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एलोपैथी की आलोचना: सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराजगी, कहा- स्वामी रामदेव बाबा को क्या हुआ?
Tue, 23 Aug 2022 07:32 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Tue, 23 Aug 2022 07:32 PM IST
सार
शीर्ष अदालत ने 12 अगस्त को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई थी, जिसमें बाबा पर आधुनिक दवाओं के खिलाफ अभियान चलाने का आरोप लगाया गया था।
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बाबा रामदेव
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने एलोपैथी और एलोपैथिक डॉक्टरों की आलोचना करने के लिए योग गुरु रामदेव से नाराजगी जताते हुए कहा कि उन्हें डॉक्टरों और उपचार की अन्य प्रणालियों को दोष देने से परहेज करना चाहिए। शीर्ष अदालत ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की उस याचिका पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और आयुष मंत्रालय और पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड से जवाब मांगा, जिसमें टीकाकरण अभियान और आधुनिक दवाओं के खिलाफ एक गलत अभियान चलाने का आरोप लगाया गया था।
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स्वामी ने योग को लोकप्रिय बनाया...लेकिन
अदालत ने कहा, गुरु स्वामी रामदेव बाबा को क्या हुआ? आखिरकार हम उनका सम्मान करते हैं क्योंकि उन्होंने योग को लोकप्रिय बनाया। हम सब ये करते हैं। लेकिन, उन्हें दूसरी व्यवस्था की आलोचना नहीं करनी चाहिए। इस बात की क्या गारंटी है कि आयुर्वेद जो भी प्रणाली अपना रहा है वह काम करेगी? सभी डॉक्टरों पर आरोप लगाने वाले विज्ञापन दिखते हैं जैसे कि वे हत्यारे हैं या कुछ और हैं। मुख्य न्यायाधीश एन वी रमण की अध्यक्षता वाली पीठ ने ये टिप्पणी की।
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बाबा रामदेव ने उठाए थे एलोपैथी पर सवाल
न्यायमूर्ति हिमा कोहली और न्यायमूर्ति सी टी रविकुमार की पीठ ने कहा कि योग गुरु डॉक्टरों और प्रणालियों (उपचार की) पर सवाल नहीं उठा सकते। उन्हें रोकना बेहतर होगा। आईएमए की ओर से पेश हुए वकील अमरजीत सिंह ने कई विज्ञापनों का हवाला दिया जिसमें कथित तौर पर एलोपैथ और डॉक्टरों को गलत रूप में पेश किया गया है। वकील ने कहा कि आम लोगों को गुमराह करने के लिए आयुर्वेदिक दवाओं के उत्पादन में लगी फर्मों द्वारा अपमानजनक बयान भी दिए गए हैं। इन विज्ञापनों में कहा गया है कि आधुनिक दवाएं लेने के बावजूद चिकित्सक खुद मर रहे हैं। अगर यह बेरोकटोक चलता रहा तो यह हमारे लिए गंभीर पूर्वाग्रह पैदा करेगा।
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शीर्ष अदालत ने 12 अगस्त को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई थी, जिसमें आधुनिक दवाओं के खिलाफ अभियान चलाने का आरोप लगाया गया था। वकील ने कहा कि देश में कोविड-19 वैक्सीन अभियान और एलोपैथिक दवाओं के उपयोग सहित टीकाकरण को हतोत्साहित करने का प्रयास किया जा रहा है। यह इंडियन मेडिकल एसोसिएशन द्वारा दायर एक रिट याचिका है। यह एक गंभीर मुद्दा है क्योंकि पूरे देश में टीकाकरण अभियान और आधुनिक चिकित्सा के खिलाफ अभियान चल रहा है। डॉक्टर मायूस हैं। लोगों को इलाज पर अविश्वास करने के लिए गुमराह किया जा रहा है।