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Bilkis Bano Case: दोषियों की रिहाई को चुनौती देने वाली याचिका से जस्टिस बेला त्रिवेदी ने खुद को अलग किया
Wed, 04 Jan 2023 02:23 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Wed, 04 Jan 2023 02:23 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : Social Media
सुप्रीम कोर्ट में बिलकिस बानो मामले में 11 दोषियों की रिहाई को लेकर सुनवाई करने वाली बेंच से जस्टिस बेला एम. त्रिवेदी ने खुद को अलग कर लिया। गौरतलब है कि 2002 के गोधरा दंगों में बिलकिस बानो के साथ गैंगरेप और उनके परिवार के सात सदस्यों की हत्या करने वाले दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। हालांकि, गुजरात सरकार ने उन्हें बीते साल रिहा कर दिया था।
इसी मामले में जस्टिस अजय रस्तोगी और जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने माकपा नेता सुभाषिनी अली, पत्रकार रेवती लाल, लखनऊ विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति रूप रेखा वर्मा और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सांसद महुआ मोइत्रा की याचिकाओं पर सुनवाई शुरू की थी।
जस्टिस रस्तोगी ने भी खुद को सुनवाई से अलग किया
इस मामले में जस्टिस रस्तोगी ने भी अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा, “क्योंकि मेरी साथी न्यायाधीश पहले ही पीड़िता की याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर चुकी हैं, इसलिए वह इस मामले की सुनवाई से भी खुद को अलग करना चाहेंगे।”
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न्यायमूर्ति रस्तोगी ने कहा कि अब पीड़िता ने दोषियों को छूट देने को चुनौती देते हुए इस अदालत का दरवाजा खटखटाया है, उसकी याचिका को एक प्रमुख मामले के रूप में लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि जब पीठ न्यायाधीशों के एक अलग संयोजन के साथ बैठेगी तो बाकी याचिकाओं को उसकी याचिका के साथ मिला दिया जाएगा। बेंच ने कहा, “हम सभी मामलों को अगली तारीख पर सूचीबद्ध करेंगे और सभी याचिकाओं के साथ संलग्न करेंगे। तब तक सभी दलीलें पूरी हो जानी चाहिए।
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इसी मामले में जस्टिस अजय रस्तोगी और जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने माकपा नेता सुभाषिनी अली, पत्रकार रेवती लाल, लखनऊ विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति रूप रेखा वर्मा और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सांसद महुआ मोइत्रा की याचिकाओं पर सुनवाई शुरू की थी।
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जस्टिस रस्तोगी ने भी खुद को सुनवाई से अलग किया
इस मामले में जस्टिस रस्तोगी ने भी अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा, “क्योंकि मेरी साथी न्यायाधीश पहले ही पीड़िता की याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर चुकी हैं, इसलिए वह इस मामले की सुनवाई से भी खुद को अलग करना चाहेंगे।”
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न्यायमूर्ति रस्तोगी ने कहा कि अब पीड़िता ने दोषियों को छूट देने को चुनौती देते हुए इस अदालत का दरवाजा खटखटाया है, उसकी याचिका को एक प्रमुख मामले के रूप में लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि जब पीठ न्यायाधीशों के एक अलग संयोजन के साथ बैठेगी तो बाकी याचिकाओं को उसकी याचिका के साथ मिला दिया जाएगा। बेंच ने कहा, “हम सभी मामलों को अगली तारीख पर सूचीबद्ध करेंगे और सभी याचिकाओं के साथ संलग्न करेंगे। तब तक सभी दलीलें पूरी हो जानी चाहिए।