{"_id":"5de89f2c8ebc3e547f5934a6","slug":"sc-likely-to-hear-petition-by-ms-bindu-next-week-one-of-two-women-who-entered-sabarimala-in-january","type":"story","status":"publish","title_hn":"सबरीमाला में प्रवेश करने वाली महिला की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट अगले हफ्ते करेगा सुनवाई","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
सबरीमाला में प्रवेश करने वाली महिला की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट अगले हफ्ते करेगा सुनवाई
Thu, 05 Dec 2019 11:39 AM IST
Sneha Baluni
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Sneha Baluni
Updated Thu, 05 Dec 2019 11:39 AM IST
विज्ञापन
सबरीमाला मंदिर (फाइल फोटो)
उच्चतम न्यायालय अगले हफ्ते एमएस बिंदु की याचिका पर सुनवाई कर सकता है। बिंदु उन दो महिलाओं में से एक हैं जिन्होंने इस साल जनवरी के महीने में सबरीमाला मंदिर के अंदर प्रवेश किया था। याचिकाकर्ता ने याचिका में मांग की है कि अदालत महिलाओं को मंदिर के अंदर जाने के लिए दिशा-निर्देश दे।
विज्ञापन
Supreme Court likely to next week hear the petition by MS Bindu (one of the two women who entered #Sabarimala temple in January this year) seeking a direction to let women enter Sabarimala temple. pic.twitter.com/7smk5gSTSb
— ANI (@ANI) December 5, 2019विज्ञापन
महिला ने याचिका में आरोप लगाया है कि मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश देने के शीर्ष अदालत के फैसले के बावजूद उन्हें मंदिर में प्रवेश करने से रोका गया। प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे की पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह की दलीलों पर गौर किया कि उनकी मुवक्किल बिंदु अम्मिनी पर सबरीमला मंदिर में प्रवेश करने की कोशिश के लिए पुलिस आयुक्त कार्यालय के बाहर हमला किया गया था।
विज्ञापन
जयसिंह ने कहा, 'बिंदु पर किसी रसायनिक पदार्थ से पुलिस आयुक्त कार्यालय के बाहर हमला किया गया।' साथ ही उन्होंने कहा कि केरल राज्य के अधिकारी न्यायालय के आदेश के बावजूद महिलाओं को मंदिर में प्रवेश नहीं करने दे रहे। पीठ ने कहा, 'हम पूर्व याचिका के साथ इस याचिका पर भी अगले हफ्ते सुनवाई करेंगे।'
इससे पहले बुधवार को एक अन्य महिला, फातिमा इसी तरह की याचिका के साथ न्यायालय पहुंची थी। पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने पिछले साल सितंबर में दिए गए फैसले में केरल के सबरीमला में भगवान अयप्पा के मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दी थी। पीठ ने कहा था कि शारीरिक संरचना के आधार पर भेदभाव करना समानता के अधिकार जैसे मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।