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SC: PMLA के प्रावधान को चुनौती देने वाली याचिका खारिज, कोर्ट ने कहा-आम लोगों की तरह ही ट्रायल का सामना करें

Tue, 06 Jan 2026 02:27 PM IST
लव गौर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: लव गौर Updated Tue, 06 Jan 2026 02:27 PM IST
सार

सर्वोच्च अदालत ने अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर डील से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों का सामना कर रहे एक वकील की याचिका मंगलवार को खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने पीएमएलए (धन शोधन निवारण अधिनियम) की वैधता को चुनौती दी थी। 

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SC dismiss lawyer plea facing money laundering charges in connection with Agusta Westland VVIP helicopter deal
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : पीटीआई

विस्तार

अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलीकॉप्टर सौदे के संबंध में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों का सामना कर रहे एक वकील की याचिका को मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया। याचिका में वकील ने पीएमएलए (धन शोधन निवारण अधिनियम)  के एक प्रावधान की वैधता को चुनौती दी थी। कोर्ट ने कहा कि उन्हें आम नागरिकों की तरह ही ट्रायल का सामना करना चाहिए।

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मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने वकील गौतम खेतान द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करने से इनकार करते हुए कहा, 'सिर्फ इसलिए कि मैं अमीर हूं, मैं कानून की वैधता को चुनौती दूंगा... यह प्रथा बंद होनी चाहिए।'
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वकील गौतम खेतान की याचिका खारिज
मुख्य न्यायाधीश ने कहा, 'यह अब एक अनोखी प्रवृत्ति बन गई है। जब मुकदमा चल रहा होता है, तो धनी और संपन्न लोग कानून की वैधता को चुनौती देने के लिए इस अदालत का रुख करते हैं। यदि आप आरोपी हैं, तो किसी भी अन्य आम नागरिक की तरह मुकदमे का सामना करें।' खैतान ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 44(1)(सी) को चुनौती दी है।
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इस प्रावधान के तहत यह अनिवार्य है कि यदि नामित पीएमएलए विशेष न्यायालय के अलावा कोई अन्य न्यायालय किसी "अनुसूचित अपराध" (आधारभूत अपराध) का संज्ञान लेता है, तो अधिकृत प्राधिकारी के आवेदन पर मामले को धन शोधन अपराध से निपटने वाले विशेष न्यायालय में स्थानांतरित किया जाना चाहिए। इस प्रावधान का उद्देश्य क्षेत्राधिकार संबंधी विवादों को रोकना, मुकदमों को सुव्यवस्थित करना और एक ही अदालत को मूल अपराध और धन शोधन के आरोप दोनों पर निर्णय देने में सक्षम बनाकर एकरूपता सुनिश्चित करना है।

कानून को चुनौती देकर ट्रायल से बचने की कोशिश ना करें: कोर्ट
सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि वह उस प्रवृत्ति को स्वीकार नहीं करती है, जिसे उसने धनी आरोपियों द्वारा आपराधिक मुकदमों के दौरान वैधानिक प्रावधानों की वैधता को चुनौती देने के लिए सर्वोच्च न्यायालय का रुख करने की बढ़ती प्रवृत्ति के रूप में वर्णित किया है। खैतान की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने कहा कि धारा 44(1)(सी) की संवैधानिक वैधता प्रश्न में है और अदालत द्वारा इसकी जांच की आवश्यकता है।


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पीठ ने कहा कि विजय मदनलाल मामले में उसके फैसले से उत्पन्न समीक्षा याचिकाओं में पीएमएलए के प्रावधानों की वैधता पहले से ही विचाराधीन है। मुख्य न्यायाधीश ने कहा, 'चूंकि पीएमएलए के प्रावधानों की वैधता से संबंधित मुद्दा कुछ समीक्षा याचिकाओं में विचाराधीन है, इसलिए हमें लगता है कि धारा 44(1)(सी) की वैधता की जांच उन कार्यवाही के दौरान की जानी चाहिए। हमें अलग से रिट याचिका पर विचार करने का कोई कारण नहीं दिखता।' पीठ ने याचिका खारिज कर दी, लेकिन कानूनी प्रश्न को खुला रखा।

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