Supreme Court: राज्य सरकारों को निर्देश, वयस्क महिलाओं को संरक्षण गृह से रिहा करने के लिए सर्वे करें
सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को दिए अपने आदेश में कहा कि हम राज्य सरकारों को सिफारिश संख्या (iv) के अनुसार, सर्वेक्षण कराने और आज से 12 सप्ताह के भीतर इस मामले में अदालत को एक रिपोर्ट पेश करने का निर्देश देते हैं।
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सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को राज्य सरकारों को अनैतिक तस्करी रोकथाम अधिनियम (आईटीपीए) के संरक्षण गृहों से वयस्क महिलाओं, जिन्हें उनकी इच्छा के विरुद्ध हिरासत में लिया गया है, उनकी रिहाई सुनिश्चित करने के लिए सर्वेक्षण कराने का निर्देश दिया। यह निर्देश अदालत द्वारा नियुक्त पैनल द्वारा की गई सिफारिश के अनुसार दिया गया है।
न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति सीटी रविकुमार की पीठ ने राज्य सरकारों को अपनी सिफारिश के अनुसार सर्वेक्षण कराने का निर्देश दिया। कोर्ट ने 19 मई, 2022 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त पैनल द्वारा की गई कुछ सिफारिशों को स्वीकार कर लिया था।
सिफारिशों में से एक के अनुसार, न्यायालय ने 25 मई को राज्य सरकारों को सभी आईटीपीए प्रोटेक्टिव होम (संरक्षण गृह) का सर्वेक्षण करने का निर्देश दिया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वयस्क महिलाओं के मामले, जिन्हें उनकी इच्छा के विरुद्ध हिरासत में लिया गया है, उस पर पुनर्विचार किया जा सकता है और समय पर रिहाई के लिए संसाधित किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित पैनल द्वारा इस आशय की सिफारिशें किए जाने के बाद निर्देश पारित किए गए।
अदालत ने शनिवार को दिए अपने आदेश में कहा, "हम राज्य सरकारों को सिफारिश संख्या (iv) के अनुसार, सर्वेक्षण कराने और आज से 12 सप्ताह की अवधि के भीतर इस मामले में अदालत को एक रिपोर्ट पेश करने का निर्देश देते हैं।" कोर्ट ने कहा कि संबंधित राज्य सरकारों में संबंधित विभाग के सचिव द्वारा दायर हलफनामे के आधार पर रिपोर्ट पेश की जाएगी।
न्यायालय संविधान के अनुच्छेद 21 के अनुसार, यौनकर्मियों को सम्मान से जीने के लिए अनुकूल परिस्थितियों की मांग को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा था।प्रतिवादी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील आनंद ग्रोवर ने कहा कि अदालत के निर्देशानुसार राज्य सरकारों द्वारा सर्वेक्षण नहीं कराया गया है। आनंद ग्रोवर ने कहा कि 25 मई को अदालत के पिछले निर्देशों के बावजूद कई यौनकर्मियों को अभी भी जेलों में बंद किया जा रहा है।
इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त पैनल ने इस मामले सहित विभिन्न दिशा-निर्देशों की सिफारिश की थी। उन सिफारिशों में कहा गया था कि "जब भी किसी वेश्यालय पर छापा पड़ता है, तो संबंधित यौनकर्मियों को गिरफ्तार या दंडित या परेशान या पीड़ित नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि स्वैच्छिक यौन कार्य अवैध नहीं है, केवल वेश्यालय चलाना गैरकानूनी है।"
मई में कोर्ट ने जोर देकर कहा था कि मानव शालीनता और गरिमा की बुनियादी सुरक्षा यौनकर्मियों तक फैली हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि पुलिस को यौनकर्मियों के साथ सम्मान का व्यवहार करना चाहिए और मौखिक या शारीरिक रूप से उनका उत्पीड़न नहीं करना चाहिए।
पैनल ने विभिन्न दिशा-निर्देशों की सिफारिश की थी, जिसमें कहा गया था कि "यौनकर्मी कानून के समान संरक्षण के हकदार हैं और जब यह स्पष्ट हो जाता है कि यौनकर्मी वयस्क है और सहमति से यौन कार्य में शामिल हो रही है, तो ऐसे में पुलिस को हस्तक्षेप करने या कोई आपराधिक कार्रवाई करने से बचना चाहिए।"