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SC: 'ग्राहकों को नहीं होगा भ्रम', सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की 'लंदन प्राइड' व्हिस्की ट्रेडमार्क के खिलाफ याचिका
Thu, 14 Aug 2025 09:39 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Thu, 14 Aug 2025 09:39 PM IST
सार
SC: सुप्रीम कोर्ट ने पर्नोड रिकार्ड की ‘लंदन प्राइड’ व्हिस्की के खिलाफ याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि दोनों ब्रांड में उपभोक्ता को भ्रम होने की संभावना नहीं है। कोर्ट ने कहा कि ‘प्राइड’ शब्द आम है और दोनों ब्रांड की पैकेजिंग और नाम अलग हैं। इसके साथ ही शीर्ष कोर्ट ने निचली अदालत को चार महीने में केस निपटाने का निर्देश भी दिया गया।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने शराब बनाने वाली कंपनी पर्नोड रिकार्ड इंडिया की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उसने 'लंदन प्राइड' नाम की व्हिस्की की बिक्री पर रोक लगाने की मांग की थी। कोर्ट ने कहा कि 'लंदन प्राइड' और 'ब्लेंडर्स प्राइड' या 'इंपीरियल ब्लू' के नाम और पैकेजिंग में ऐसी कोई समानता नहीं है, जिससे उपभोक्ता भ्रमित हों।
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट और इंदौर की वाणिज्यिक कोर्ट के उन फैसलों को सही ठहराया, जिसमें कंपनी को अंतरिम राहत देने से इनकार किया गया था। पर्नोड रिकार्ड ने शीर्ष कोर्ट से मांग की थी कि इंदौर के कारोबारी करणवीर सिंह छाबड़ा को 'लंदन प्राइड' नाम और उससे मिलती-जुलती पैकिंग का उपयोग करने से रोका जाए, क्योंकि इससे उनके 'ब्लेंडर्स प्राइड', 'इंपीरियल ब्लू' और 'सीग्राम्स' जैसे पंजीकृत ब्रांड का उल्लंघन होता है।
शीर्ष कोर्ट ने कहा कि ट्रेडमार्क कानून के अनुसार किसी दो ब्रांड में समानता का मतलब यह नहीं कि नाम या पैकिंग पूरी तरह एक जैसी हो। असली सवाल यह होता है कि आम ग्राहक के मन में भ्रम हो सकता है या नहीं और इस मामले में अदालत को ऐसा कोई भ्रम नहीं दिखा। कोर्ट ने कहा कि 'ब्लेंडर्स प्राइड' और 'लंदन प्राइड' एक जैसे नहीं हैं। दोनों की बोतल, लेबल और पैकेजिंग अलग-अलग हैं। 'प्राइड' शब्द शराब उद्योग में आम है और इसे कई ब्रांड इस्तेमाल करते हैं। 'ब्लेंडर्स', 'इंपीरियल ब्लू' और 'लंदन' जैसे शब्द पूरी तरह अलग हैं, दिखने और सुनने में भी।
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ये भी पढ़ें: 'राजनीतिक दलों के साथ साझा की गई मृत मतदाताओं की सूची', सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद चुनाव आयोग का बयान
कोर्ट ने यह भी कहा कि दोनों ब्रांड महंगी और प्रीमियम श्रेणी की शराब बनाते हैं, जिन्हें खरीदने वाले ग्राहक समझदार होते हैं और सोच-समझकर फैसला लेते हैं। इसलिए भ्रम की संभावना और भी कम हो जाती है। बेंच ने यह भी कहा कि 'प्राइड' जैसे सामान्य शब्द के आधार पर किसी को रोकने की मांग करना सही नहीं है। पर्नोड रिकार्ड ने 'ब्लेंडर्स प्राइड' और 'इंपीरियल ब्लू' के कुछ हिस्सों को मिलाकर 'लंदन प्राइड' के खिलाफ एक नया मामला खड़ा करने की कोशिश की, जो कानूनी रूप से गलत है।
कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए निचली वाणिज्यिक अदालत को निर्देश दिया कि वह इस मुकदमे की सुनवाई चार महीने में पूरी करे और सुप्रीम कोर्ट या किसी अन्य अदालत की टिप्पणियों से प्रभावित न हो।
ये भी पढ़ें: 'नजरअंदाज नहीं कर सकते पहलगाम की घटना..', जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा देने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट
