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दिल्ली में अतिक्रमण की लंबाई दिल्ली से कन्याकुमारी का सफर जैसी : सुप्रीम कोर्ट

Sat, 08 Sep 2018 01:29 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 08 Sep 2018 01:29 AM IST
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SC Comments on delhi encroachment says Length of encroachment like travels from Delhi to Kanyakumari

देश की राजधानी दिल्ली में करीब 2280 किलोमीटर सड़क व फुटपाथों पर अतिक्रमण के ‘जंजाल’ के आंकड़े पर सुप्रीम कोर्ट ने घोर आश्चर्य जताया। कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि यह लंबाई तो दिल्ली से कन्याकुमारी तक सफर करने जैसी है।

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जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ ने कहा कि इससे दिल्ली में अतिक्रमण की समस्या का अंदाजा लगाया जा सकता है। सरकारी जमीन पर इस कदर अतिक्रमण गंभीर और चिंता का विषय है। पीठ ने दिल्ली सरकार से कहा कि आप समझ सकते हैं कि किस कदर अतिक्रमण है। इस समस्या को गंभीरता से लेने की जरूरत है।
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सीलिंग और अतिक्रमण मामले की सुनवाई के दौरान पीठ को जानकारी दी गई कि 31 अगस्त तक उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, उत्तरी दिल्ली नगर निगम क्षेत्र में 844.33 किलोमीटर, दक्षिणी दिल्ली नगर निगम में 811.01 किलोमीटर और पूर्वी दिल्ली नगर निगम में 601.20 किलोमीटर सड़कों व फुटपाथ से अतिक्रमण हटाए गए। इसके अलावा नई दिल्ली नगर पालिका परिषद क्षेत्र में 11 किलोमीटर और दिल्ली विकास प्राधिकरण क्षेत्र से 12.44 किलोमीटर सड़कों से अतिक्रमण हटाया गया। 
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इस आंकड़े पर पीठ ने आश्चर्य जताते हुए कहा कि यानी दिल्ली की सड़कों पर इतना अतिक्रमण है मानो दिल्ली से कन्याकुमारी तक अतिक्रमण हो रखा हो। इस मामले में एमाइकस क्यूरी ने पीठ को बताया कि दिल्ली की सरकारी अथॉरिटी की उदासीनता के कारण यहां इस कदम अतिक्रमण है।

पीठ ने यह भी साफ किया कि अदालती आदेश के तहत सीलिंग और अतिक्रमण की कार्यवाही के लिए गठित स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) अगर कोई अतिक्रमण हटाती है तो संबंधित अथॉरिटी द्वारा यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि उस इलाके में फिर अतिक्रमण न हो। मामले की अगली सुनवाई 12 सितंबर को होगी।
 

वन क्षेत्र और जलाशयों में अतिक्रमण का भी उठा मुद्दा

वहीं सुनवाई के दौरान निगरानी समिति की ओर से पेश वकील एडीएन राव ने दिल्ली के वन क्षेत्र और जलाशयों में अतिक्रमण का भी मसला उठाया। उन्होंने एक रिपोर्ट दाखिल कर पीठ को बताया कि दिल्ली के कई जलाशय या तो सूख गए हैं या वहां अतिक्रमण है। इस पर दिल्ली सरकार की ओर से पेश वकील ने कहा कि वह इस मामले में वन विभाग और दिल्ली जल बोर्ड द्वारा की गई कार्रवाई को लेकर हलफनामा दाखिल करेंगे। 

निगरानी समिति ने कहा, स्थानीय निकायों से नहीं मिल रहा सहयोग
वहीं निगरानी समिति ने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है लेकिन उसे डीडीए सहित अन्य स्थानीय निकायों से उचित सहयोग नहीं मिल पा रहा है। इस पर पीठ ने कहा कि तमाम अथॉरिटी व पुलिस से उम्मीद की जानी चाहिए कि वह कमेटी को पूरा सहयोग करेंगे जिससे कि काम सही तरीके से हो। 

लगता है एसटीएफ भी किसी दबाव में काम कर रहा है : पीठ

सुप्रीम कोर्ट ने एसटीएफ पर नाराजगी जताते हुए कहा कि स्पेशल टास्क फोर्स को इतने अधिकार दिए गए हैं फिर भी हमें नतीजे नहीं मिल रहे हैं। लगता है कि वह भी किसी के दबाव में काम कर रहा है। दरअसल निगरानी समिति ने अपने रिपोर्ट में दावा किया कि एसटीएफ न तो उससे संवाद कर रहा है और न ही अपनी कार्रवाई के बारे में जानकारी दे रहा है। पीठ ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि नि:संदेह एसटीएफ पर कोई दबाव बना रहा है। हम नहीं जानते ये बिल्डर हैं या फिर कोई अन्य। रिपोर्ट से लगाता है कि एसटीएफ किसी दबाव में है। 

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