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SC: कोर्ट ने खारिज की OCI की याचिका, राज्य बार काउंसिल की सदस्यता के लिए NRI के बराबर दर्जा देने की थी मांग

Mon, 23 Feb 2026 07:47 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Mon, 23 Feb 2026 07:47 PM IST
सार

SC: सुप्रीम कोर्ट ने एक ओवरसीज भारतीय की वह याचिका खारिज कर दी, जिसमें उसने राज्य बार काउंसिल की सदस्यता और कानून का अभ्यास करने के लिए प्रवासी भारतीय के बराबर अधिकार की मांग की थी। कोर्ट ने कहा कि ओसीआई को कुछ सुविधाएं मिलती हैं, लेकिन यह भारतीय नागरिकता के बराबर नहीं है।  

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SC rejects OCI’s plea for parity with NRIs in state bar council membership
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक ओवरसीज भारतीय (ओसीआई) की याचिका खारिज कर दी। व्यक्ति ने याचिका में मांग की गई थी कि उसे राज्य बार काउंसिल का सदस्य बनने और कानून का अभ्यास करने के लिए प्रवासी भारतीय (एनआरआई) के बराबर अधिकार मिले। कोर्ट ने कहा कि ऐसे लग्जरी मामलों की सुनवाई करने का उसके पास समय नहीं है। 
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चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा, ओसीआई स्थिति कुछ विशेषाधिकार देती है। लेकिन यह भारतीय नागरिकता के बराबर नहीं है, जो अधिवक्ता अधिनियम की धारा 24 के तहत (राज्य बार काउंसिल) नामांकन के लिए अनिवार्य है। 
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याचिका ओसीआई कार्डधारक चेलाभाई कारसनभाई पटेल की ओर से दायर की गई थी। याचिका में पूछा गया था कि क्या वह राज्य बार काउंसिल के सदस्य बन सकते हैं या नहीं। उनके वकील ने दलील दी कि गृह मंत्रालय ने 2009 और 2011 में अधिसूचनाएं जारी कीं, उसमें ओसीआई को एनआरआई के बराबर माना गया है और इसलिए उन्हें भी वहीं अधिकार मिलने चाहिए।
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लेकिन कोर्ट ने उनकी इस दलील को स्वीकार नहीं किया। जस्टिस बागची ने स्पष्ट किया कि गृह मंत्रालय की अधिसूचना में दी गई समानता केवल कुछ विशेष क्षेत्रों तक ही सीमित है और यह कानूनी अभ्यास के लिए आवश्यक मूल नागरिकता नहीं होती है। 

कोर्ट ने कहा कि वकील के रूप में नामांकन अधिवक्ता अधिनियम की धारा 24 के तहत होता है, जिसमें भारतीय नागरिक होना अनिवार्य है। विदेशी नागरिकों के लिए केवल कुछ विशेष परिस्थितियों में छूट दी गई है। 

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