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आप सांसद संजय सिंह को बड़ी राहत, सुप्रीम कोर्ट ने राजद्रोह मामले में गिरफ्तारी पर लगाई रोक

Tue, 09 Feb 2021 12:03 PM IST
Tanuja Yadav न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Tanuja Yadav Updated Tue, 09 Feb 2021 12:03 PM IST
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SC grants interim relief and stays arrest of aam admi party leader sanjay singh in sedition case
सांसद संजय सिंह - फोटो : amar ujala

आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह को अंतरिम राहत दी है और उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाने का फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट में संजय सिंह के खिलाफ उत्तर प्रदेश में राजद्रोह समेत कई आरोपों के तहत दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की गई थी।

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उच्चतम न्यायालय ने कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस को इन मामलों में सांसद के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए राज्यसभा के सभापति से मंजूरी लेने से रोका नहीं जा रहा है। न्यायालय ने सिंह की उन दो याचिकाओं पर उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर नफरत फैलाने वाले बयान मामले में दर्ज अनेक प्राथमिकियों को एक साथ करने और उन्हें रद्द करने का अनुरोध किया है।
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ये प्राथमिकियां पिछले वर्ष 12 अगस्त को संजय सिंह द्वारा आयोजित संवाददाता सम्मेलन के बाद दर्ज की गई थीं। संजय सिंह ने आरोप लगाया था कि राज्य सरकार समाज के एक खास वर्ग की तरफदारी कर रही है। न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति आर एस रेड्डी की पीठ ने सुनवाई के दौरान सिंह के वकील के कहा कि वह जाति और धर्म के आधार पर समाज को बांट नहीं सकते।

संजय सिंह की ओर से पेश अधिवक्ता विवेक तन्खा और सुमीर सोढ़ी ने कहा कि पुलिस ने मामला दर्ज करते वक्त प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया और राज्य सभा के सांसद के खिलाफ कार्रवाई के लिए मंजूरी नहीं ली गई। इस पर पीठ ने कहा कि वह इस चरण में मंजूरी के पहलू पर गौर नहीं करेंगे लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि सिंह के खिलाफ कोई अपराध नहीं लगाए गए हैं।

बता दें कि दो फरवरी को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सिंह को लखनऊ में दर्ज एक प्राथमिकी पर जारी गैर जमानती वारंट से सुरक्षा देने से इनकार किया था। आप नेता ने उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में अपने खिलाफ दर्ज कई प्राथमिकियों को रद्द किए जाने के लिए शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था।

उन्होंने आरोप लगाया था कि ये प्राथमिकियां ‘‘दुर्भावनापूर्ण तरीके से राजनीतिक बदले की भावना के तहत दर्ज’’ की गई थीं। संजय सिंह ने एक अन्य याचिका में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 21 जनवरी के उस फैसले को भी चुनौती दी है, जिसमें लखनऊ में दर्ज प्राथमिकी रद्द करने से इनकार कर दिया था।

संजय सिंह ने अपने खिलाफ दर्ज अनेक प्राथमिकियों को रद्द करने का अनुरोध करने वाली एक याचिका में कहा है कि संबंधित संवाददाता सम्मेलन में केवल खास सामाजिक मुद्दे और बिना नाम लिए सरकार द्वारा समाज के एक विशेष वर्ग के प्रति सहानुभूति रखने जैसे सवाल उठाए थे।


आप नेता ने कहा है कि संवाददाता सम्मेलन के बाद उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के थानों में भाजपा के सदस्यों के इशारे पर उनके खिलाफ कई प्राथमिकी दर्ज की गईं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में उन्हें लखनऊ, संत कबीरनगर, खीरी, बागपत, मुजफ्फरनगर ,बस्ती और अलीगढ़ जैसे आठ जिलों में दर्ज केवल आठ प्राथमिकियों के बारे में ही जानकारी है।

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