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SC: अनुच्छेद 142 के तहत मिली शक्ति सुप्रीम कोर्ट को वादी के हक की अनदेखी का अधिकार नहीं देती, अदालत की टिप्पणी
Thu, 29 Feb 2024 09:53 PM IST
गुलाम अहमद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: गुलाम अहमद
Updated Thu, 29 Feb 2024 09:53 PM IST
सार
भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच-जजों की संविधान पीठ ने फैसला दिया कि छह महीने के बाद दीवानी और आपराधिक मामलों में निचली अदालत या हाईकोर्ट द्वारा दिए गए स्थगन आदेश को स्वत: रद्द नहीं किया जा सकता है।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत सुप्रीम कोर्ट की असाधारण शक्ति उसे दीवानी और आपराधिक मामलों में रोक लगाने वाले वैध न्यायिक आदेशों का आनंद ले रहे वादकारों के मूल अधिकारों की अनदेखी करने की ताकत नहीं देती है। शीर्ष अदालत ने गुरुवार को एक मामले में सुनवाई करते हुए यह अहम टिप्पणी की।
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संविधान का अनुच्छेद 142 सुप्रीम कोर्ट को देश के भीतर अदालत के समक्ष लंबित किसी भी मामले में पूर्ण न्याय करने के लिए आवश्यक कोई भी व्यवस्था या आदेश पारित करने का शक्ति देता है।
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भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच-जजों की संविधान पीठ ने इस टिप्पणी के साथ फैसला दिया कि छह महीने के बाद दीवानी और आपराधिक मामलों में निचली अदालत या हाईकोर्ट द्वारा दिए गए स्थगन आदेश को स्वत: रद्द नहीं किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने 2018 के शीर्ष अदालत के आदेश को पलट दिया, जिसमें कहा गया था कि निचली अदालतों और हाईकोर्ट द्वारा दी गई ऐसी रोक छह महीने के बाद स्वयं रद्द हो जाएगी, अगर इसे विशेष रूप से नहीं बढ़ाया गया।
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जस्टिस एएस ओका की टिप्पणी
जस्टिस एएस ओका ने फैसला लिखते हुए कहा कि न्यायालय के समक्ष पक्षों के बीच न्याय करने के लिए क्षेत्राधिकार का प्रयोग किया जा सकता है और अनुच्छेद 142 के तहत इस न्यायालय की शक्ति का प्रयोग प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों को पराजित करने के लिए नहीं किया जा सकता है, जो हमारे न्यायशास्त्र का अभिन्न अंग हैं। उन्होंने आगे कहा, अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल बड़ी संख्या में उन वादीकारों द्वारा उनके पक्ष में वैध रूप से पारित न्यायिक आदेशों के आधार पर प्राप्त लाभों को रद्द करने के लिए नहीं किया जा सकता है जो इस न्यायालय के समक्ष कार्यवाही के पक्षकार नहीं हैं। अनुच्छेद 142 इस न्यायालय को वादकारों के मूल अधिकारों की अनदेखी करने का अधिकार नहीं देता है।
आदेश में कहा गया कि हाईकोर्ट द्वारा पारित कार्यवाही पर रोक के सभी अंतरिम आदेश केवल समय पूरा होने के कारण खुद समाप्त हो जाते हैं, संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत इस न्यायालय के अधिकार क्षेत्र के उपयोग में जारी नहीं किए जा सकते। आदेश में संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अधिकार क्षेत्र के प्रयोग के लिए कुछ महत्वपूर्ण मापदंडों का भी जिक्र किया गया है।