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SC: साईबाबा को बरी करने के आदेश पर रोक से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, महाराष्ट्र सरकार ने दायर की थी याचिका
Mon, 11 Mar 2024 03:00 PM IST
आदर्श शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: आदर्श शर्मा
Updated Mon, 11 Mar 2024 03:00 PM IST
सार
माओवादी संबंध मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ महाराष्ट्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की। हालांकि कोर्ट ने उसे खारिज कर दिया। गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर जीएन साईबाबा को बरी कर दिया था।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : ANI
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को महाराष्ट्र सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें बॉम्बे हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगाने की मांग की गई थी, जिसमें दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर जीएन साईबाबा और अन्य को माओवादी संबंध मामले में बरी कर दिया गया था।
महाराष्ट्र सरकारी की याचिका पर 'सुप्रीम' रोक
पीठ ने अपील को जल्द सूचीबद्ध करने के लिए महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू के मौखिक अपील को भी खारिज कर दिया और कहा कि यह सही समय पर आएगा। पीठ ने एसवी राजू ने कहा कि सजा को पलटने के आदेश में कोई जल्दबाजी नहीं की जा सकती। अगर यह दूसरा तरीका होता, तो हम इस पर विचार करते।
हाईकोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा की रद्द
गौरतलब है कि पांच मार्च को बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ ने 54 वर्षीय साई बाबा और अन्य को बरी कर दिया, यह देखते हुए कि अभियोजन पक्ष उनके खिलाफ मामले को उचित संदेह से परे साबित करने में विफल रहा। हाईकोर्ट ने साईबाबा की आजीवन कारावास की सजा को भी रद्द कर दिया था और मामले में पांच अन्य आरोपियों को बरी कर दिया था।
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हाईकोर्ट ने आरोपी को किया मामले में बरी
हाईकोर्ट ने कहा था कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ किसी भी कानूनी जब्ती या किसी भी आपत्तिजनक सामग्री को स्थापित करने में विफल रहा है। जीएन साई बाबा 2014 में मामले में गिरफ्तारी के बाद से नागपुर सेंट्रल जेल में बंद थे। मार्च 2017 में महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले की एक सत्र अदालत ने जीएन साईबाबा और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के एक छात्र समेत पांच अन्य को प्रतिबंधित सीपीआई (माओवादी) के साथ संबंधों और देश के खिलाफ गतिविधियों में शामिल होने के लिए दोषी ठहराया था। ट्रायल कोर्ट ने साई बाबा और अन्य को यूएपीए और कई प्रावधानों के तहत दोषी ठहराया था।
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महाराष्ट्र सरकारी की याचिका पर 'सुप्रीम' रोक
पीठ ने अपील को जल्द सूचीबद्ध करने के लिए महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू के मौखिक अपील को भी खारिज कर दिया और कहा कि यह सही समय पर आएगा। पीठ ने एसवी राजू ने कहा कि सजा को पलटने के आदेश में कोई जल्दबाजी नहीं की जा सकती। अगर यह दूसरा तरीका होता, तो हम इस पर विचार करते।
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हाईकोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा की रद्द
गौरतलब है कि पांच मार्च को बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ ने 54 वर्षीय साई बाबा और अन्य को बरी कर दिया, यह देखते हुए कि अभियोजन पक्ष उनके खिलाफ मामले को उचित संदेह से परे साबित करने में विफल रहा। हाईकोर्ट ने साईबाबा की आजीवन कारावास की सजा को भी रद्द कर दिया था और मामले में पांच अन्य आरोपियों को बरी कर दिया था।
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हाईकोर्ट ने आरोपी को किया मामले में बरी
हाईकोर्ट ने कहा था कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ किसी भी कानूनी जब्ती या किसी भी आपत्तिजनक सामग्री को स्थापित करने में विफल रहा है। जीएन साई बाबा 2014 में मामले में गिरफ्तारी के बाद से नागपुर सेंट्रल जेल में बंद थे। मार्च 2017 में महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले की एक सत्र अदालत ने जीएन साईबाबा और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के एक छात्र समेत पांच अन्य को प्रतिबंधित सीपीआई (माओवादी) के साथ संबंधों और देश के खिलाफ गतिविधियों में शामिल होने के लिए दोषी ठहराया था। ट्रायल कोर्ट ने साई बाबा और अन्य को यूएपीए और कई प्रावधानों के तहत दोषी ठहराया था।