पर्नोड रिकार्ड मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के 2023 के फैसले के खिलाफ शीर्ष कोर्ट में याचिका दायर की थी। कंपनी ने कहा था कि उसके पास 'ब्लेंडर्स प्राइड', 'इंपीरियल ब्लू' और 'सीग्राम्स' के लिए पंजीकृत ट्रेडमार्क हैं और इंदौर की जेके एंटरप्राइजेज उनकी नकल करके 'लंदन प्राइड' नाम से शराब बेच रही है। लेकिन शीर्ष कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि 'ब्लेंडर्स', 'इंपीरियल ब्लू' और 'लंदन' जैसे शब्द अलग-अलग हैं और 'प्राइड' शब्द का व्यापारिक क्षेत्र में आमतौर पर इस्तेमाल होता है, इसलिए इसे लेकर कोई विशेष अधिकार नहीं बनता।
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जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट और इंदौर की वाणिज्यिक कोर्ट के उन फैसलों को सही ठहराया, जिसमें कंपनी को अंतरिम राहत देने से इनकार किया गया था। पर्नोड रिकार्ड ने शीर्ष कोर्ट से मांग की थी कि इंदौर के कारोबारी करणवीर सिंह छाबड़ा को 'लंदन प्राइड' नाम और उससे मिलती-जुलती पैकिंग का उपयोग करने से रोका जाए, क्योंकि इससे उनके 'ब्लेंडर्स प्राइड', 'इंपीरियल ब्लू' और 'सीग्राम्स' जैसे पंजीकृत ब्रांड का उल्लंघन होता है।
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शीर्ष कोर्ट ने कहा कि ट्रेडमार्क कानून के अनुसार किसी दो ब्रांड में समानता का मतलब यह नहीं कि नाम या पैकिंग पूरी तरह एक जैसी हो। असली सवाल यह होता है कि आम ग्राहक के मन में भ्रम हो सकता है या नहीं और इस मामले में अदालत को ऐसा कोई भ्रम नहीं दिखा। कोर्ट ने कहा कि 'ब्लेंडर्स प्राइड' और 'लंदन प्राइड' एक जैसे नहीं हैं। दोनों की बोतल, लेबल और पैकेजिंग अलग-अलग हैं। 'प्राइड' शब्द शराब उद्योग में आम है और इसे कई ब्रांड इस्तेमाल करते हैं। 'ब्लेंडर्स', 'इंपीरियल ब्लू' और 'लंदन' जैसे शब्द पूरी तरह अलग हैं, दिखने और सुनने में भी।
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कोर्ट ने यह भी कहा कि दोनों ब्रांड महंगी और प्रीमियम श्रेणी की शराब बनाते हैं, जिन्हें खरीदने वाले ग्राहक समझदार होते हैं और सोच-समझकर फैसला लेते हैं। इसलिए भ्रम की संभावना और भी कम हो जाती है। बेंच ने यह भी कहा कि 'प्राइड' जैसे सामान्य शब्द के आधार पर किसी को रोकने की मांग करना सही नहीं है। पर्नोड रिकार्ड ने 'ब्लेंडर्स प्राइड' और 'इंपीरियल ब्लू' के कुछ हिस्सों को मिलाकर 'लंदन प्राइड' के खिलाफ एक नया मामला खड़ा करने की कोशिश की, जो कानूनी रूप से गलत है।
कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए निचली वाणिज्यिक अदालत को निर्देश दिया कि वह इस मुकदमे की सुनवाई चार महीने में पूरी करे और सुप्रीम कोर्ट या किसी अन्य अदालत की टिप्पणियों से प्रभावित न हो।
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पर्नोड रिकार्ड मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के 2023 के फैसले के खिलाफ शीर्ष कोर्ट में याचिका दायर की थी। कंपनी ने कहा था कि उसके पास 'ब्लेंडर्स प्राइड', 'इंपीरियल ब्लू' और 'सीग्राम्स' के लिए पंजीकृत ट्रेडमार्क हैं और इंदौर की जेके एंटरप्राइजेज उनकी नकल करके 'लंदन प्राइड' नाम से शराब बेच रही है। लेकिन शीर्ष कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि 'ब्लेंडर्स', 'इंपीरियल ब्लू' और 'लंदन' जैसे शब्द अलग-अलग हैं और 'प्राइड' शब्द का व्यापारिक क्षेत्र में आमतौर पर इस्तेमाल होता है, इसलिए इसे लेकर कोई विशेष अधिकार नहीं बनता।
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