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याचिका खारिज होने के बाद भी जिरह करने पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाया जुर्माना
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
Updated Sat, 07 May 2016 10:22 PM IST
सार
- किसी को भी अदालत के अनुशासन को नजरअंदाज करने की इजाजत नहीं दी जा सकती
- जुर्माना भरने के आदेश के बाद भी वकील ने अपना जिरह जारी रखी
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विस्तार
जस्टिस खेहड़ ने कहा कि किसी को भी अदालत के अनुशासन को नजरअंदाज करने की इजाजत नहीं दी जा सकती। उन्होंने कहा कि अदालत में अनुशासन बना रहना चाहिए। वैवाहिक और संपत्ति विवाद के एक मामले में दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका को न्यायमूर्ति जेएस खेहड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने खारिज कर दिया। याचिका खारिज करने के बाद याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील जिरह करते रहे। वकील बार-बार अदालत से गुहार लगा रहे थे। इस बात से नाराज न्यायमूर्ति जेएस खेहड़ ने 20 हजार रुपये का जुर्माना कर दिया।
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जुर्माना भरने के आदेश के बाद भी वकील ने अपना जिरह जारी रखी, जिससे खफा होकर न्यायमूर्ति जेएस खेहड़ ने जुर्माने की राशि 20 हजार से बढ़ाकर 40 हजार रुपये कर दी। जिसके बाद वकील ने माफी मांगी। वकील ने कहा कि उनकी मुवक्किल महिला है, लिहाजा उन पर दया दिखाई जाए। लेकिन पीठ ने वकील से कहा हम तभी माफी स्वीकार करेंगे जब आप अदालत की अवमानना का नोटिस लेते हुए जाएं। चूंकि आपने कोई गलती नहीं की है, इसलिए क्षमा मांगने की जरूरत नहीं है। पीठ ने जुर्माने को तर्कसंगत बताते हुए कहा कि अदालत में न्यायिक अनुशासन तो बना ही रहना चाहिए।
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दूसरा मामला महाराष्ट्र में झुग्गी झोपड़ियों का हटाने से जुड़ा था। झुग्गीवासी वैकल्पिक जगह लेने को तैयार नहीं थे। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के इस फैसले को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी। पीठ ने उनकी याचिका खारिज करते हुए यह भी कहा कि इन झुग्गीवासियों को जगह खाली करने का निर्देश दिया गया था, लेकिन वे बिल्डरों से पैसे की मांग कर रहे हैं। पीठ ने कहा कि आप अपनी लड़ाई जारी रखिए, हम ऐसा हर दिन देखते हैं। इसके बाद भी वकील ने जिरह जारी रखी, जिस पर पीठ ने 20 हजार रुपये का जुर्माना ठोंक दिया। अदालत ने कहा कि यह रकम सुप्रीम कोर्ट लीगल सर्विस अथॉरिटी के खाते में जाएगी।
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