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सुप्रीम कोर्ट: यूनिटेक के पूर्व प्रमोटर संजय और अजय चंद्रा को तिहाड़ से मुंबई की जेल में स्थानांतरित करने के आदेश
Thu, 26 Aug 2021 03:50 PM IST
अभिषेक दीक्षित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Thu, 26 Aug 2021 03:50 PM IST
सार
ईडी ने कोर्ट को बताया कि यूनिटेक के दोनों पूर्व प्रोमोटर्स ने जेल से एक डमी निदेशक को प्रभावित करने की कोशिश की, जिससे एजेंसी ने पूछताछ की थी। उन्होंने संपत्तियों के निपटारे के लिए तिहाड़ जेल के बाहर कर्मियों को भी तैनात किया है।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : social media
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने यूनिटेक के पूर्व प्रमोटर संजय चंद्रा और अजय चंद्रा को तिहाड़ जेल से मुंबई की आर्थर रोड जेल और तलोजा जेल में स्थानांतरित करने का आदेश दिया है। शीर्ष कोर्ट ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर से तिहाड़ जेल के उन अधिकारियों की व्यक्तिगत रूप से जांच करने के लिए कहा है, जिन्होंने कथित तौर पर चंद्रा के साथ सांठगांठ की थी।
इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कोर्ट को बताया कि यूनिटेक के दोनों पूर्व प्रोमोटर संजय और अजय चंद्रा ने जेल से एक डमी निदेशक को प्रभावित करने की भी कोशिश की, जिससे एजेंसी ने पूछताछ की थी। ईडी ने बताया कि यूनिटेक के पूर्व संस्थापकों ने बाहरी दुनिया से संपर्क करने और संपत्तियों का निपटारा करने के लिए तिहाड़ जेल परिसर के बाहर कर्मियों को तैनात किया है। जिसका संचालन दोनों तिहाड़ जेल से ही कर रहे थे।
प्रवर्तन निदेशालय ने उच्चतम न्यायालय में बताया कि उसने यहां दक्षिण दिल्ली में यूनिटेक के भूतपूर्व संस्थापकों के गुप्त कार्यालय का पता लगाया है। यूनिटेक के गुप्त कार्यालय से संपत्ति बिक्री विलेख, डिजीटल हस्ताक्षर और संवेदनशील जानकारी वाले कम्प्यूटर जब्त किए गए हैं।
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बता दें कि यूनिटेक के प्रबंध निदेशक संजय चंद्रा अपने भाई अजय चंद्रा के साथ जेल में बंद है। इनके खिलाफ कंपनी की गुरुग्राम स्थित परियोजनाओं के 158 खरीदारों ने आपराधिक मुकदमा दर्ज कराया हुआ है। खरीदारों के अलावा आयकर विभाग ने भी कंपनी पर 950 करोड़ रुपये का कर बकाया होने के चलते खुद को इस मामले में एक पार्टी बनाए जाने का आग्रह सर्वोच्च न्यायालय से किया हुआ है।
अब तक कुल 595.61 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की जा चुकी
कंपनी और उसके प्रमोटर संजय चंद्रा तथा अजय चंद्रा पर यह भी आरोप है कि उन्होंने अवैध तरीके से 2000 करोड़ रुपये साइप्रस और केमैन द्वीप भेजे। ईडी ने मामले में चार मार्च को शिवालिक समूह, त्रिकार समूह, यूनीटेक समूह और मुंबई एवं एनसीआर में कार्नोस्ती समूह के 35 ठिकानों पर छापे मारे थे। इस मामले में अब तक कुल 595.61 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की जा चुकी है।
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इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कोर्ट को बताया कि यूनिटेक के दोनों पूर्व प्रोमोटर संजय और अजय चंद्रा ने जेल से एक डमी निदेशक को प्रभावित करने की भी कोशिश की, जिससे एजेंसी ने पूछताछ की थी। ईडी ने बताया कि यूनिटेक के पूर्व संस्थापकों ने बाहरी दुनिया से संपर्क करने और संपत्तियों का निपटारा करने के लिए तिहाड़ जेल परिसर के बाहर कर्मियों को तैनात किया है। जिसका संचालन दोनों तिहाड़ जेल से ही कर रहे थे।
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प्रवर्तन निदेशालय ने उच्चतम न्यायालय में बताया कि उसने यहां दक्षिण दिल्ली में यूनिटेक के भूतपूर्व संस्थापकों के गुप्त कार्यालय का पता लगाया है। यूनिटेक के गुप्त कार्यालय से संपत्ति बिक्री विलेख, डिजीटल हस्ताक्षर और संवेदनशील जानकारी वाले कम्प्यूटर जब्त किए गए हैं।
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बता दें कि यूनिटेक के प्रबंध निदेशक संजय चंद्रा अपने भाई अजय चंद्रा के साथ जेल में बंद है। इनके खिलाफ कंपनी की गुरुग्राम स्थित परियोजनाओं के 158 खरीदारों ने आपराधिक मुकदमा दर्ज कराया हुआ है। खरीदारों के अलावा आयकर विभाग ने भी कंपनी पर 950 करोड़ रुपये का कर बकाया होने के चलते खुद को इस मामले में एक पार्टी बनाए जाने का आग्रह सर्वोच्च न्यायालय से किया हुआ है।
अब तक कुल 595.61 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की जा चुकी
कंपनी और उसके प्रमोटर संजय चंद्रा तथा अजय चंद्रा पर यह भी आरोप है कि उन्होंने अवैध तरीके से 2000 करोड़ रुपये साइप्रस और केमैन द्वीप भेजे। ईडी ने मामले में चार मार्च को शिवालिक समूह, त्रिकार समूह, यूनीटेक समूह और मुंबई एवं एनसीआर में कार्नोस्ती समूह के 35 ठिकानों पर छापे मारे थे। इस मामले में अब तक कुल 595.61 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की जा चुकी है।