SC: पश्चिम बंगाल सरकार की याचिका पर SC ने नहीं लगाई रोक, कहा- गर्मियों की छुट्टी के बाद उठाएंगे मामला
पश्चिम बंगाल सरकार की तरफ से सुनवाई में पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी और गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि हाईकोर्ट ने आदेश में चंदन नगर हिंसा की सिर्फ एक एफआईआर का उल्लेख किया है। शंकरनारायणन ने कहा कि चंदन नगर एफआईआर की जांच के आदेश एनआईए द्वारा करने की अनुमति दे सकते हैं।
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पश्चिम बंगाल में रामनवमी पर हुई हिंसा मामले में राज्य सरकार की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने हिंसा की जांच एनआईए को सौंपने की हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है।
गर्मियों की छुट्टी के बाद दोबारा मामले को उठाया जाएगा
भारत के चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने बंगाल हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली पश्चिम बंगाल सरकार की याचिका को गर्मियों की छुट्टी तक टाल दिया है। पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि हमने आदेश पर रोक नहीं लगाया है। गर्मियों की छुट्टी के बाद दोबारा मामले को उठाएंगे।
हम ऐसे मामले में अदालत के फैसले का तिरस्कार नहीं कर सकते
पश्चिम बंगाल सरकार की तरफ से सुनवाई में पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी और गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि हाईकोर्ट ने आदेश में चंदन नगर हिंसा की सिर्फ एक एफआईआर का उल्लेख किया है। शंकरनारायणन ने कहा कि चंदन नगर एफआईआर की जांच के आदेश एनआईए द्वारा करने की अनुमति दे सकते हैं। लेकिन बाकी पांचों एफआईआर की जांच बंगाल पुलिस द्वारा ही की जानी चाहिए। सिंघवी का कहना है कि जब तक देश की संप्रभुता और सुरक्षा प्रभावित न हो, तब तक एनआईए को हिंसा की जांच नहीं सौंपनी चाहिए। पीठ ने दलीलों के बाद कहा कि यह ऐसा मामला नहीं है, जहां हम अदालत के फैसले का तिरस्कार करें। हाईकोर्ट के आदेश अनुसार, जांच एनआईए को स्थानांतरित कर दिया गया है।
हिंसा में विस्फोटक का इस्तेमाल नहीं हुआ
गुरुवार को पश्चिम बंगाल सरकार ने एनआईए को जांच स्थानांतरित करने के आदेश का विरोध किया था। विरोध करते हुए उन्होंने कहा था कि हिंसा में किसी भी विस्फोटक का इस्तेमाल नहीं हुआ था। कोर्ट ने विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी द्वारा दायर राजनीतिक रूप से प्रेरित जनहित याचिका के बाद आदेश दिया था। सुनवाई के दौरान सिंघवी ने कहा कि राज्य पुलिस को जांच के दौरान विस्फोटकों के इस्तेमाल का कोई सबूत नहीं मिला है।
दिल्ली विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष की नियुक्ति से संबंधित आदेश भी दिए
भारत के चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिल्ली विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष की नियुक्ति के लिए आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि दो सप्ताह के भीतर अध्यक्ष की नियुक्ति की जाए। विद्युत अधिनियम की धारा 84 का उल्लेख करते हुए चीफ जस्टिस ने कहा कि राज्य आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति का प्रावधान है। राज्य सरकार किसी भी व्यक्ति को उच्च न्यायालय के वर्तमान या सेवानिवृत्त न्यायाधीश को अध्यक्ष के रूप में नियुक्त कर सकती है। कोर्ट ने कहा कि जिस हाईकोर्ट के जस्टिस या पूर्व जस्टिस को नियुक्त किया जाएगा, उस हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से पहले परामर्श करना होगा।
अवैध खनन: रेड्डी के खिलाफ सुनवाईचार महीने में पूरी करने का सुप्रीम आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक के पूर्व मंत्री जी जनार्दन रेड्डी के खिलाफ करोड़ों के अवैध खनन मामले में सुनवाई चार महीने में पूरी करने का निर्देश दिया। जस्टिस अनिरुद्ध बोस और जस्टिस सुधांशु धूलिया की पीठ ने हैदराबाद में सीबीआई मामलों के विशेष जज के पत्र पर विचार करने के बाद आदेश पारित किया।
पीठ ने कहा, हम सामान्य परिस्थितियों में इस अदालत के पहले के एक आदेश के मद्देनजर इस तरह के समय का विस्तार देने के इच्छुक नहीं थे। लेकिन इस तथ्य पर विचार करते हुए कि बड़ी संख्या में ऐसे गवाह हैं जिनकी जांच की जानी बाकी है, हम मुकदमे के समापन के लिए चार महीने का अतिरिक्त समय देते हैं। हम आशा करते हैं कि तय समय के अंदर सुनवाई पूरी हो जाएगी। करोड़ों के खनन घोटाले में रेड्डी को सितंबर 2011 में गिरफ्तार किया गया था। जनवरी 2015 में रेड्डी को जमानत मिली थी। सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देते हुए रेड्डी को खनन वाले जिलों में जाने से रोक दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल निचली अदालत को 9 नवंबर से रोजाना सुनवाई करते हुए हर हाल में छह महीने में मामले का निपटारा करने का निर्देश दिया था।