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आधार मामले पर SC ने कहा- सरकारी योजनाओं और नागरिकों के अधिकार के बीच संतुलन जरूरी

Thu, 25 Jan 2018 09:07 AM IST
एजेंसी/नई दिल्ली
एजेंसी/नई दिल्ली Updated Thu, 25 Jan 2018 09:07 AM IST
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SC Said on Aadhaar, Need to maintain balance between citizens right and national interest

सरकार की आधार योजना को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक अहम सुझाव दिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि ऐसे समय में जब देश आतंकवाद और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे खतरों से जूझ रहा है, सरकारी योजनाओं और नागरिकों की निजता के अधिकारों के बीच संतुलन बनाना जरूरी हो गया है।

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मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय पीठ ने कहा कि संविधान सरकार को सर्विलांस की इजाजत नहीं देता क्योंकि तकनीकी रूप से ही प्रत्येक लेनदेन, व्यक्ति की प्रोफाइल का पता लगाया जा सकता है। यहां तक कि तकनीकी के जरिये संवैधानिक कार्यप्रणालियों से भी समझौता किया जा सकता है। 
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पीठ ने कहा कि विश्व की कोई प्रणाली सुरक्षित नहीं है और मुद्दा यह नहीं है कि डाटा कैसे जुटाए जाते हैं बल्कि यह है कि जुटाई गई सूचनाओं का किस प्रकार इस्तेमाल या दुरुपयोग किया जाता है। पीठ ने कहा, ‘हम आतंकवाद और मनी लॉन्ड्रिंग के खतरों तथा सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के दौर में रह रहे हैं। 
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इस लिए इनके बीच संतुलन बनाना जरूरी है।’ पीठ में जस्टिस एके सिकरी, जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस अशोक भूषण भी शामिल हैं। कर्नाटक हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस केएस पुट्टास्वामी, सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा राय, शांता सिन्हा और माकपा नेता वीएस अच्युतानंदन जैसे याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने पूर्व सुरक्षा अधिकारी समीर
केलकर और जे डीसूजा के हलफनामे का जिक्र करते हुए दलील दी कि आधार और इसके बाध्यकारी कानून से नागरिकों की निगरानी की जाएगी। आधार परियोजना के तहत व्यक्तियों के सभी आंकड़े सेंट्रल आइडेंटिटीज डाटा रिपोजिटरी (सीआईडीआर) में जमा रहेंगे सरकार किसी व्यक्ति के रिकॉर्ड को आजीवन जुटाए रख सकती है। संविधान सरकार को किसी व्यक्ति की निगरानी का अधिकार नहीं देता। 


इस पर पीठ ने पूछा कि अदालत किस हद तक तकनीकी साक्ष्य को आधार बना सकती है क्योंकि किसी तंत्र के अस्तित्व और इसके दुरुपयोग के बीच एक अंतर है। क्या हम सरकार के फैसले की बारीकी से जांच कर सकते हैं,खासकर जब यह साबित हो चुका है कि विश्व में कोई भी प्रणाली सुरक्षित नहीं है। क्या हम खुद को और अन्य निजी कंपनियों को ट्रैक करने के लिए गूगल मैप का इस्तेमाल नहीं करते?

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