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सुप्रीम कोर्ट में अटॉर्नी जनरल: नीति निर्णयों को प्रभावित करते हैं अदालत के फैसले, शक्तियों के बंटवारे का रखना चाहिए ध्यान
Wed, 04 May 2022 09:40 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Wed, 04 May 2022 09:40 PM IST
सार
अटॉर्नी जनरल ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि अक्सर अदालत नीतिगत फैसले देती रही है और विधायिका को ऐसे और वैसे कानूनों को पारित करने के लिए कहती रही है।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : social media
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विस्तार
अटॉर्नी जनरल के. के. वेणुगोपाल ने सुप्रीम कोर्ट में 2021 के न्यायाधिकरण सुधार अधिनियम का बचाव करते हुए बुधवार को कहा कि कई बार शीर्ष अदालत अपने फैसलों के जरिए नीतिगत क्षेत्र में दखल देती है, लेकिन उसे शक्तियों के पृथक्करण को ध्यान में रखना चाहिए।
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अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स एक्ट 2021 का बचाव किया और कहा कि कई बार शीर्ष अदालत ने अपने फैसलों के माध्यम से नीतिगत क्षेत्र में प्रवेश किया था और इसे शक्तियों के बंटवारा होने का ध्यान रखना चाहिए। वेणुगोपाल ने न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़, सूर्य कांत और न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी की पीठ को बताया कि सुप्रीम कोर्ट के कई फैसले इसके न्यायिक दायरे से बाहर चले गए हैं। हमने कहा है कि यह एक नीतिगत फैसला है फिर भी अदालत ने अपना फैसला सुनाया। अक्सर अदालत नीतिगत फैसले देती रही है और विधायिका को ऐसे और वैसे कानूनों को पारित करने के लिए कहती रही है। शक्तियों का पृथक्करण है और इसे ध्यान में रखा जाना चाहिए।
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केंद्र के एक अधिनियम पर जताई आपत्ति
अटॉर्नी जनरल वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार की दलील का जवाब दे रहे थे, जिन्होंने कहा कि पिछले साल अध्यादेश के प्रावधानों को रद्द करने के बावजूद केंद्र एक अधिनियम लाया है जिसमें वही समान प्रावधान हैं, जिसे एक जस्टिस एलएन राव की पीठ ने खारिज कर दिया था। उन्होंने कहा कि पिछले साल 14 जुलाई को शीर्ष अदालत ने अपने 2:1 के फैसले से ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स (रेशनलाइजेशन एंड कंडीशंस ऑफ सर्विस) अध्यादेश, 2021 को बरकरार रखा था, लेकिन ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और अन्य सदस्यों की सेवाओं की शर्तों से संबंधित कुछ प्रावधानों को असंवैधानिक करार दिया था।
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पीठ ने अटॉर्नी जनरल से पूछा कि क्या अधिनियम वैध रहेगा क्योंकि यह शब्द दर शब्द अध्यादेश के समान है जिसके प्रावधानों को रद्द कर दिया गया था। वेणुगोपाल ने कहा कि उन्हें बहस करने के लिए समय की चागिए, क्योंकि उन्हें सूचित नहीं किया गया था कि आज बहस की जाएगी। पीठ ने कहा कि वह कानून की वैधता पर अवकाश के बाद जुलाई में दलीलें सुनेगी। इसके बाद पीठ ने न्यायाधिकरणों में नियुक्तियों से संबंधित कुछ आवेदनों पर विचार किया।