच्च न्यायालय की वेबसाइट से डाउनलोड किया गया था।
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व्यक्ति की नौकरी बहाल करने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक ऐसे व्यक्ति को बहाल करने का आदेश दिया, जिसकी सेवा लगभग दो दशक पहले दिसंबर 2002 में समाप्त कर दी गई थी। यह देखते हुए कि श्रम अदालत ने अगस्त 2010 में जे के जडेजा की बर्खास्तगी को अवैध करार दिया था और कच्छ जिला पंचायत को उन्हें बहाल करने का निर्देश दिया था, शीर्ष अदालत ने कहा कि प्रबंधन को अपनी मुकदमेबाजी में प्राथमिक जिम्मेदारी से मुक्त नहीं किया जा सकता है।
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मुख्य न्यायाधीश यू यू ललित और न्यायमूर्ति एस आर भट की पीठ ने गुजरात उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ द्वारा पारित एक आदेश को खारिज कर दिया, जिसने उन्हें बहाल करने के निर्देश को खारिज कर दिया था और बदले में एक लाख रुपये का मुआवजा दिया था। अदालत ने पाया कि प्रबंधन ने श्रम अदालत के फैसले को चुनौती दी थी, लेकिन उच्च न्यायालय के एकल न्यायाधीश ने मई 2011 में व्यक्ति को बहाल करने का निर्देश दिया था। बाद में प्रबंधन ने एक अपील दायर की जिसे जनवरी 2014 में खारिज कर दिया गया जिसके बाद उसने शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया।