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Coronavirus Lockdown: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा - वायरस के मुकाबले दहशत से होंगी ज्यादा जिंदगियां बर्बाद

Wed, 01 Apr 2020 06:07 AM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Sneha Baluni Updated Wed, 01 Apr 2020 06:07 AM IST
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Supreme Court Coronavirus Lockdown News in Hindi: SC hear petition over migration
कोरोनावायरस लॉकडाउन पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई - फोटो : Twitter

उच्चतम न्यायालय में मंगलवार को फिर प्रवासी मजदूरों को लेकर दाखिल की गई याचिका पर सुनवाई हुई। वकील अलख आलोक श्रीवास्तव ने अपनी याचिका में कोरोना वायरस के कारण हुए लॉकडाउन के मद्देनजर मजदूरों के लिए तुरंत खाना, आश्रय मुहैया कराने के निर्देश देने के लिए कहा है। जिसपर केंद्र सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि मजदूरों के अंतरराज्यीय पलायन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा हुआ है।

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तुषार ने शीर्ष अदालत को बताया, 'हम लोगों में मौजूद भ्रम को दूर करने के लिए परामर्श प्रदान करने पर विचार कर रहे हैं। 22 लाख 88 हजार से ज्यादा लोगों को खाना दिया जा रहा है। यह सभी जरुरतमंद, प्रवासी और दिहाड़ी मजदूरी करने वाले लोग हैं। उन्हें आश्रय स्थल में रखा गया है।'

न्यायालय ने सुनवाई के दौरान केंद्र से कहा कि वह फर्जी खबरों के माध्यम से फैलाई जा रही दहशत का मुकाबला करने के लिए कोरोना वायरस महामारी को लेकर रीयल टाइम जानकारी देने के लिए 24 घंटे के अंदर एक पोर्टल स्थापित करे। 

अदालत ने केंद्र से कहा कि देश के विभिन्न आश्रय स्थलों में रह रहे प्रवासियों को समझाने के लिए सभी धर्मों के सामुदायिक नेताओं और प्रशिक्षित परामर्शदाताओं की मदद ले। नहीं तो वायरस के मुकाबले दहशत से ज्यादा जिंदगियां बर्बाद  होंगी।

अदालत ने केंद्र को पलायन रोकने के लिए कहा और उनके लिए खाना, आश्रय, पोषण और चिकित्सा जरुरतों को सुनिश्चित करने के लिए कहा।

केंद्र ने शीर्ष अदालत से कहा कि प्रवासियों पर पानी और रसायनों का छिड़काव करने का सुझाव वैज्ञानिक रूप से काम नहीं करता है और यह सही तरीका नहीं है। अदालत ने प्रवासियों के मुद्दे को उठाने से उच्च न्यायालयों को प्रतिबंधित करने से इनकार करते हुए कहा कि वे इस मुद्दे की ज्यादा बारीकी से निगरानी कर सकते हैं।

केंद्र ने कहा- कामगारों पर रसायनयुक्त पानी का छिड़काव सही नहीं

केंद्र ने इन कामगारों को सैनिटाइज करने के लिए उन पर रसायनयुक्त पानी का छिड़काव करने के एक याचिकाकर्ता के सुझाव पर कहा कि यह वैज्ञानिक तरीके से काम नहीं करता है और यह उचित तरीका नहीं है।

इस बीच, सुप्रीम कोर्ट  ने उच्च न्यायालयों को इन कामगारों के मसले पर विचार करने से रोकने से इंकार कर दिया और कहा कि वे अधिक बारीकी से इस मामले की निगरानी कर सकते हैं। हालांकि, न्यायालय ने केन्द्र सरकार से कहा कि वह शीर्ष अदालत के आदेशों के बारे में उच्च न्यायालयों को अवगत कराने के लिए सरकारी वकीलों को निर्देश दे।

सालिसिटर जनरल ने कहा -इस समय लोगों को दूसरे स्थान पर जाने की अनुमति नहीं दी जा सकती

सालिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि इस समय लोगों को दूसरे स्थान पर जाने की अनुमति नहीं दी जा सकती क्योंकि इससे कोरोना वायरस को फैलने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि करीब 4.14 करोड़ कामगार काम के लिए दूसरे स्थानों पर गए थे लेकिन अब कोरोना वायरस की दहशत से लोग वापस लौट रहे हैं।

सालिसिटर जनरल ने कहा कि इस महामारी से बचाव और इसके फैलाव को रोकने के लिए समूचे देश को लॉकडाउन करने की आवश्यकता हो गई थी ताकि लोग दूसरों के साथ घुले मिलें नहीं और सामाजिक दूरी बनाने के नियमों का पालन करते हुए एक दूसरे से मिल नहीं सकें।

शहरों से ग्रामीण क्षेत्रों की ओर जा रहे 10 में से तीन व्यक्तियों के साथ यह वायरस जाने की संभावना

मेहता ने कहा, ‘‘हम यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहे हैं कि कामगारों का पलायन नहीं हो। ऐसा करना उनके लिए और गांव की आबादी के लिए भी जोखिम भरा होगा। जहां तक ग्रामीण भारत का सवाल है तो यह अभी तक कोरोनावायरस के प्रकोप से बचा हुआ है लेकिन शहरों से ग्रामीण क्षेत्रों की ओर जा रहे 10 में से तीन व्यक्तियों के साथ यह वायरस जाने की संभावना है।’’

उन्होंने कहा कि अंतरराज्यीय पलायन पूरी तरह प्रतिबंधित करने के बारे में राज्यों को आवश्यक परामर्श जारी किए गए हैं और केंद्रीय नियंत्रण कक्ष के अनुसार करीब 6,63,000 व्यक्तियों को अभी तक आश्रय प्रदान किया जा चुका है।

मेहता ने कहा कि 22,88,000 से ज्यादा व्यक्तियों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है क्योंकि ये सभी जरूरतमंद, एक स्थान से दूसरे स्थान जा रहे कामगार और दिहाड़ी मजदूर हैं जो कहीं न कहीं पहुंच गए हैं और उन्हें रोककर आश्रय गृहों में ठहराया गया है।

पीठ ने शुरू में टिप्पणी की, ‘‘हम 24 घंटे के भीतर सूचनाएं उपलब्ध कराने के लिए पोर्टल के बारे में आदेश पारित करेंगे। आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि जिन लोगों को आपने रोका है, उनकी सही तरीके से देखभाल हो और उन्हें भोजन, रहने की जगह, पौष्टिक आहार और चिकित्सा सुविधा मिले। आप उन मामलों को भी देखेंगे जिनकी पहचान आपने कोविड-19 मामले और अलग रहने के लिए की है।

इस पर सालिसिटर जनरल मेहता ने पीठ से कहा कि सरकार जल्द एक ऐसी व्यवस्था लागू करेगी जिसमें कामगारों के व्याप्त भय पर ध्यान दिया जाएगा और उनकी काउन्सलिंग भी की जायेगी।

पीठ ने कहा -आप भजन, कीर्तन, नमाज या जो चाहें कर सकते हैं लेकिन आपको लोगों को ताकत देनी होगी।

 पीठ ने मेहता से सवाल किया कि आप कब ये केन्द्र स्थापित कर देंगे? परामर्शदाता कहां से आ रहे हैं? उन्हें आप कहां भेजेंगे?’’ इस पर मेहता ने कहा कि जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों से इन प्रशिक्षित काउन्सलर को भेजा जाएगा, इस पर पीठ ने कहा, ‘‘देश में 620 जिले हैं। आपके पास कुल कितने काउन्सलर हैं? हम आपसे कहना चाहते हैं कि यह दहशत वायरस से कहीं ज्यादा जिंदगियां बर्बाद कर देगी।

पीठ ने कहा , ‘‘आप भजन, कीर्तन, नमाज या जो चाहें कर सकते हैं लेकिन आपको लोगों को ताकत देनी होगी।’’ इस पर मेहता ने कहा कि प्राधिकारी आश्रय गृहों में पनाह लिए कामगारों को सलाह देने और उनमें आत्मविश्वास पैदा करने के लिए धार्मिक नेताओं को लाएंगे ताकि ये श्रमिक शांत होकर वहां रह सकें।

सालिसिटर जनरल मेहता ने कहा-24 घंटे के भीतर हम प्रशिक्षित परामर्शदाताओं और धार्मिक नेताओं को कर लेंगे तैयार

सालिसिटर जनरल मेहता ने कहा कि मैं यहां बयान दे रहा हूं कि 24 घंटे के भीतर हम प्रशिक्षित परामर्शदाताओं और धार्मिक नेताओं को तैयार कर लेंगे। इसपर पीठ ने कहा कि इस काम में सभी आस्थाओं के धार्मिक नेताओं की मदद ली जानी चाहिए ताकि कामगारों के मन में व्याप्त भय समाप्त किया जा सके।

मेहता ने पीठ से कहा कि इन कामगारों के पलायन को लेकर केरल उच्च न्यायालय में भी एक याचिका दायर की गयी है। चूंकि अब शीर्ष अदालत इस पर गौर कर रही है, इसलिए अन्य अदालतों को इस पर विचार नहीं करना चाहिए।

पीठ ने कहा- हमें इन मामलों की सुनवाई करने से उच्च न्यायालयों को नहीं रोकना चाहिए

पीठ ने कहा, ‘‘इस तरह की स्थिति में, हमें इन मामलों की सुनवाई करने से उच्च न्यायालयों को नहीं रोकना चाहिए। उच्च न्यायालय ज्यादा बारीकी से इनकी निगरानी करने में सक्षम हो सकते हैं।’’ इसके साथ ही पीठ ने मेहता से कहा कि वह अपने सरकारी वकीलों को शीर्ष अदालत के आदेशों से उच्च न्यायालयों को अवगत कराने की हिदायत दें।

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